शिक्षा सुधार, NEET-UG परीक्षा, Government Approach और पीएम मोदी…अपने इस्तीफे में क्या-क्या बोले धर्मेंद्र प्रधान…?

NEET-UG परीक्षा में अनियमितता और जंतर-मंतर के हालातों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा भेज दिया है। उन्होंने कहा कि उनका यह कदम देश की युवाशक्ति और छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।

Updated : 25 July 2026, 2:57 PM IST
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New Delhi: देश के राजनीतिक हलकों में सनसनी फैल गई है, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। पिछले चार दशकों से अधिक समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधारों के लिए समर्पित रहे प्रधान ने अपने त्यागपत्र में साफ किया कि उनका यह कदम व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है, बल्कि देश की युवाशक्ति और छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। उन्होंने अपने इस्तीफे में NEET-UG परीक्षा की पूरी पृष्ठभूमि, सरकार के रुख और देश की मौजूदा स्थिति का खुलकर जिक्र किया है।

NEET-UG परीक्षा में अनियमितता और सीबीआई जांच

अपने त्यागपत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने स्वीकार किया कि 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में अनियमितताएं सामने आई थीं। सरकार ने इस मामले को तुरंत संज्ञान में लेते हुए जांच सीबीआई को सौंपी और परीक्षा को रद्द कर दिया। इसके साथ ही, पुनः परीक्षा की तिथि घोषित की गई और यह निर्णय लिया गया कि अगले वर्ष से इस परीक्षा को कंप्यूटर-आधारित टेस्ट (सीबीटी) मोड में आयोजित किया जाएगा।

प्रधान ने बताया कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उनकी प्रमुख प्राथमिकता 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा का सुचारू संचालन सुनिश्चित करना थी। इसके लिए सरकार ने 'होल ऑफ गवर्नमेंट अप्रोच' के तहत काम किया, जिसमें केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और विशेषकर जिला प्रशासन ने अहम भूमिका निभाई। छात्रों और अभिभावकों के सहयोग से अंततः 21 जून 2026 को यह परीक्षा सफलतापूर्वक संपन्न हुई।

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परीक्षा माफिया के खिलाफ कड़ा रुख और शानदार परिणाम

पूर्व शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि उन्होंने पहले ही दिन से इस पूरी परिस्थिति की जिम्मेदारी ली और कभी भी इससे मुंह नहीं मोड़ा। उनका संकल्प था कि परीक्षा माफिया के कारण किसी भी मेधावी छात्र की संभावनाओं और सपनों पर आंच नहीं आने दी जाएगी।

कड़ी मेहनत और सुरक्षा के बीच 16 जुलाई को NEET-UG के परिणाम घोषित किए गए, जो संतोषजनक रहे। इन परिणामों में गरीब पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाले कई मेधावी छात्रों ने भी सफलता हासिल की। हालांकि, प्रधान ने इस बात पर दुख जताया कि इस दौरान भी कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को गुमराह करने और बाधाएं पैदा करने की कोशिश की, जिससे उनका मन अत्यंत व्यथित हुआ।

जंतर-मंतर के हालात और त्यागपत्र की असली वजह

देश के लोकतंत्र और युवाओं की ताकत में अटूट विश्वास जताते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि युवा केवल भारत का भविष्य नहीं, बल्कि विकसित भारत के निर्माता और शिल्पकार हैं। पिछले 10 दिनों के घटनाक्रम से उनका मन दुखी था।

उन्होंने जोर देकर कहा कि यह मामला उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का बिल्कुल नहीं है। जंतर-मंतर और देश भर में जो स्थितियां बन रही हैं, राष्ट्र विरोधी ताकतें उनका लाभ न उठाएं, देश की एकता अक्षुण्ण रहे और भारत के किसी भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में न उलझे- इन सभी बातों पर विचार करते हुए उन्होंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया। उनका मुख्य उद्देश्य यही है कि देश के बच्चे बिना भटके अपना पूरा समय पढ़ाई और करियर बनाने पर फोकस करें।

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प्रधानमंत्री का आभार और भविष्य का संकल्प

अपने इस्तीफे के अंत में धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व, मार्गदर्शन, विश्वास और निरंतर सहयोग के लिए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने मंत्रिपरिषद के अपने सभी सहयोगियों, मंत्रालय के अधिकारियों, कर्मचारियों और साथ काम करने वाले हर व्यक्ति का आभार जताया।

राष्ट्रसेवा को अपने जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए उन्होंने कहा कि वे इसके लिए सदैव समर्पित रहेंगे। अंत में, प्रभु श्रीजगन्नाथ जी के आशीर्वाद का स्मरण करते हुए उन्होंने विश्वास दिलाया कि वे भविष्य में भी भारत माता, ओडिशा की जनता और देश के युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए खुद को पूरी तरह समर्पित रखेंगे।

Location :  New Delhi

Published :  25 July 2026, 2:54 PM IST

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