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देवघर में साइबर ठगी का पर्दाफाश (Img: Dynamite News)
Deoghar: साइबर ठगी अब सिर्फ किसी लिंक पर क्लिक कराने या ओटीपी पूछने तक सीमित नहीं रह गई है। ठग बाकायदा कंपनी के कस्टमर केयर कर्मचारी बनकर लोगों का भरोसा जीत रहे हैं और फिर मोबाइल में ऐसा एक्सेस लेने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे बैंक खाते और डिजिटल वॉलेट तक पहुंच बनाई जा सके।
देवघर पुलिस ने ऐसे ही एक साइबर गिरोह के खिलाफ कार्रवाई करते हुए चार संदिग्ध साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, इनके पास से 9 मोबाइल फोन और 10 सिम कार्ड बरामद किए गए हैं। कार्रवाई 12 सितंबर 2026 को साइबर थाना पुलिस ने की। पुलिस को सूचना मिली थी कि देवघर जिले के करौं थाना क्षेत्र के अंधा-टोला जंगल में कुछ युवक कथित तौर पर साइबर ठगी के लिए लोगों को फोन कर रहे हैं। सूचना को गंभीरता से लेते हुए साइबर थाना की टीम ने इलाके में छापेमारी की और चार लोगों को पकड़ा।
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी अलग-अलग कंपनियों के कस्टमर केयर प्रतिनिधि बनकर लोगों से संपर्क करते थे। कभी Flipkart और Amazon, तो कभी Airtel Payment Bank या Google Pay-PhonePe Customer Care का नाम लेकर बातचीत शुरू की जाती थी।
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ठगी का तरीका भी बेहद चालाक बताया जा रहा है। आरोपी ग्राहक को यह भरोसा दिलाते थे कि उसके खाते, पेमेंट या सर्विस से जुड़ी कोई समस्या है और उसे ठीक करने के लिए कुछ प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके बाद मोबाइल का एक्सेस लेने या किसी ऐप के जरिए नियंत्रण हासिल करने की कोशिश की जाती थी। यानी ग्राहक को लगता था कि वह कंपनी के कस्टमर केयर से बात कर रहा है, जबकि दूसरी तरफ बैठा व्यक्ति कथित तौर पर उसके डिजिटल लेन-देन तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहा था।
जांच में साइबर ठगी का एक और तरीका सामने आया है। पुलिस के अनुसार आरोपी APK फाइल भेजकर मोबाइल का एक्सेस लेने की कोशिश करते थे। इसके लिए PM Kisan Yojana, बिजली बिल और RTO Challan जैसे आम लोगों से जुड़े मुद्दों का सहारा लिया जाता था। किसी व्यक्ति को बताया जाता था कि योजना का लाभ लेने, बिजली बिल जमा करने या चालान की जानकारी के लिए एक एप डाउनलोड करना होगा। इसी बहाने APK फाइल भेजकर मोबाइल में सेंध लगाने की कोशिश की जाती थी।
आरोपियों पर यह भी आरोप है कि वे Airtel Payment Bank पदाधिकारी बनकर लोगों को झांसे में लेते थे। इसके लिए Airtel Thanks App का हवाला दिया जाता था। पुलिस के मुताबिक, उपभोक्ताओं को यह कहकर भ्रमित किया जाता था कि उनका Airtel Payment Bank कार्ड बंद हो गया है या किसी कारण से निष्क्रिय है। इसके बाद कार्ड दोबारा चालू कराने के नाम पर उनसे जानकारी लेकर ठगी की कोशिश की जाती थी।
पुलिस ने जिन चार लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें कन्हैया कुमार दास, उम्र करीब 18 वर्ष, निवासी केन्दुआटांड़, थाना मारगोमुंडा; रूपलाल कुमार पाददार, उम्र करीब 29 वर्ष, निवासी जगाडीह, थाना करौं; मो. सलीम अंसारी, उम्र करीब 26 वर्ष, निवासी रतनपुर, थाना मधुपुर; और समीर कुमार दास, उम्र करीब 19 वर्ष, निवासी केन्दुआटांड़, थाना मारगोमुंडा शामिल हैं। इनमें रूपलाल कुमार पाददार के संबंध में पुलिस रिकॉर्ड में पूर्व में साइबर थाना देवघर का मामला दर्ज होने की बात भी सामने आई है।
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छापेमारी के दौरान पुलिस ने 9 मोबाइल फोन और 10 सिम कार्ड बरामद किए हैं। साइबर अपराध के मामलों में मोबाइल और सिम सबसे महत्वपूर्ण डिजिटल सुराग माने जाते हैं। ऐसे में अब पुलिस इन उपकरणों की जांच कर यह पता लगाने में जुट सकती है कि आरोपियों ने किन-किन नंबरों पर फोन किया, किन लोगों से संपर्क किया और उनके डिजिटल नेटवर्क में और कौन-कौन लोग जुड़े हैं।
देवघर के पुलिस अधीक्षक प्रवीण पुष्कर के निर्देश पर साइबर अपराधियों के खिलाफ यह कार्रवाई की गई है। एसपी प्रवीण पुष्कर का कहना है कि साइबर अपराध के जरिए लोगों को ठगी का शिकार बनाने वालों के खिलाफ पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। उनका जोर इस बात पर है कि ऐसे मामलों में सिर्फ गिरफ्तारी तक कार्रवाई सीमित न रहे, बल्कि अपराध के तरीके और उससे जुड़े नेटवर्क की भी पड़ताल की जाए।
इस पूरी कार्रवाई में पुलिस उपाधीक्षक सह साइबर थाना प्रभारी कैलाश प्रसाद महतो के नेतृत्व में टीम ने कार्रवाई की। SDPO कैलाश प्रसाद महतो का कहना है कि साइबर ठगी में इस्तेमाल किए जा रहे तरीकों की जानकारी जुटाकर पुलिस आरोपियों तक पहुंच रही है और बरामद मोबाइल-सिम की जांच से नेटवर्क के बारे में और जानकारी मिलने की उम्मीद है।
चार लोगों की गिरफ्तारी और 9 मोबाइल-10 सिम की बरामदगी के बाद अब असली सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक छोटा स्थानीय ग्रुप है या इसके पीछे बड़ा साइबर नेटवर्क काम कर रहा है? आरोपियों के मोबाइल से कितने लोगों से संपर्क हुआ, कितने बैंक खातों या डिजिटल वॉलेट की जानकारी जुटाई गई और कितने लोगों को ठगी के लिए निशाना बनाया गया इन सवालों के जवाब आगे की तकनीकी जांच से सामने आ सकते हैं।
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साइबर ठगी के मामलों में सबसे बड़ी चुनौती यही है कि अपराधी सामने बैठे व्यक्ति की पहचान छिपाकर दूसरे शहर या राज्य के लोगों को निशाना बनाते हैं। ऐसे में मोबाइल, सिम, कॉल डिटेल और डिजिटल ट्रांजैक्शन की जांच इस पूरे नेटवर्क की अगली कड़ी खोल सकती है। फिलहाल देवघर पुलिस की कार्रवाई ने चार संदिग्धों को सलाखों तक पहुंचाया है, लेकिन बरामद 9 मोबाइल और 10 सिम कार्ड अब इस कहानी की अगली परत खोलने वाले अहम सुराग साबित हो सकते हैं।
Location : Deoghar
Published : 13 September 2026, 1:45 PM IST