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मुजफ्फरनगर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। जिस कैफे को एक दिन पहले तक पुलिस पूरी तरह “सब साफ” बताते हुए क्लीन चिट दे रही थी, उसी कैफे को अब संदिग्ध गतिविधियों के आरोप में सील कर दिया गया है। पुलिस के इस बदले हुए बयान ने पूरे प्रकरण को और अधिक संदेहास्पद बना दिया है।
मुजफ्फरनगर में आपत्तिजनक गतिविधियों में कैफ़े सील
Muzaffarnagar: नई मंडी क्षेत्र के गौशाला रोड स्थित गुप्ता कैफे को लेकर मुजफ्फरनगर पुलिस के लगातार बदलते रुख ने शहर में नई बहस और सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस कैफे को एक दिन पहले तक पुलिस पूरी तरह “सब साफ” बताते हुए क्लीन चिट दे रही थी, उसी कैफे को अब अनैतिक गतिविधियों के आरोप में सील कर दिया गया है। पुलिस की इस पलटी ने उसकी कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
जानकारी के अनुसार दो दिन पहले भारतीय जनता पार्टी के नेता संजय कुमार मिश्रा और अचिंत मित्तल आदि ने कुछ अन्य लोगों के साथ नई मंडी में गौशाला रोड पर स्थित गुप्ता कैफे पर धावा बोला था। संजय मिश्रा का आरोप था कि कैफे में लंबे समय से संदिग्ध और अश्लील गतिविधियां संचालित हो रही हैं।
Muzaffarnagar: जिस गुप्ता कैफ़े को दी क्लीन चिट, उसी को किया सील, पुलिस की भूमिका पर सवाल #Muzaffarnagar #GuptaCafesealed #police #cleanchit pic.twitter.com/Ch6xLoBciV
— डाइनामाइट न्यूज़ हिंदी (@DNHindi) February 2, 2026
उनका कहना था कि युवक-युवतियां घंटों के हिसाब से केबिन किराए पर लेकर आपत्तिजनक हरकतें करते हैं और मौके पर इसके सबूत भी मिले हैं। इस दौरान भीड़ ने एक युवक को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया था, जबकि एक युवती भीड़ का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गई थी। घटना के बाद मोहल्ले में भारी हंगामा भी हुआ था ।
मामले में उस वक्त नया मोड़ आया जब नई मंडी के सीओ राजकुमार साव मीडिया के सामने आए और गुप्ता कैफे को पूरी तरह क्लीन चिट दे दी। सीओ ने पूरे मामले को फर्जी करार देते हुए कहा कि जांच में कोई आपत्तिजनक गतिविधि या सामग्री नहीं मिली है और कैफे पूरी तरह साफ-सुथरा है। उन्होंने बताया था कि पुलिस ने कैफ़े और आसपास लगे सभी सीसीटीवी कैमरों को खँगाला है कहीं भी कुछ आपत्तिजनक नहीं मिला है।
पुलिस के इस बयान के बाद शहर में चर्चाएं तेज हो गईं। सोशल मीडिया पर पुलिस पर सवाल उठने लगे । यह बात सामने आने लगी कि गुप्ता कैफे का मालिक एक मंत्री का रिश्तेदार बताया जा रहा है और मंत्री के दबाव में पुलिस ने कैफे को जल्दबाजी में क्लीन चिट दे दी। इसी बीच सवाल उठने लगे कि जब मौके पर मौजूद लोगों ने आपत्तिजनक स्थिति और सामग्री देखने का दावा किया, तो पुलिस ने बिना ठोस कार्रवाई के आनन फ़ानन में ही क्लीन चिट कैसे दे दी ?
मामला मीडिया की सुर्खियों में आने और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठने के बाद एक बार फिर बड़ा मोड़ आया। पुलिस ने अपना रुख बदलते हुए गुप्ता कैफे को सील कर दिया। सिटी मजिस्ट्रेट पंकज प्रकाश राठौर स्वयं मौके पर पहुंचे और कैफे को सील करने की कार्रवाई की गई।
अब वही सीओ राजकुमार साव कह रहे हैं कि संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर गुप्ता कैफे को सील किया गया है। पुलिस के इस बदले हुए बयान ने पूरे प्रकरण को और अधिक संदेहास्पद बना दिया है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर कैफे में सब कुछ साफ था, तो उसे सील क्यों किया गया? और अगर वहां गड़बड़ी थी, तो फिर पहले क्लीन चिट किस आधार पर दी गई?
सीओ ने बताया कि गुप्ता कैफ़े के साथ ही पचेंडा रोड पर स्थित होटल रोज़ इन को भी सील कर दिया गया है । उसके दो मालिकों को भी जेल भेज दिया गया है । उन्होंने दावा किया है कि मुजफ्फरनगर में ऐसी किसी भी गतिविधि को चलने नहीं दिया जाएगा ।
बहरहाल, गुप्ता कैफे मामले में मुजफ्फरनगर पुलिस की इस पलटी ने न केवल मामले को उलझा दिया है, बल्कि पुलिस की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब शहर की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यह कार्रवाई सच की जीत साबित होती है या फिर दबाव के बाद उठाया गया कदम बनकर रह जाती है।