आम आदमी की थाली पर मंडराया महंगाई का बड़ा संकट! दाल और चावल के दामों में भारी उछाल आने से बिगड़ सकता घर का गणित

क्या आने वाले दिनों में दाल और चावल दोनों आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ेंगे? अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी और कमजोर मानसून की आशंका ने खाद्य महंगाई का खतरा बढ़ा दिया है।

Post Published By: Pratibha Yadav
Updated : 12 September 2026, 10:03 AM IST
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New Delhi: भारत में दाल और चावल की कीमतों को लेकर आने वाले दिनों में आम लोगों की चिंता बढ़ सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में दालों के भाव मजबूत होने से भारत के लिए आयात लागत बढ़ रही है। वहीं, देश के कुछ हिस्सों में कमजोर मानसून के कारण खरीफ फसलों की पैदावार प्रभावित होने की आशंका है। यदि बाजार में दालों और चावल की उपलब्धता कम होती है, तो खुदरा कीमतों पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।

उड़द महंगी होने से बढ़ सकती है दाल की लागत

आईग्रेन इंडिया के अनुसार, ब्राजील से भारत आने वाली ग्रेड-1 उड़द का भाव बढ़कर 960 डॉलर प्रति टन हो गया है। पहले इसकी कीमत 950 डॉलर प्रति टन थी। इस तरह उड़द के दाम में करीब 1 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। म्यांमार एसक्यू उड़द का भारत के लिए भाव भी 965 डॉलर प्रति टन पहुंच गया है। आयात महंगा होने का असर आगे चलकर उड़द दाल, दाल आधारित खाद्य पदार्थों और होटल-रेस्तरां की लागत पर पड़ सकता है।

तुअर दाल के भाव पर भी बढ़ा दबाव

तुअर के अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी तेजी दर्ज की गई है। मोजांबिक की गजरा तुअर भारत के लिए 7 फीसदी बढ़कर 760 डॉलर प्रति टन हो गई है। मलाविया रेड तुअर का भाव 675 डॉलर प्रति टन और म्यांमार लेमन-टाइप तुअर 3 फीसदी बढ़कर 895 डॉलर प्रति टन पहुंच गई है। भारत में तुअर दाल की खपत अधिक है, इसलिए आयात लागत बढ़ने पर इसका असर घरेलू बाजार में दिखाई दे सकता है।

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चना और मटर भी हो रहे महंगे

ऑस्ट्रेलिया से भारत आने वाले चने का भाव 685 डॉलर प्रति टन हो गया है। ऑस्ट्रेलियाई चने की कीमत बांग्लादेश, भारत, नेपाल और पाकिस्तान के लिए 25 डॉलर प्रति टन बढ़ी है। इसके अलावा कनाडाई पीली मटर का भारत के लिए भाव 2 फीसदी बढ़कर 425 डॉलर प्रति टन पहुंच गया है। मटर की कीमत बढ़ने से दालों के विकल्प के रूप में इस्तेमाल होने वाली मटर और इससे जुड़े खाद्य उत्पाद भी महंगे हो सकते हैं।

चावल की कीमतों पर भी बढ़ सकता है दबाव

दालों के साथ चावल के बाजार पर भी महंगाई का असर पड़ने की आशंका है। भारत में चावल की कीमतें धान की पैदावार, मंडियों में आवक, सरकारी खरीद, भंडारण और निर्यात नीति से प्रभावित होती हैं। यदि कमजोर मानसून के कारण धान का उत्पादन घटता है या मंडियों में आवक कम रहती है, तो चावल की कीमतें बढ़ सकती हैं। खासकर सामान्य चावल, प्रीमियम चावल और खुले बाजार में बिकने वाले चावल के दाम पर इसका असर पड़ सकता है।

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कम उपलब्धता से बढ़ सकती है खुदरा महंगाई

दाल और चावल दोनों ही भारतीय परिवारों के रोजमर्रा के भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनकी कीमतों में बढ़ोतरी से मध्यमवर्ग और गरीब परिवारों के घरेलू बजट पर सीधा असर पड़ेगा। यदि आयात महंगा रहता है और घरेलू उत्पादन उम्मीद से कम होता है, तो बाजार में उपलब्धता घट सकती है। ऐसी स्थिति में थोक के साथ खुदरा बाजार में भी दाल और चावल के दाम ऊपर जाने का खतरा रहेगा।

सरकार के सामने बढ़ेगी कीमतें नियंत्रित रखने की चुनौती

खाद्य महंगाई को नियंत्रित रखने के लिए सरकार को घरेलू स्टॉक, आयात नीति, बाजार में आवक और जमाखोरी पर नजर रखनी होगी। जरूरत पड़ने पर आयात को आसान बनाना, बफर स्टॉक जारी करना और बाजार निगरानी बढ़ाना जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। हालांकि, दालों और चावल की वास्तविक खुदरा कीमतें घरेलू उत्पादन, मौसम, मांग और सरकारी फैसलों पर निर्भर करेंगी।

Location :  New Delhi

Published :  12 September 2026, 10:03 AM IST

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