दिन में 30 बार टॉयलेट जाने की नौबत! जानिए क्या है Cyclospora और क्यों इससे कांप रहे हैं डॉक्टर्स?

अमेरिका के बाद अब पेट में तबाही मचा रहा है 'साइक्लोस्पोरा' परजीवी! दिन में 30 बार दस्त और महीनों की कमजोरी देने वाले इस इंफेक्शन पर आम दवाएं भी बेअसर हैं। मानसून में हरी सब्जियों और दूषित पानी से फैल रही इस बीमारी से खुद को ऐसे बचाएं!

Updated : 21 July 2026, 4:30 PM IST
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New Delhi: यदि आपको या आपके घर में किसी को लगातार पानी जैसे दस्त हो रहे हैं और आम एंटीबायोटिक दवाएं काम नहीं कर रही हैं, तो सतर्क हो जाइए। अमेरिका में तबाही मचाने के बाद अब 'साइक्लोस्पोरा' (Cyclospora) नाम के एक खतरनाक सूक्ष्म परजीवी (प्रोटोजोआ) ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की रातों की नींद उड़ा दी है।

हालात इतने भयानक हैं कि संक्रमित मरीजों को दिन में 30-30 बार टॉयलेट भागना पड़ रहा है। सबसे डराने वाली बात यह है कि यह परजीवी हमारी छोटी आंत की परतों में छिपकर बैठ जाता है और हफ्तों तक शरीर को निचोड़ता रहता है।

आम फूड पॉइजनिंग से कितना अलग और खतरनाक?

लोग अक्सर इसे सामान्य पेट खराब होना या वायरल इंफेक्शन समझ लेते हैं। सामान्य फूड पॉइजनिंग 2 से 3 दिनों में ठीक हो जाती है, लेकिन साइक्लोस्पोरा हफ्तों तक पीछा नहीं छोड़ता। इसके मुख्य लक्षणों में बिना खून वाले तेज पानी जैसे दस्त, पेट में दर्द, गैस, भूख न लगना, थकान और तेजी से वजन गिरना शामिल है। यह परजीवी आंतों को पोषक तत्व सोखने नहीं देता, जिससे मरीज ठीक होने के बाद भी महीनों तक कमजोरी महसूस करता है।

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क्लोरीन भी बेअसर, हरी सब्जियों और पानी से फैल रहा जहर

साइक्लोस्पोरा दूषित पानी, कच्ची सब्जियों, पत्तेदार साग और ताजे फलों के जरिए इंसानों के शरीर में प्रवेश करता है। इसकी बाहरी परत इतनी कठोर होती है कि पानी साफ करने वाला क्लोरीन भी इसे आसानी से मार नहीं पाता। भारत में ICMR-NICED की स्टडी के मुताबिक, मानसून के महीनों (जुलाई-अगस्त) में इसके मामले 7 प्रतिशत तक बढ़ जाते हैं और 5 से 12 साल के बच्चे इसका सबसे आसान शिकार बनते हैं।

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इलाज के लिए विशेष जांच और सही दवा जरूरी

इस बीमारी की पहचान सामान्य स्टूल टेस्ट से नहीं होती, बल्कि इसके लिए स्पेशल पैथोलॉजी टेस्ट कराना पड़ता है। राहत की बात यह है कि मेट्रोनिडाजोल जैसी आम दवाएं भले ही बेअसर साबित हों, लेकिन को-ट्रिमोक्साजोल दवा से मरीज में तेजी से सुधार देखा जाता है। यदि दस्त 2 सप्ताह से अधिक रहें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

Location :  New Delhi

Published :  21 July 2026, 4:10 PM IST

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