सट्टा बाजार ने बदले बंगाल के समीकरण, क्या सच में ‘दीदी’ पर भारी पड़ेंगे ‘मोदी’, पढ़े खास रिपोर्ट

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों से पहले सट्टा बाजार ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है। राजस्थान के फलोदी सट्टा बाजार के ताजा आंकड़ों ने चुनावी समीकरण बदल दिए हैं। जहां पहले टीएमसी को बढ़त मिलती दिख रही थी, वहीं अब बीजेपी को बहुमत के करीब बताया जा रहा है। इस बदलाव ने बंगाल की राजनीति में suspense और बढ़ा दिया है।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 3 May 2026, 6:14 PM IST
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West Bengal: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने से ठीक पहले सियासी गलियारों में एक अलग तरह का तनाव देखने को मिल रहा है। जहां राजनीतिक दल आखिरी उम्मीदों के सहारे बैठे हैं, वहीं सट्टा बाजार ने चुनावी माहौल में क्राइम थ्रिलर जैसा सस्पेंस जोड़ दिया है। राजस्थान का चर्चित फलोदी सट्टा बाजार अचानक नए आंकड़ों के साथ सामने आया है, जिसने टीएमसी और बीजेपी दोनों के खेमों में बेचैनी बढ़ा दी है। चुनावी नतीजे अभी आने बाकी हैं, लेकिन दांव और दावे अभी से सत्ता की तस्वीर बदलते नजर आ रहे हैं।

शुरुआत में टीएमसी आगे, अब बदले समीकरण

चुनाव की शुरुआत में फलोदी सट्टा बाजार टीएमसी के पक्ष में नजर आ रहा था। शुरुआती अनुमान में ममता बनर्जी की पार्टी को 158 से 161 सीटें मिलने की संभावना जताई गई थी। वहीं बीजेपी को 127 से 130 सीटों के बीच सीमित माना जा रहा था। लेकिन मतदान के बाद हालात तेजी से बदलते दिखाई दिए। खासकर दूसरे चरण में रिकॉर्ड मतदान प्रतिशत ने सट्टा बाजार की गणना को पूरी तरह पलट दिया।

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नए आंकड़ों में बीजेपी को बढ़त

ताजा सट्टा गणना के अनुसार अब बीजेपी को पश्चिम बंगाल की 294 सीटों वाली विधानसभा में 150 से 152 सीटें मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है। यह आंकड़ा बहुमत के 148 सीटों के जादुई नंबर से ऊपर माना जा रहा है। दूसरी तरफ टीएमसी को 137 से 140 सीटों तक सीमित बताया जा रहा है। यही वजह है कि सियासी गलियारों में अब मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है।

भवानीपुर सीट पर भी बढ़ी चिंता

सट्टा बाजार में किसी उम्मीदवार का ‘भाव’ बढ़ना कमजोरी का संकेत माना जाता है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की भवानीपुर सीट को लेकर भी चर्चा तेज है। पहले जहां उनका भाव 20 से 25 पैसे के बीच था, वहीं अब यह बढ़कर 50 पैसे तक पहुंच गया है। इसका मतलब माना जा रहा है कि इस सीट पर मुकाबला पहले से ज्यादा कड़ा हो सकता है।

क्यों बदला सट्टा बाजार का मूड?

विशेषज्ञों का कहना है कि रिकॉर्ड मतदान अक्सर सत्ता विरोधी माहौल का संकेत माना जाता है। इसके अलावा भ्रष्टाचार के आरोप, अदालत के फैसले और चुनावी ध्रुवीकरण जैसे मुद्दों ने सट्टा बाजार की सोच बदल दी है। यही कारण है कि शुरुआती अनुमान अब पूरी तरह अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं।

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मुंबई और दिल्ली के बाजार भी एक्टिव

सिर्फ फलोदी ही नहीं, बल्कि मुंबई और दिल्ली के सट्टा बाजार भी बंगाल चुनाव को लेकर सक्रिय हैं। मुंबई का बाजार बीजेपी की ओर झुकाव दिखा रहा है, जबकि दिल्ली के बाजार में अभी भी टीएमसी की स्थिति मजबूत मानी जा रही है। हालांकि, फलोदी बाजार को लंबे समय से राजनीतिक भविष्यवाणी के लिए ज्यादा चर्चित माना जाता है।

अंतिम फैसला जनता के वोट से

सट्टा बाजार के आंकड़े भले ही चर्चा में हो, लेकिन चुनावी लोकतंत्र में अंतिम फैसला जनता के वोट से ही तय होता है। कई बार सट्टा बाजार के अनुमान सही साबित हुए हैं, तो कई बार पूरी तरह गलत भी निकले हैं। अब सबकी नजर मतगणना पर टिकी है, जहां तय होगा कि बंगाल में ‘दीदी’ का दबदबा कायम रहेगा या बीजेपी सत्ता की नई कहानी लिखेगी।

Location :  West Bengal

Published :  3 May 2026, 6:14 PM IST

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