जानिए नीम करोली बाबा की रोचक कहानी, जिससे देश-विदेश के श्रद्धालु खिंचे आते हैं

नैनीताल की शांत वादियों के बीच बसे कैंचीधाम की पहचान दुनिया भर में फैली आस्था और विश्वास से बनती है, और इस आस्था के केंद्र में हैं बाबा नीम करोली महाराज । 1900 के आसपास उत्तर प्रदेश के अकबरपुर में जन्मे लक्ष्मी नारायण शर्मा आगे चलकर ऐसे संत बने, जिनके जीवन और शिक्षाओं ने अनगिनत लोगों को दिशा दी।

Nainital: नैनीताल की शांत वादियों के बीच बसे कैंचीधाम की पहचान दुनिया भर में फैली आस्था और विश्वास से बनती है और इस आस्था के केंद्र में हैं बाबा नीम करोली महाराज । 1900 के आसपास उत्तर प्रदेश के अकबरपुर में जन्मे लक्ष्मी नारायण शर्मा आगे चलकर ऐसे संत बने जिनके जीवन और शिक्षाओं ने अनगिनत लोगों को दिशा दी। बाबा को हनुमान जी का अवतार माना जाता है और उनकी करुणा, सरलता और चमत्कारों की कहानियाँ आज भी भक्तों के बीच उसी श्रद्धा के साथ सुनाई जाती हैं, जैसे दशकों पहले सुनाई जाती थीं।

बाबा की सबसे प्रसिद्ध घटनाओं में से एक उनके नाम को लेकर है। वर्ष 1958 में जब वे घर छोड़कर यात्रा कर रहे थे, तो एक बार बिना टिकट यात्रा के दौरान टीसी ने उन्हें नीब करोरी नामक गांव के पास ट्रेन से उतार दिया। बाबा के उतरने के बाद ट्रेन किसी तरह आगे नहीं बढ़ी।

काफी प्रयासों और असमंजस के बाद टीसी भयभीत होकर बाबा से वापस आने की विनती करने लगा। जैसे ही बाबा ट्रेन में चढ़े, ट्रेन तुरंत चल पड़ी। इस घटना के बाद लोग उन्हें नीम करोली बाबा कहने लगे और यही नाम उनके जीवन की पहचान बन गया।

स्टीव जॉब्स और मार्क जुकरबर्ग ने भी किए दर्शन

बाबा का जीवन केवल चमत्कारों तक सीमित नहीं रहा। उनकी शिक्षाओं ने दुनिया भर के लोगों को एक नई दृष्टि दी। उनका मुख्य संदेश था सब एक हैं और यही बात आगे चलकर लाखों भक्तों की साधना बन गई। तकनीक की दुनिया के दिग्गज भी उनके विचारों से गहराई से प्रभावित हुए।

स्टीव जॉब्स ने अपने जीवन के कठिन दौर में बाबा की शिक्षाओं में शांति ढूंढी, जबकि मार्क जुकरबर्ग भी यहां के दर्शन करके स्वयं को मानसिक रूप से अधिक स्थिर बताते हैं।

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कैंचीधाम की स्थापना बाबा के जीवन की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है। उत्तराखंड के नैनीताल के पास स्थित इस स्थान पर उन्होंने 15 जून 1964 को हनुमान मंदिर की स्थापना की। उस समय यह पूरा क्षेत्र बिल्कुल निर्जन थान पानी था न व्यवस्था, न सड़कें। आसपास केवल जंगल थे।

मंदिर की स्थापना के शुरुआती दिनों में एक ग्रामीण ने बाबा से पूछा था कि यहां कोई सुविधा नहीं है, ऐसे में कौन यहां आएगा। बाबा ने मुस्कुराते हुए कहा था कि समय आएगा जब पूरा विश्व यहां आएगा। आज हर साल लाखों लोग कैंचीधाम पहुंचकर बाबा का आशीर्वाद लेते हैं और उनकी कही यह बात हकीकत बन चुकी है।

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बाबा के चमत्कारों की कहानियाँ आज भी लोगों में उतनी ही आस्था जगाती हैं। बाबा का प्रभाव इतना गहरा था कि उनके पास आने वाला हर व्यक्ति खुद को हल्का, शांत और आत्मिक रूप से मजबूत महसूस करता था।

Location :  Nainital

Published :  3 May 2026, 6:02 PM IST

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