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भारत-रूस 100 अरब डॉलर के ट्रेड मिशन पर (Img- X)
New Delhi: वैश्विक वित्तीय प्रणाली में अब तक पश्चिमी देशों और डॉलर का जो वर्चस्व रहा है, उसे नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के मंच से सीधी चुनौती मिलती दिख रही है। ब्रिक्स देशों ने न केवल पश्चिमी पाबंदियों और डॉलर की निर्भरता को खत्म करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बढ़ाया है, बल्कि 'स्वदेशी डिजिटल भुगतान' के दम पर एक समानांतर और स्वतंत्र आर्थिक साम्राज्य बनाने की ठोस नींव भी रख दी है।
सम्मेलन के दौरान रूस, भारत और ईरान स्थानीय मुद्राओं (Local Currencies) में व्यापार करने पर पूरी तरह एकमत नजर आए। व्यापार को बिना किसी विदेशी रुकावट या स्विफ्ट (SWIFT) जैसे पुराने पेमेंट सिस्टम के चलाने के लिए 'ब्रिक्स पे' (BRICS Pay) नाम की नई भुगतान प्रणाली पर बड़ी सहमति बनने के आसार हैं।
इस प्रणाली का मूल मकसद सीमा पार लेनदेन को आसान बनाना, व्यापारियों को बिना डॉलर के कारोबार की छूट देना और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को अपनी स्थानीय मुद्रा में ही आसानी से भुगतान की सुविधा देना है।
बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की डिजिटल क्रांति को ब्रिक्स की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि आज दुनिया का लगभग 50 प्रतिशत रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट भारत के यूपीआई से होता है।
पीएम मोदी ने 'मेक इन इंडिया, इनोवेट विद इंडिया' का आह्वान करते हुए कहा कि भारत अपनी इस डिजिटल लेयर को पूरे ब्रिक्स और उसके 21 साझेदार देशों के परिवार तक ले जाना चाहता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिलेगी।
शिखर सम्मेलन से इतर पीएम नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच 45 मिनट की अहम द्विपक्षीय वार्ता हुई। इसमें दोनों देशों ने साल 2030 तक अपने आपसी व्यापार को बढ़ाकर 100 अरब डॉलर (करीब 8.8 लाख करोड़ रुपये) के पार ले जाने का महा-लक्ष्य तय किया। इसके साथ ही समुद्री सुरक्षा, खुले आपूर्ति चैनलों और समुद्री यात्रियों की सुरक्षा पर भी पीएम मोदी ने विशेष जोर दिया।
Location : New Delhi
Published : 12 September 2026, 11:09 AM IST
Topics : BRICS 2026 brics summit 2026 PM Modi Vladimir Putin