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ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका की युद्ध ब्रीफिंग पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन मौजूदा संघर्ष में वही पुरानी वियतनाम स्क्रिप्ट दोहरा रहा है, जिसमें आधिकारिक दावे जमीन की सच्चाई से मेल नहीं खाते। इस बयान ने ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध के बीच नई राजनीतिक और कूटनीतिक बहस छेड़ दी है।
सैयद अब्बास अराघची और डोनाल्ड ट्रम्प (Image Source: Google)
New Delhi: ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध के तीसरे हफ्ते में प्रवेश करते ही बयानबाजी और तेज हो गई है। इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिकी सरकार की सैन्य ब्रीफिंग पर कड़ा हमला बोला है। अराघची ने आरोप लगाया कि वॉशिंगटन मौजूदा युद्ध को लेकर वही पुरानी वियतनाम स्क्रिप्ट दोहरा रहा है, जिसमें अधिकारियों के दावे जमीन पर मौजूद हकीकत से मेल नहीं खाते।
उनका कहना है कि अमेरिकी प्रशासन युद्ध की तस्वीर जरूरत से ज्यादा अनुकूल दिखाने की कोशिश कर रहा है, जबकि संघर्ष की वास्तविक स्थिति कहीं अधिक जटिल है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने 19 मार्च 2026 की ब्रीफिंग में कहा था कि अमेरिका के उद्देश्य नहीं बदले हैं और ईरान की मिसाइल क्षमताओं, रक्षा उद्योग और नौसेना को निशाना बनाया जा रहा है।
अराघची ने अमेरिकी बयानों की तुलना वियतनाम युद्ध के दौर की उन सैन्य प्रेस ब्रीफिंग से की, जिन्हें बाद में जमीनी हकीकत से कटा हुआ माना गया था। उनका इशारा उस तरह की आधिकारिक बयानबाजी की ओर था, जिसमें लगातार यह संदेश दिया जाता था कि सब कुछ नियंत्रण में है और युद्ध सही दिशा में बढ़ रहा है।
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ईरानी पक्ष का दावा है कि आज भी अमेरिका वैसी ही भाषा इस्तेमाल कर रहा है, यानी सैन्य सफलता का दावा ज्यादा, लेकिन जमीनी जोखिम और नुकसान पर कम बात। अराघची का यह हमला ऐसे समय आया है जब अमेरिकी प्रशासन बार-बार कह रहा है कि उसका अभियान तय योजना के मुताबिक चल रहा है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने हालिया प्रेस ब्रीफिंग में साफ कहा कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के उद्देश्य पहले दिन जैसे ही हैं। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने कहा कि अमेरिका का मकसद ईरान के मिसाइल लॉन्चरों को नष्ट करना, उसके रक्षा औद्योगिक ढांचे को कमजोर करना, उसकी नौसैनिक क्षमता को चोट पहुंचाना और उसे परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है।
उन्होंने मीडिया पर भी निशाना साधा और कहा कि यह कहना गलत है कि अमेरिका किसी अंतहीन युद्ध की तरफ बढ़ रहा है। इसी ब्रीफिंग में अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी कहा कि अमेरिकी हमले अब ईरान के भीतर और गहराई तक पहुंच रहे हैं, हालांकि साथ ही यह संकेत भी मिला कि ईरान की कुछ मिसाइल क्षमता अभी बाकी है।
अराघची के बयान ने इस युद्ध को सिर्फ सैन्य टकराव नहीं, बल्कि नैरेटिव की लड़ाई भी बना दिया है। एक तरफ अमेरिका अपने अभियानों को सफल बता रहा है, दूसरी तरफ ईरान कह रहा है कि अमेरिकी दावे अतिरंजित हैं। यही वजह है कि दोनों पक्ष अब केवल मिसाइलों और ड्रोन से नहीं, बल्कि सार्वजनिक संदेशों और मनोवैज्ञानिक दबाव के जरिए भी लड़ते दिख रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक अमेरिका ने 7,000 से अधिक लक्ष्यों पर हमला करने का दावा किया है और अतिरिक्त सैन्य विकल्पों पर भी विचार चल रहा है। इससे साफ है कि जंग फिलहाल थमती नहीं दिख रही। ऐसे में अराघची का वियतनाम स्क्रिप्ट वाला हमला सिर्फ तंज नहीं, बल्कि अमेरिका की विश्वसनीयता पर सीधा सवाल है।
कुल मिलाकर, इस बयान ने साफ कर दिया है कि जंग के तीसरे हफ्ते में सैन्य मोर्चे के साथ-साथ सूचना और प्रचार का मोर्चा भी उतना ही गर्म हो चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि जमीनी हालात किस पक्ष के दावों को ज्यादा सही साबित करते हैं।