मोबाइल यूजर्स के मंथली प्लान में छुपी है लूट, इनकमिंग कॉल बंद करने का काला खेल; संसद में गूंजी आवाज

बजट सत्र के दूसरे चरण के तीसरे दिन संसद में मोबाइल रिचार्ज प्लान का एक बड़ा मामला उठाया गया। यह भी बताया गया कि मोबाइल कंपनियां इनकमिंग कॉल बंद करके यूजर्स के साथ कैसे काला खेल खेलती है। जिसके बाद मोबाइल रिचार्ज के खेल में छुपे एक ऐसे ‘सिस्टम’ पर सवाल उठ गया है, जो आम जनता से जुड़ा हुआ है।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 11 March 2026, 3:12 PM IST
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New Delhi: मोबाइल रिचार्ज के खेल में छुपे एक ऐसे ‘सिस्टम’ पर सवाल उठ गया है, जो करोड़ों यूजर्स की जेब पर न केवल हर साल अतिरिक्त बोझ डालता है बल्कि उनको सामने नया संकट भी पैदा करता है। संसद में आम आदमी पार्टी के सांसद Raghav Chadha ने टेलीकॉम कंपनियों के प्रीपेड प्लान का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यह आम लोगों के साथ एक तरह की ‘छुपी हुई लूट’ है। उनका आरोप है कि 28 दिन की वैलिडिटी वाले प्लान के कारण यूजर्स को साल में 12 नहीं बल्कि 13 बार रिचार्ज करना पड़ता है।

28 दिन के प्लान पर क्यों उठे सवाल?

राज्यसभा में बोलते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि भारत में ज्यादातर प्रीपेड मोबाइल प्लान 28 दिन की वैलिडिटी के साथ आते हैं। पहली नजर में यह सामान्य लगता है, लेकिन अगर पूरे साल का हिसाब लगाया जाए तो तस्वीर अलग दिखती है। 28 दिन के हिसाब से साल भर की वैलिडिटी पूरी करने के लिए यूजर को 13 बार रिचार्ज करना पड़ता है।

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उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कंपनियां इसे ‘मंथली प्लान’ कहती हैं तो इसकी वैधता 30 या 31 दिन क्यों नहीं होती। उनके मुताबिक इस व्यवस्था से कंपनियों को साल में एक अतिरिक्त रिचार्ज का फायदा मिल जाता है, जबकि आम यूजर्स को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है।

रिचार्ज खत्म होते ही इनकमिंग कॉल क्यों बंद?

आप सांसद ने संसद में एक और अहम मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि जब किसी यूजर का रिचार्ज खत्म हो जाता है तो आउटगोइंग कॉल बंद होना समझ में आता है, लेकिन कई बार टेलीकॉम कंपनियां इनकमिंग कॉल भी बंद कर देती हैं।

उनका कहना है कि आज के दौर में मोबाइल नंबर सिर्फ बातचीत का जरिया नहीं है, बल्कि बैंकिंग, ओटीपी, सरकारी सेवाओं और नौकरी से जुड़े कॉल के लिए भी बेहद जरूरी हो गया है। ऐसे में अगर रिचार्ज खत्म होते ही इनकमिंग कॉल बंद हो जाए तो आम लोगों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

टेलीकॉम कंपनियों का तर्क क्या है?

टेलीकॉम कंपनियों का कहना है कि 28 दिन का प्लान दरअसल चार हफ्तों के बराबर होता है। इससे उनके बिलिंग सिस्टम और प्लान मैनेजमेंट को सरल बनाया जा सकता है। हालांकि कई एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इस मॉडल से कंपनियों को साल में एक अतिरिक्त रिचार्ज का फायदा जरूर मिलता है।

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भारत में टेलीकॉम सेक्टर को Telecom Regulatory Authority of India यानी TRAI रेगुलेट करता है। नियमों के मुताबिक कंपनियों को कम से कम 30 दिन या उससे ज्यादा वैधता वाला प्लान देना जरूरी है, लेकिन 28 दिन वाले प्लान पर फिलहाल कोई रोक नहीं है।

आम लोगों पर क्या पड़ता है असर

विशेषज्ञों का मानना है कि मोबाइल आज के दौर में लग्जरी नहीं बल्कि एक जरूरी सुविधा बन चुका है। देश में करोड़ों लोग बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट, सरकारी योजनाओं और नौकरी से जुड़ी जानकारी के लिए मोबाइल पर ही निर्भर हैं। ऐसे में अगर रिचार्ज खत्म होते ही कॉल और मैसेज बंद हो जाएं तो इसका असर सीधे आम लोगों पर पड़ता है, खासकर उन लोगों पर जो सीमित आय में मोबाइल सेवा का इस्तेमाल करते हैं।

राघव चड्ढा ने सरकार और टेलीकॉम कंपनियों से अपील की है कि रिचार्ज प्लान को ज्यादा पारदर्शी और उपभोक्ता हितैषी बनाया जाए। उनका सुझाव है कि रिचार्ज की वैधता कैलेंडर महीने के हिसाब से तय होनी चाहिए। जिससे यूजर्स को साल में अतिरिक्त रिचार्ज न करना पड़े। फिलहाल इस मुद्दे पर सोशल मीडिया और टेक सेक्टर में बहस तेज हो गई है।

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 11 March 2026, 3:12 PM IST

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