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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय(जेएनयू) ने सोमवार को छात्र संघ के चारों पदाधिकारियों सहित पूर्व अध्यक्ष को निष्कासित कर दिया है। इसके साथ ही सभी को तत्काल हॉस्टल खाली करने और कैंपस से बाहर रहने का निर्देश भी दिया गया है। इस कार्रवाई से कालेज की छात्र राजनीति में उबाल आ गया है।
जेएनयू छात्र संघ के सभी पदाधिकारी निष्कासित
New Delhi: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) ने सोमवार को अनुशासनहीनता के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए पांच पीएचडी छात्रों को 2 सेमेस्टर के लिए निष्कासित कर दिया है। जिनमें जेएनयू छात्र संघ (जेएनयूएसयू) के चार पदाधिकारी शामिल हैं। इन विद्यार्थियों को 21 नवंबर, 2025 को डॉ. बी. आर. आंबेडकर केंद्रीय पुस्तकालय में प्रवेश द्वार पर लगे 'चेहरे की पहचान प्रौद्योगिकी' (एफआरटी) उपकरण में तोड़फोड़ करने का दोषी पाया गया था।
इस संबंध में जेएनयू के चीफ प्रॉक्टर ने आदेश भी जारी किया है जिसमें छात्रों के ऊपर तोड़फोड़ करने सहित कई दूसरे आरोप है। इस तोड़फोड़ के चलते जेएनयू प्रशासन को अनुमानित करीब 20 लाख रुपये का नुकसान हुआ था। तोड़फोड़ में जेएनयू अध्यक्ष अदिति मिश्रा, उपाध्यक्ष के. गोपिका बाबू, महासचिव सुनील यादव और संयुक्त सचिव दानिश अली भी शामिल रही थी। जेएनयू प्रशासन ने पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष नीतीश कुमार पर भी कार्रवाई की है।
जानकारी के अनुसार इनको तत्काल प्रभाव से पूरे परिसर में 'प्रतिबंधित' कर दिया गया है और उन पर 20,000-20000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। संपर्क करने पर जेएनयू प्रशासन ने इन विद्यार्थियों को निलंबन पत्र जारी किये जाने की पुष्टि की। लेकिन इस पत्र पर उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार किया।
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बता दें कि जेएनयू लाइब्रेरी में हुई तोड़फोड़ मामले में कार्यवाहक लाइब्रेरियन और मुख्य सुरक्षा अधिकारी से प्रशासन को रिपोर्ट मिली थी। जिसके बाद इस पूरे मामले की जांच के लिए प्रॉक्टोरियल जांच समिति गठित की गई। जांच में छात्रों को अपना पक्ष रखने का भी मौका दिया गया। तोड़फोड़ मामले में संतुष्टि भरा जवाब न मिलने पर चारों पदाधिकारियों को निष्कासित करने के आदेश जारी किए।
छात्र नेताओं ने इस फैसले को छात्र-विरोधी बताते हुए कहा कि चुने हुए प्रतिनिधियों को बाहर कर कैंपस की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। JNUSU ने छात्र समुदाय से अपील की है कि वे एकजुट होकर इस कार्रवाई का विरोध
छात्र संघ पदाधिकारियों ने इस आदेश को अलोकतांत्रिक बताया है। छात्र संघ ने बयान जारी कर कहा है कि जेएनयू प्रशासन केंद्र सरकार की कठपुतली बन गया है। ठीक उसी समय जब छात्र संघ यूजीसी प्रमोशन ऑफ इक्विटी रेगुलेशन 2026 को रोकने के लिए एक बड़ा आंदोलन तैयार कर रहा था जिसमें मंगलवार को मशाल जुलूस और 7 फरवरी को स्टूडेंट पार्लियामेंट होनी थी यह कार्रवाई की। इस कदम को छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश के तौर पर देखा जाना चाहिए।
इन छात्रों को विश्वविद्यालय के नियमों के तहत हिंसा, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पढ़ाई में बाधा डालने का दोषी पाया गया है। नोटिस में चेतावनी दी गई है कि जो भी हॉस्टल में इन निष्कासित छात्रों को पनाह देगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पत्र के अनुसार, यह निष्कासन 2026 के विंटर और मॉनसून सेमेस्टर तक लागू रहेगा। छात्रों को दस दिनों के भीतर जुर्माना भरकर उसकी रसीद चीफ प्रॉक्टर के ऑफिस में जमा करने का आदेश दिया गया है।
इस कार्रवाई के बाद JNU कैंपस में माहौल तनावपूर्ण हो गया है और आने वाले दिनों में बड़े आंदोलन की संभावना जताई जा रही है।