Toll Plaza Big Update: 1 अप्रैल 2026 से नेशनल हाईवे पर खत्म हो सकता है कैश पेमेंट, जानें क्या बदलेगा

1 अप्रैल 2026 से नेशनल हाईवे टोल प्लाजा पर कैश पेमेंट बंद हो सकता है। सरकार FASTag और UPI जैसे डिजिटल मोड को अनिवार्य बनाने की तैयारी में है। जानिए नए नियम, कारण और संभावित फायदे।

Post Published By: Sapna Srivastava
Updated : 21 February 2026, 9:25 AM IST
google-preferred

New Delhi: नेशनल हाईवे पर सफर करने वालों के लिए अहम खबर है। सरकार 1 अप्रैल 2026 से टोल प्लाजा पर नकद लेनदेन पूरी तरह बंद करने की तैयारी कर रही है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में टोल टैक्स चुकाने के लिए सिर्फ डिजिटल विकल्पों जैसे FASTag और UPI पर निर्भर रहना पड़ सकता है। इस कदम का मकसद टोल कलेक्शन को पूरी तरह डिजिटल बनाना और हाईवे पर जाम की समस्या कम करना है।

अभी क्या है नियम?

मौजूदा व्यवस्था के तहत अगर किसी वाहन पर वैलिड FASTag नहीं है या वह काम नहीं कर रहा, तो वाहन चालक से सामान्य टोल का दोगुना शुल्क वसूला जाता है। वहीं अगर कोई वाहन चालक UPI के जरिए भुगतान करता है, तो उसे अपनी गाड़ी की श्रेणी के हिसाब से तय टोल का लगभग 1.25 गुना भुगतान करना होता है।

सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, UPI विकल्प को कैश ट्रांजैक्शन कम करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। शुरुआत में कुल टोल कलेक्शन में कैश की हिस्सेदारी करीब 2 प्रतिशत थी, जो अब घटकर लगभग 1 प्रतिशत रह गई है। सभी टोल प्लाजा पर UPI से भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराई जा चुकी है।

ओवरलोडिंग पेनल्टी भी होगी कैशलेस

रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार ओवरलोडिंग से जुड़े जुर्माने को भी डिजिटल मोड में लाने पर विचार कर रही है। फिलहाल यह भुगतान अधिकतर नकद में किया जाता है। प्रस्ताव है कि ओवरलोडिंग पेनल्टी भी पूरी तरह कैशलेस हो, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी और आसान बने।

सेना के जवान से बदसलूकी पर NHAI का बड़ा एक्शन, टोल एजेंसी को दी कड़ी सजा

कैश सिस्टम खत्म करने की बड़ी वजहें

National Highways Authority of India यानी NHAI के मुताबिक, इस प्रस्ताव का उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन को और मजबूत बनाना है। कैश पेमेंट में अक्सर समय ज्यादा लगता है। छुट्टे पैसे देने, रसीद काटने और लेनदेन की प्रक्रिया में देरी के कारण टोल प्लाजा पर लंबी कतारें लग जाती हैं।

इससे न सिर्फ समय की बर्बादी होती है बल्कि ईंधन की खपत भी बढ़ती है। डिजिटल पेमेंट से वाहन बिना रुके आगे बढ़ सकेंगे, जिससे ट्रैफिक फ्लो बेहतर होगा। इसके अलावा, टोल ट्रांजैक्शन में पारदर्शिता आएगी और गड़बड़ी या टोल चोरी की संभावना भी कम होगी।

सालाना हजारों करोड़ की बचत संभव

एक अध्ययन में दावा किया गया है कि अगर टोल प्लाजा पर पूरी तरह डिजिटल भुगतान लागू हो जाए, तो देश को सालाना करीब 87,000 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है। कैश लेनदेन में होने वाली देरी, ईंधन की खपत और प्रशासनिक लागत में कमी इसका बड़ा कारण है। साथ ही, ड्राइवर और टोल कर्मियों के बीच छुट्टे पैसे को लेकर होने वाले विवाद भी खत्म हो जाएंगे।

NHAI Recruitment 2025: सरकारी नौकरी का सुनहरा मौका, 84 पदों पर वैकेंसी, सैलरी 2 लाख तक

क्या आने वाला है बैरियर-फ्री टोलिंग?

सरकार भविष्य में बैरियर-फ्री टोलिंग सिस्टम लागू करना चाहती है। यानी वाहन अपनी रफ्तार से गुजरेंगे और टोल अपने आप कट जाएगा। इसके लिए पूरी तरह कैशलेस सिस्टम जरूरी है।

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 21 February 2026, 9:25 AM IST

Advertisement
Advertisement