दिल्ली-NCR में तीन दिन ट्रकों के चक्के जाम, इस फैसले से फूटा गुस्सा

दिल्ली एनसीआर में तीन दिन ट्रकों के चक्के नहीं घूमेंगे। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) के नेतृत्व में तीन दिवसीय चक्का जाम का एलान किया है।  ट्रांसपोर्ट यूनियन का कहना है कि अगर मांगें नहीं मानी गईं तो वो अनिश्चितकाल के लिए ये चक्काजाम शुरू कर देंगे।

Post Published By: Jay Chauhan
Updated : 20 May 2026, 5:16 AM IST
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New Delhi: दिल्ली सरकार की नीतियों के विरोध में दिल्ली-एनसीआर की 68 से अधिक परिवहन एसोसिएशनों और यूनियनों ने तीन दिवसीय चक्का जाम का एलान किया है। 21 से 23 मई तक तीन दिन ट्रक हड़ताल पर रहेंगें।

संगठनों का आरोप है कि पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ईसीसी) में भारी बढ़ोतरी और बीएस-4 कमर्शियल वाहनों पर प्रस्तावित प्रतिबंध से परिवहन उद्योग पर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

ईसीसी बढ़ाने से बढ़ा आक्रोश

एआईएमटीसी के प्रमुख डॉ. हरीश सभ्रवाल ने कहा कि दिल्ली आने वाले मालवाहक वाहनों पर बिना किसी भेदभाव के ईसीसी बढ़ाया गया है। हल्के कमर्शियल वाहनों पर यह शुल्क करीब 1400 रुपये से बढ़ाकर 2000 रुपये और भारी ट्रकों पर 2600 रुपये से बढ़ाकर 4000 रुपये कर दिया गया है।

संगठन का दावा है कि यह बढ़ोतरी 40 से 55 प्रतिशत तक है, जिससे ट्रांसपोर्ट कारोबार पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

ट्रांसपोर्ट संगठनों का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय का मूल उद्देश्य केवल उन ट्रांजिट वाहनों को दिल्ली में प्रवेश से रोकना था, जो राजधानी को कॉरिडोर की तरह इस्तेमाल करते हैं। लेकिन अब आवश्यक वस्तुएं लेकर आने वाले और दिल्ली में लोडिंग के लिए खाली प्रवेश करने वाले वाहनों पर भी ईसीसी लगाया जा रहा है, जिन्हें पहले छूट प्राप्त थी।

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ट्रकों पर रोजी रोटी का संकट

संगठनों ने बीएस-4 वाहनों पर भी ईसीसी लगाए जाने का विरोध किया है। उनका कहना है कि ये वाहन नवीनतम उत्सर्जन मानकों का पालन करते हैं और ग्रेप-4 के दौरान भी इन्हें संचालन की अनुमति दी जाती है। इसके अलावा 1 नवंबर 2026 से बीएस-4 और उससे नीचे के कमर्शियल वाहनों के दिल्ली प्रवेश पर प्रस्तावित प्रतिबंध को भी अवैज्ञानिक और गैरकानूनी बताया गया है। एआईएमटीसी के अनुसार इससे दिल्ली-एनसीआर के 17 लाख से अधिक ट्रक ऑपरेटरों और उनके परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी।

ट्रांसपोर्ट यूनियन का कहना है कि इस टैक्स से उनकी रोजी-रोटी पर संकट आ गया है। उनका धंधा चौपट हो रहा है। AIMTC प्रतिनिधियों की इस बाबत परिवहन मंत्रियों से सकारात्मक बातचीत भी हुई थी, जिसमें उन्हें बताया गया कि ये मामला वायु प्रदूषण की निगरानी संस्था सीएक्यूएम और दिल्ली सरकार का है।

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ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि दिल्ली एनसीआर में ही लाखों ट्रक चालक हैं, सरकार उनके धंधे और रोजगार के बारे में भी सोचें। ग्रीन टैक्स से इस्तेमाल करोड़ों रुपये का क्या इस्तेमाल हुआ है। हम दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद में दूध, सब्जी, पानी से लेकर तमाम जरूरी सामानों की आपूर्ति की लाइफलाइन से जुड़े हैं।

Location :  New Delhi

Published :  20 May 2026, 5:01 AM IST

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