पीएम मोदी ने नेहरू का कितनी बार जिक्र किया? कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने संसद में खोला रिकॉर्ड

संसद में वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर पीएम मोदी का भाषण चर्चा का केंद्र बना। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने दावा किया कि भाषण में वंदे मातरम को राजनीतिक रंग दिया गया और नेहरू का 14 बार जिक्र हुआ।

Updated : 8 December 2025, 2:13 PM IST
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New Delhi: संसद के शीतकालीन सत्र का आठवां दिन आज यादगार रहा, जब वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने के अवसर पर लोकसभा और राज्यसभा में विशेष चर्चा हुई। इस अवसर पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में राष्ट्रगीत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर अपना वक्तव्य रखा। वहीं, राज्यसभा में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा इस विषय पर चर्चा शुरू की गई। आज की कार्यवाही में सदन ने पूर्व राज्यपाल स्वराज कौशल को भी श्रद्धांजलि दी।

पीएम मोदी के भाषण में नेहरू का जिक्र

लोकसभा में प्रश्नकाल के बाद जब प्रधानमंत्री मोदी ने वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर अपने विचार साझा किए, तो उनके संबोधन ने विपक्ष के ध्यान को भी आकर्षित किया। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने प्रधानमंत्री के भाषण और सत्ताधारी दल के दृष्टिकोण पर सवाल उठाते हुए चर्चा की शुरुआत की। गोगोई ने कहा कि वंदे मातरम आज सिर्फ राष्ट्रीय गीत नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक नारे की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में ग्रामोफोन का जिक्र किया, जबकि स्वतंत्रता से पहले वंदे मातरम के प्रसार के लिए पंपलेट और मुद्रित दस्तावेजों का सहारा लिया गया था।

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सांसद गोगोई ने अपने वक्तव्य में पीएम मोदी के भाषणों के रिकॉर्ड का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री ने हाल ही में एक घंटे के अपने भाषण में वंदे मातरम को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान संसद में भाषण देते हुए पीएम मोदी ने 14 बार पंडित नेहरू का नाम लिया था। गोगोई ने यह आंकड़ा संसद के रिकॉर्ड के हवाले से पेश किया और बताया कि प्रधानमंत्री कितनी बार देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित नेहरू और कांग्रेस पार्टी का जिक्र कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह एक पैटर्न की तरह नजर आता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

गौरव गोगोई ने वंदे मातरम की ऐतिहासिक यात्रा पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह गीत भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और देशभक्ति की भावना का प्रतीक रहा है। लेकिन आज इसे सिर्फ राजनीतिक टूल के रूप में इस्तेमाल करना, गीत के मूल उद्देश्य और भावनाओं के विपरीत है। उन्होंने सांसदों से अपील की कि इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय गीत को सही संदर्भ और इतिहास के साथ ही याद किया जाए।

लोकसभा में प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में वंदे मातरम के महत्व, इसके ऐतिहासिक प्रसार और सांस्कृतिक योगदान पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि यह गीत केवल स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक नहीं, बल्कि भारतीय जनता की एकता, संकल्प और देशभक्ति की भावना को जीवित रखता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम हर भारतीय के लिए सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि एक संकल्प है।

पीएम मोदी का भाषण बना चर्चा का केंद्र (फोटो सोर्स- संसद टीवी)

संसद में गरमाई बहस

वहीं, कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने इस भाषण के बाद यह भी संकेत दिया कि प्रधानमंत्री के शब्दों में राजनीतिक संदर्भ अधिक दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने का अवसर सिर्फ एक राष्ट्रीय गौरव का क्षण होना चाहिए, न कि इसे किसी राजनीतिक एजेंडा के लिए प्रयोग किया जाए। उन्होंने सांसदों से आग्रह किया कि इस राष्ट्रीय गीत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को हमेशा प्राथमिकता दी जाए।

गोगोई ने यह भी उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषणों में नेहरू और कांग्रेस पार्टी का उल्लेख कई बार किया है। उनका कहना था कि यह आंकड़ा दर्शाता है कि भाषणों में राजनीतिक संदर्भ को प्राथमिकता दी जा रही है। गोगोई ने इसे न केवल विपक्ष की नजर में देखा, बल्कि उन्होंने इसे संसद में एक गंभीर विषय के रूप में उठाया।

आज की चर्चा में यह भी सामने आया कि वंदे मातरम की ऐतिहासिक यात्रा को समझना जरूरी है। यह गीत सिर्फ स्वतंत्रता संग्राम तक सीमित नहीं, बल्कि आज भी भारतीय जनता के लिए प्रेरणा का स्रोत है। सांसदों ने इस अवसर पर यह सुनिश्चित किया कि इतिहास और सांस्कृतिक महत्व को सही तरीके से साझा किया जाए।

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कुल मिलाकर, वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने के अवसर पर संसद में हुई चर्चा ने इस राष्ट्रीय गीत के महत्व को फिर से रेखांकित किया। प्रधानमंत्री के भाषण और विपक्ष के सवालों ने इसे ऐतिहासिक और राजनीतिक दोनों दृष्टिकोण से एक व्यापक बहस का रूप दे दिया।

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 8 December 2025, 2:13 PM IST

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