CAQM का बड़ा फैसला… अब बिना Pollution Certificate नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल

दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण पर सख्ती शुरू हो गई है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने बड़ा फैसला लेते हुए ऐलान किया है कि 1 अक्टूबर 2026 से बिना वैध PUC सर्टिफिकेट वाले वाहनों को पेट्रोल, डीजल और CNG नहीं मिलेगी। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों और पराली नियंत्रण को लेकर भी बड़े कदम उठाए गए हैं।

Post Published By: Bobby Raj
Updated : 15 May 2026, 10:47 PM IST
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New Delhi: दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण को लेकर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने सख्त आदेश जारी किए हैं। आयोग के अनुसार 1 अक्टूबर 2026 से ऐसे किसी भी वाहन को पेट्रोल, डीजल या CNG नहीं दी जाएगी, जिसके पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र यानी PUC नहीं होगा।

सीएक्यूएम के सदस्य सचिव तरुण कुमार पिथौड़े द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि यह नियम पूरे एनसीआर क्षेत्र में लागू होगा। इसकी निगरानी के लिए ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरा सिस्टम और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। फ्यूल स्टेशनों पर लगे कैमरे वाहन नंबर स्कैन कर यह जांच करेंगे कि वाहन का PUC वैध है या नहीं।

हालांकि मेडिकल इमरजेंसी, कानून-व्यवस्था और आपदा प्रबंधन से जुड़े वाहनों को इस नियम से छूट दी जाएगी। आयोग का मानना है कि इस कदम से सड़कों पर प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की संख्या में भारी कमी आएगी।

तिपहिया वाहनों का होगा पूरा इलेक्ट्रिफिकेशन

सीएक्यूएम ने प्रदूषण कम करने के लिए पेट्रोल और डीजल से चलने वाले तिपहिया वाहनों को चरणबद्ध तरीके से बंद करने का भी फैसला लिया है। अब केवल इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों (L5 श्रेणी) का ही नया पंजीकरण किया जाएगा।

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दिल्ली में यह नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होगा। वहीं गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर में इसे 1 जनवरी 2028 से लागू किया जाएगा। एनसीआर के बाकी जिलों में यह व्यवस्था 1 जनवरी 2029 से प्रभावी होगी। आयोग का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देकर प्रदूषण के स्तर को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके लिए सरकार चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और नई नीतियों पर भी तेजी से काम करेगी।

पराली जलाने पर रोक के लिए बनेगी 'पराली प्रोटेक्शन फोर्स'

सीएक्यूएम ने पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकारों को पराली जलाने की घटनाएं पूरी तरह खत्म करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर ‘पराली प्रोटेक्शन फोर्स’ बनाई जाएगी, जिसमें पुलिस और कृषि विभाग के अधिकारी शामिल होंगे।

शाम के समय विशेष गश्त बढ़ाई जाएगी, क्योंकि कई किसान सैटेलाइट निगरानी से बचने के लिए देर शाम पराली जलाते हैं। हर 100 किसानों पर एक नोडल अधिकारी तैनात किया जाएगा, जबकि हॉटस्पॉट गांवों में यह संख्या 50 किसानों पर एक अधिकारी की होगी।

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सरकार छोटे और सीमांत किसानों को मुफ्त मशीनें उपलब्ध कराएगी। साथ ही पराली प्रबंधन के लिए मोबाइल ऐप और वेब डैशबोर्ड भी तैयार किया जाएगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि पराली जलाने वालों से पर्यावरण मुआवजा सख्ती से वसूला जाएगा। इन बड़े फैसलों के जरिए दिल्ली-एनसीआर में 2026-27 तक जीरो टॉलरेंस प्रदूषण नीति लागू करने की तैयारी की जा रही है।

Location :  New Delhi

Published :  15 May 2026, 10:47 PM IST

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