Sex Determination: सुप्रीम कोर्ट ने गर्भ में लिंग जांच के मामलों पर सुनाया बड़ा फैसला, पुलिस के अधिकारों पर खींची लक्ष्मण रेखा

सुप्रीम कोर्ट ने PCPNDT एक्ट को लेकर बड़ा फैसला सुनाते हुए साफ किया है कि पुलिस इस कानून के तहत न तो सीधे FIR दर्ज कर सकती है और न ही क्लीनिकों पर छापेमारी कर सकती है।

Post Published By: Priyam Kashyap
Updated : 20 August 2026, 5:27 PM IST
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New Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने PCPNDT एक्ट के बारे में एक अहम फैसला सुनाया है। इस फैसले में कोर्ट ने जन्म से पहले लिंग का पता लगाने और लिंग चुनने पर रोक लगाया है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस इस एक्ट के तहत अपराधों की जांच नहीं कर सकती; इसके बजाय ऐसे मामलों में कार्रवाई करने की जिम्मेदारी कानून के तहत खास तौर पर नियुक्त अधिकारियों की होती है।

पुलिस सीधे FIR दर्ज नहीं कर सकती

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा कि PCPNDT एक्ट से जुड़े मामले आम आपराधिक मामलों से अलग होते हैं। इन मामलों में मेडिकल जानकारी और कानून की खास समझ की जरूरत होती है। इसलिए, पुलिस को इस एक्ट के तहत जांच करने का अधिकार नहीं दिया गया है।

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कोर्ट ने साफ किया कि PCPNDT मामलों में पुलिस जांच अधिकारी के तौर पर काम नहीं करती है। हालांकि, जरूरत पड़ने पर वे तय अधिकारियों की मदद कर सकते हैं।

अस्पतालों में छापेमारी करने का अधिकार नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि PCPNDT एक्ट के तहत पुलिस न तो खुद FIR दर्ज कर सकती है और न ही अस्पतालों या क्लीनिकों में छापेमारी कर सकती है। ये काम एक्ट के तहत खास तौर पर तय अधिकारियों को ही करने होते हैं। यह फैसला एक ऐसे मामले की सुनवाई के दौरान आया जिसमें यह सवाल उठा था कि क्या पुलिस PCPNDT एक्ट के तहत FIR दर्ज कर सकती है और मामलों की जांच कर सकती है।

पुलिस दूसरे अपराधों में कर सकती है कार्रवाई

कोर्ट ने यह भी साफ किया कि पुलिस की शक्तियों को पूरी तरह से कम नहीं किया गया है। अगर किसी मामले में PCPNDT एक्ट के उल्लंघन के साथ-साथ कोई आम आपराधिक अपराध भी शामिल है, तो पुलिस उस पहलू की जांच करने के लिए अधिकृत है। दूसरे शब्दों में, यह रोक सिर्फ PCPNDT एक्ट के तहत आने वाले अपराधों की जांच पर लागू होती है।

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PCPNDT एक्ट क्या है?

PCPNDT एक्ट 1994 में लागू किया गया था। इसका मुख्य मकसद जन्म से पहले लिंग का पता लगाने और लिंग चुनने पर रोक लगाना है। इस कानून का उल्लंघन करने पर पहली बार अपराध करने पर तीन साल तक की जेल और 10,000 से 50,000 तक का जुर्माना हो सकता है। दोबारा अपराध करने पर कानून में पांच साल तक की जेल और 50,000 से 1 लाख तक के जुर्माने का प्रावधान है।

Location :  New Delhi

Published :  20 August 2026, 5:27 PM IST

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