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झारखंड विरोध प्रदर्शन (Img: IANS)
Deoghar: झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब सिर्फ छात्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सड़क से निकलकर सीधे सियासत के केंद्र में पहुंच चुका है। सोमवार को रांची में विधानसभा घेराव के दौरान छात्रों पर पुलिस के लाठीचार्ज, वाटर कैनन और आंसू गैस के इस्तेमाल के बाद पूरे राज्य का राजनीतिक माहौल गरमा गया। छात्रों का आरोप है कि भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता को लेकर लंबे समय से आवाज उठाई जा रही है, लेकिन उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
सोमवार को जब हजारों की संख्या में छात्र विधानसभा की ओर बढ़े तो पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। कई जगह बैरिकेडिंग तोड़ी गई, जिसके बाद पुलिस ने बल प्रयोग किया। यही तस्वीर मंगलवार को भाजपा के झारखंड बंद की सबसे बड़ी वजह बनी।
रांची की घटना का असर देवघर में भी दिखाई दिया। भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष सचिन रवानी, पार्टी प्रवक्ता अभय झा समेत भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता विरोध में उतरे।
पूर्व विधायक नारायण दास, विधायक रणधीर सिंह समेत पार्टी के कई नेताओं ने छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की और सरकार से छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की मांग की। भाजपा नेताओं ने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों का समाधान लाठी के जरिए नहीं, बल्कि बातचीत और पारदर्शी व्यवस्था के जरिए होना चाहिए।
हालांकि देवघर में भाजपा का विरोध जरूर देखने को मिला, लेकिन झारखंड बंद का असर यहां वैसा नहीं रहा जैसा सामान्य परिस्थितियों में देखने को मिल सकता था। इसकी सबसे बड़ी वजह इस समय चल रहा राजकीय श्रावणी मेला है। बाबा बैद्यनाथ की नगरी में देश के अलग-अलग हिस्सों से लाखों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। कांवरियों की लगातार आवाजाही, मंदिर क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को देखते हुए शहर को पूरी तरह बंद कराना व्यावहारिक रूप से भी मुश्किल था। यही वजह रही कि देवघर में बंद की बजाय राजनीतिक विरोध ज्यादा दिखाई दिया और सामान्य जनजीवन पूरी तरह ठप नहीं हुआ।
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देवघर में भाजपा ने सरकार के खिलाफ अपने विरोध को अलग अंदाज में सामने रखा। हेमंत सोरेन को लेकर भाजपा नेताओं ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्य सरकार पर तीखा राजनीतिक कटाक्ष किया। नेताओं का कहना था कि एक तरफ राज्य का युवा नौकरी और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया की मांग को लेकर सड़क पर संघर्ष कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ सरकार की प्राथमिकताओं को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। हेमंत तोरण को भाजपा नेताओं ने सरकार की कार्यशैली पर निशाना साधने का राजनीतिक प्रतीक बनाया और छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर सरकार को घेरा।
इस पूरे घटनाक्रम को अगर राजनीतिक नजरिए से देखें तो झारखंड में छात्र आंदोलन अब विपक्ष के लिए सरकार को घेरने का बड़ा मुद्दा बन चुका है। भाजपा को जहां सरकार पर हमला करने का मौका मिला है, वहीं छात्रों का आंदोलन सरकार के सामने एक गंभीर चुनौती बनकर खड़ा है। क्योंकि सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाला युवा सिर्फ परीक्षा नहीं देता, वह कई वर्षों का समय, पैसा और अपने परिवार की उम्मीदें उस परीक्षा से जोड़ता है।
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रांची में छात्रों पर चली लाठियों के बाद भाजपा सड़क पर है, छात्र आंदोलन के रास्ते पर हैं और सरकार के सामने सफाई तथा समाधान दोनों की चुनौती है। देवघर में श्रावणी मेले ने बंद की रफ्तार जरूर रोक दी, लेकिन राजनीतिक विरोध को नहीं रोक पाया। अब आने वाले दिन तय करेंगे कि यह आंदोलन सिर्फ एक दिन के बंद और प्रदर्शन तक सीमित रहता है या फिर झारखंड की राजनीति में एक बड़ा छात्र आंदोलन बनकर उभरता है।
क्योंकि सवाल सिर्फ एक परीक्षा का नहीं है... सवाल झारखंड के लाखों युवाओं के भविष्य का है। और जब युवा अपने भविष्य के लिए सड़क पर उतरता है, तो उसकी आवाज को सिर्फ लाठी से नहीं, जवाब और समाधान से शांत किया जा सकता है।
Location : Deoghar
Published : 11 August 2026, 5:08 PM IST