लाल किले पर पहली बार गूंजा ‘वंदे मातरम्’, 150 साल की विरासत से जुड़ा खास मौका; जानें इसकी खासियत

15 अगस्त 2026 का स्वतंत्रता दिवस समारोह इस बार एक ऐसे ऐतिहासिक पल का गवाह बना, जिसकी चर्चा लंबे समय तक होती रहेगी। लाल किले पर पहली बार ‘वंदे मातरम्’ के गायन ने समारोह का माहौल बदल दिया।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 15 August 2026, 7:53 AM IST
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New Delhi: 15 अगस्त 2026 का स्वतंत्रता दिवस समारोह लाल किले पर इस बार कुछ अलग और ऐतिहासिक रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहुंचने के बाद लाल किले की प्राचीर से पहली बार ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया गया। इसके बाद राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। इस बदलाव ने इस साल के स्वतंत्रता दिवस समारोह को पहले से कहीं ज्यादा खास बना दिया।

150 साल की विरासत से जुड़ा खास मौका

‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के मौके पर देशभर में सालभर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार ने 7 नवंबर 2025 से 7 नवंबर 2026 तक इसके 150 साल पूरे होने का राष्ट्रीय स्मरण समारोह चलाया है। सरकार के मुताबिक यह गीत भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में एकजुटता, साहस और देशभक्ति की भावना का मजबूत प्रतीक रहा है।

इस खास मौके पर लाल किले के समारोह में ‘वंदे मातरम्’ को शामिल करना केवल कार्यक्रम में एक और प्रस्तुति जोड़ना नहीं था। इसे स्वतंत्रता आंदोलन की उस भावना से जोड़कर देखा गया, जब यही गीत अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लोगों में जोश भरने वाली आवाज बन गया था।

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प्रधानमंत्री के पहुंचते ही गूंजा राष्ट्रीय गीत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाल किले पहुंचने के बाद ‘वंदे मातरम्’ का गायन हुआ। समारोह में मौजूद लोगों को इसके सम्मान में खड़े रहने के लिए कहा गया। इसके बाद प्रधानमंत्री ने तिरंगा फहराया।

'वंदे मातरम' गीत के बोल

बता दें कि शुरुआत के ये दो पद (स्टैंजा) राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त हिस्सा हैं, जो पारंपरिक रूप से 'वंदे मातरम' के आधिकारिक इस्तेमाल से जुड़े हैं। "वंदे मातरम" वाक्यांश का अर्थ है - "हे मां, मैं तुम्हें नमन करता हूं।"

“वन्दे मातरम्।”

सुजलाम् सुफलाम् मलयजशीतलाम्,

शस्यश्यामलाम् मातरम्। वन्दे मातरम्।

शुभ्रज्योत्सना पुलकितयामिनीम्,

पूर्णकुसुमित द्रुमदलशोभिनिम्,

सुहासिनीम् सुमधुर्भाषिणीम्,

सुखदम् वरदाम् मातरम्। वन्दे मातरम्।”

युवा शक्ति भी समारोह के केंद्र में

2026 के स्वतंत्रता दिवस समारोह की थीम में युवा शक्ति को खास जगह दी गई है। 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में युवाओं की भूमिका को सामने लाने पर जोर दिया जा रहा है। समारोह से जुड़े कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में युवा, एनसीसी कैडेट और ‘माई भारत’ के स्वयंसेवकों की भागीदारी भी देखने को मिल रही है।

आखिर क्यों इतना खास है ‘वंदे मातरम्’?

बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की यह रचना भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास से गहराई से जुड़ी है। 1875 में रची गई इस रचना को बाद में उनके उपन्यास आनंदमठ में शामिल किया गया। 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे गाया था। इसके बाद यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशभक्ति की एक प्रभावशाली आवाज बन गया।

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‘वंदे मातरम्’ का अर्थ सामान्य तौर पर मातृभूमि को नमन करना माना जाता है। इसमें भारत की धरती, प्रकृति और समृद्धि को मां के रूप में देखा गया है। इसी वजह से यह गीत सिर्फ एक रचना नहीं रहा, बल्कि आजादी की लड़ाई की यादों से जुड़ी भावनात्मक विरासत बन गया।

राष्ट्रगान से अलग है इसका दर्जा

यहां एक बात समझना जरूरी है। ‘जन गण मन’ भारत का राष्ट्रगान है, जबकि ‘वंदे मातरम्’ राष्ट्रीय गीत है। दोनों की अपनी अलग ऐतिहासिक पहचान और महत्व है। 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने ‘वंदे मातरम्’ की ऐतिहासिक भूमिका को देखते हुए इसे ‘जन गण मन’ के बराबर सम्मान दिए जाने की बात कही थी।

Location :  New Delhi

Published :  15 August 2026, 7:53 AM IST

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