हिंदी
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला (Img: Pinterest)
New Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने PCPNDT एक्ट के बारे में एक अहम फैसला सुनाया है। इस फैसले में कोर्ट ने जन्म से पहले लिंग का पता लगाने और लिंग चुनने पर रोक लगाया है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस इस एक्ट के तहत अपराधों की जांच नहीं कर सकती; इसके बजाय ऐसे मामलों में कार्रवाई करने की जिम्मेदारी कानून के तहत खास तौर पर नियुक्त अधिकारियों की होती है।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा कि PCPNDT एक्ट से जुड़े मामले आम आपराधिक मामलों से अलग होते हैं। इन मामलों में मेडिकल जानकारी और कानून की खास समझ की जरूरत होती है। इसलिए, पुलिस को इस एक्ट के तहत जांच करने का अधिकार नहीं दिया गया है।
ये भी पढ़ें - वफादार हैं तो टेस्ट से डर कैसा? जानिए क्या कहता है पैटरनिटी टेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट का नया कानूनी फरमान
कोर्ट ने साफ किया कि PCPNDT मामलों में पुलिस जांच अधिकारी के तौर पर काम नहीं करती है। हालांकि, जरूरत पड़ने पर वे तय अधिकारियों की मदद कर सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि PCPNDT एक्ट के तहत पुलिस न तो खुद FIR दर्ज कर सकती है और न ही अस्पतालों या क्लीनिकों में छापेमारी कर सकती है। ये काम एक्ट के तहत खास तौर पर तय अधिकारियों को ही करने होते हैं। यह फैसला एक ऐसे मामले की सुनवाई के दौरान आया जिसमें यह सवाल उठा था कि क्या पुलिस PCPNDT एक्ट के तहत FIR दर्ज कर सकती है और मामलों की जांच कर सकती है।
कोर्ट ने यह भी साफ किया कि पुलिस की शक्तियों को पूरी तरह से कम नहीं किया गया है। अगर किसी मामले में PCPNDT एक्ट के उल्लंघन के साथ-साथ कोई आम आपराधिक अपराध भी शामिल है, तो पुलिस उस पहलू की जांच करने के लिए अधिकृत है। दूसरे शब्दों में, यह रोक सिर्फ PCPNDT एक्ट के तहत आने वाले अपराधों की जांच पर लागू होती है।
ये भी पढ़ें - स्वीट शॉप सीलिंग पर बॉम्बे हाई कोर्ट का चाबुक: महाराष्ट्र FDA पर 5 लाख का जुर्माना, तुकाराम मुंडे बोले- सुप्रीम कोर्ट जाएंगे
PCPNDT एक्ट 1994 में लागू किया गया था। इसका मुख्य मकसद जन्म से पहले लिंग का पता लगाने और लिंग चुनने पर रोक लगाना है। इस कानून का उल्लंघन करने पर पहली बार अपराध करने पर तीन साल तक की जेल और 10,000 से 50,000 तक का जुर्माना हो सकता है। दोबारा अपराध करने पर कानून में पांच साल तक की जेल और 50,000 से 1 लाख तक के जुर्माने का प्रावधान है।
Location : New Delhi
Published : 20 August 2026, 5:27 PM IST
Topics : Legal News New Delhi PCPNDT Act Supreme Court