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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बहरीन के किंग हमद बिन ईसा अल खलीफा से फोन पर बात की। बातचीत में ऊर्जा और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों की कड़ी निंदा की गई। पीएम मोदी ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा, जहाजरानी की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय स्थिरता की जरूरत पर भी जोर दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Image Source: Google)
New Delhi: पश्चिम एशिया में लगातार बिगड़ते हालात के बीच भारत की कूटनीतिक सक्रियता एक बार फिर तेज होती दिखी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार, 20 मार्च 2026 को बहरीन के किंग हमद बिन ईसा अल खलीफा से टेलीफोन पर बात की और क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर विस्तार से चर्चा की।
इस बातचीत में दोनों नेताओं ने क्षेत्र में ऊर्जा और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों पर चिंता जताई। प्रधानमंत्री मोदी ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि ऐसे हमले सिर्फ क्षेत्रीय शांति को नहीं, बल्कि वैश्विक खाद्य, ईंधन और उर्वरक सुरक्षा को भी प्रभावित करते हैं। बातचीत के बाद पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर भी इसकी जानकारी साझा की।
प्रधानमंत्री मोदी और बहरीन के शाह के बीच हुई चर्चा का सबसे अहम पहलू ऊर्जा और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों का मुद्दा रहा। हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में ऊर्जा प्रतिष्ठानों, बंदरगाहों और अन्य अहम ढांचों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। भारत ने पहले भी इन हमलों को अस्वीकार्य और गहरी चिंता का विषय बताया था।
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विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी थी कि ऐसे हमले क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ाते हैं और पहले से दबाव झेल रही वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ डालते हैं। पीएम मोदी ने बहरीन के शाह से बातचीत में इसी चिंता को दोहराया और कहा कि इनका असर तेल-गैस से कहीं आगे बढ़कर खाद्य और उर्वरक आपूर्ति पर भी पड़ता है।
बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने जहाजरानी की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने और समुद्री मार्गों को खुला व सुरक्षित बनाए रखने के महत्व पर भी जोर दिया। यह मुद्दा इसलिए बेहद अहम है क्योंकि पश्चिम एशिया से गुजरने वाले समुद्री रास्ते वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति की रीढ़ माने जाते हैं।
हालिया तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य और खाड़ी क्षेत्र के समुद्री मार्गों को लेकर दुनिया भर में चिंता बनी हुई है। भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस क्षेत्र पर काफी हद तक निर्भर है, इन मार्गों की सुरक्षा को लेकर लगातार सक्रिय कूटनीति कर रहा है। पीएम मोदी की बहरीन के शाह से बातचीत इस व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
यह 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमलों के बाद प्रधानमंत्री मोदी और बहरीन के शाह के बीच दूसरी बातचीत थी। इससे पहले भी प्रधानमंत्री पश्चिम एशिया संकट को लेकर सऊदी अरब, जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, मलेशिया, इजरायल और ईरान समेत कई देशों के नेताओं से बात कर चुके हैं।
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जानकारी के मुताबिक, भारत का जोर लगातार तनाव कम करने, बातचीत और कूटनीति के रास्ते समाधान खोजने, और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने पर है। इस क्रम में बहरीन के साथ हुई यह बातचीत सिर्फ द्विपक्षीय संपर्क नहीं, बल्कि उस बड़े संदेश का हिस्सा है जिसमें भारत पश्चिम एशिया में शांति, सुरक्षित व्यापारिक मार्ग और वैश्विक ऊर्जा स्थिरता की वकालत कर रहा है। पीएम मोदी ने बहरीन में भारतीय समुदाय की भलाई के लिए किंग हमद के निरंतर समर्थन पर उनका आभार भी जताया।