Rajiv Gandhi: राजीव गांधी हत्याकांड के दोषी पेरारीवलन बने वकील, जानें जेल से कोर्ट तक का सफर

राजीव गांधी हत्याकांड में दोषी रहे ए.जी. पेरारीवलन अब वकील बन गए हैं। 31 साल जेल में बिताने के बाद उन्होंने कानून की पढ़ाई की और अब गरीब कैदियों को न्याय दिलाने का संकल्प लिया है।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 28 April 2026, 3:03 PM IST
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New Delhi: पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी हत्याकांड में दोषी ठहराए गए ए.जी. पेरारीवलन ने अब अपनी जिंदगी का नया अध्याय शुरू किया है। 31 साल जेल में बिताने और फांसी की सजा का सामना करने के बाद वह अब वकील बन गए हैं। उन्होंने तमिलनाडु और पुडुचेरी बार काउंसिल में पंजीकरण कराया है।

कम उम्र में गिरफ्तारी, लंबी कानूनी लड़ाई

साल 1991 में राजीव गांधी की हत्या के मामले में पेरारीवलन को गिरफ्तार किया गया था। उस समय उनकी उम्र महज 19-20 साल थी। इस मामले में उन्हें पहले मौत की सजा सुनाई गई, जिसे बाद में उम्रकैद में बदल दिया गया। यह मामला वर्षों तक अदालतों में चलता रहा और देशभर में चर्चा का विषय बना रहा।

सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत

लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मई 2022 में अपने विशेष अधिकार (अनुच्छेद 142) का इस्तेमाल करते हुए पेरारीवलन को रिहा कर दिया। यह फैसला उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ और उन्होंने नई दिशा में आगे बढ़ने का निर्णय लिया।

जेल से कानून तक का सफर

रिहाई के बाद पेरारीवलन ने कानून की पढ़ाई शुरू की। उन्होंने डॉ. बी.आर. अंबेडकर लॉ कॉलेज में दाखिला लिया। साल 2025 में उन्होंने अपनी डिग्री पूरी की और उसी वर्ष ऑल इंडिया बार एग्जाम भी पास कर लिया। अब वह आधिकारिक रूप से वकालत करने के लिए योग्य हो चुके हैं।

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‘गरीब कैदियों की आवाज बनना चाहता हूं’

काला कोट पहनकर कोर्ट पहुंचे पेरारीवलन ने कहा कि जेल में बिताए वर्षों ने उन्हें कानून की अहमियत समझाई। उन्होंने कहा, “मेरा सपना बड़ा क्रिमिनल वकील बनना नहीं है, बल्कि उन कैदियों की आवाज बनना है जिन्हें कानूनी मदद नहीं मिल पाती।” उन्होंने खासकर उन गरीब उम्रकैद कैदियों की मदद करने की बात कही, जो फीस न दे पाने के कारण वर्षों से रिहाई का इंतजार कर रहे हैं।

न्याय व्यवस्था में सुधार की बात

पेरारीवलन ने कहा कि भारत में ऐसी न्याय व्यवस्था होनी चाहिए, जहां निर्दोष साबित होने पर राहत के स्पष्ट प्रावधान हों। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका जैसे देशों की न्याय प्रणाली का उदाहरण देते हुए सुधार की जरूरत बताई।

मां की लड़ाई और परिवार का साथ

पेरारीवलन की मां अरपूथम अम्मल ने वर्षों तक उनके लिए न्याय की लड़ाई लड़ी। परिवार का दावा था कि उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया था। उनकी रिहाई में परिवार और सामाजिक कार्यकर्ताओं की बड़ी भूमिका रही।

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चर्चाओं में उनकी नई पहचान

1991 में श्रीपेरंबुदूर में हुए आत्मघाती बम धमाके में राजीव गांधी की हत्या हुई थी। इस मामले में पेरारीवलन समेत सात लोगों को दोषी ठहराया गया था। अब काला कोट पहनकर अदालत में उनकी मौजूदगी एक नई चर्चा का विषय बन गई है।

Location :  New Delhi

Published :  28 April 2026, 3:03 PM IST

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