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भोजपुरी आइकॉनिक लोकगीत (Img: Dynamite News)
New Delhi: जब भी भोजपुरी संगीत की बात होती है, तो अक्सर जोरदार बीट्स और डीजे ट्रैक्स का ख्याल आता है। लेकिन भोजपुरी लोक संगीत की दुनिया इससे कहीं ज्यादा गहरी और भावनाओं से भरी है। इसी लोक परंपरा का एक गाना है - ‘जनि जा बिदेसवा के ओर...’ (दूर देश मत जाओ...); यह गाना प्यार, बिछड़ने का दर्द और गांव छोड़ने की मजबूरी - इन सभी भावनाओं को एक साथ जगाता है। इसकी सादगी ही इसे सच में खास बनाती है।
हालांकि गाने में इस्तेमाल शब्द ‘बिदेसवा’ से विदेशी जमीन का ख्याल आ सकता है, लेकिन यहां इसका मतलब गांव और घर से दूर किसी अनजान शहर से है। पहले बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के गांवों में रोजगार के मौके कम थे। इसलिए बड़ी संख्या में पुरुष काम की तलाश में कलकत्ता, असम या दूसरी जगहों पर जाते थे।
वे अपनी पत्नियों, परिवारों और गांवों को पीछे छोड़ जाते थे। इन हालात ने ऐसे लोक गीतों को जन्म दिया जो घर छोड़ने वाले पति और उनके लौटने का इंतजार कर रही पत्नी, दोनों की भावनाओं को बयां करते थे।
इस गाने की भावनाएं एक ऐसी महिला के इर्द-गिर्द घूमती हैं जो अपने प्रियतम से दूर देश न जाने की गुजारिश कर रही है। उसके लिए पति का जाना सिर्फ शारीरिक दूरी नहीं बल्कि उस खालीपन का एहसास है जो पूरे घर को घेर लेगा। ‘तोहरे दरस बिनु कल्पि परनवा’ (तुम्हारे दर्शन के बिना मेरी आत्मा तड़प रही है) जैसी लाइनें बिछड़ने के इस एहसास को और गहरा करती हैं। यह गाना न सिर्फ पत्नी की तड़प को दिखाता है, बल्कि उस दौर के ग्रामीण समाज की सच्चाई को भी दर्शाता है।
यह गाना सिर्फ प्यार और बिछड़ने तक सीमित नहीं है; यह रोजगार की जरूरत से होने वाले पलायन की बड़ी कहानी भी बताता है। मशहूर भोजपुरी लोक कलाकार भिखारी ठाकुर द्वारा शुरू की गई ‘बिदेसिया’ परंपरा ने भी पलायन, परिवार से बिछड़ने और सामाजिक पीड़ा जैसे मुद्दों को आवाज दी। यही वजह है कि ऐसे गाने सुनकर पूर्वांचल के लोगों को तुरंत अपने वतन और बीते हुए समय की याद आ जाती है।
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समय बदल गया है और लोक संगीत का सफर गांव की चौपालों से आगे बढ़कर डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुंच गया है। लोक कलाकारों की एक नई पीढ़ी ने पारंपरिक गीतों को नई धुनों और शैलियों के साथ पेश किया है। मैथिली ठाकुर जैसे कलाकारों की प्रस्तुतियों ने भोजपुरी और लोक संगीत को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है।
आज जब बड़े शहरों में रहने वाले युवा ‘जानी जा बिदेसवा के ओर’ जैसा गाना सुनते हैं, तो वे सिर्फ संगीत ही नहीं सुनते; बल्कि उन्हें अपने गांव, अपने परिवार और उस मिट्टी की यादें ताजा हो आती हैं जिनसे उनकी जड़ें जुड़ी हुई हैं।
Location : New Delhi
Published : 3 September 2026, 3:18 PM IST
Topics : Bhojpuri folk songs Bhojpuri Music Bidesiya folk tradition Traditional Bhojpuri culture Traditional Bihar folk music
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