फ्लैश ब्लाइंडनेस पर पुलिस का चाबुक, एक्स्ट्रा LED लाइट लगाने वालों को अब इतना भरना होगा चालान, बाइक अलग होगी जब्त

बाइक में कंपनी से अलग तेज रोशनी वाली आफ्टरमार्केट LED लाइट लगवाना भारी पड़ सकता है। ट्रैफिक पुलिस धारा 190(2) के तहत 5,000 रुपये तक का चालान काट सकती है और मौके पर ही अवैध लाइट जब्त कर गाड़ी को सीज भी कर सकती है।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 3 September 2026, 2:36 PM IST
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New Delhi: नई बाइक खरीदते ही उसमें आफ्टरमार्केट एक्स्ट्रा एसेसरीज और तेज रोशनी वाली एलईडी (LED) या प्रोजेक्टर लाइट्स लगवाना इन दिनों युवाओं के बीच एक खतरनाक ट्रेंड बन चुका है। लोग अपनी सहूलियत और स्टाइल के चक्कर में लेग गार्ड या बंपर पर हाई-इंटेन्सिटी डिस्चार्ज (HID) लाइट्स फिट करा लेते हैं।

लेकिन यह शौक न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि सड़क पर चलने वाले अन्य चालकों की जिंदगी के लिए भी बहुत बड़ा खतरा पैदा कर रहा है। मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार, कंपनी फिटेड ओरिजनल पार्ट्स में ऐसा कोई भी बदलाव करना सख्त मना है।

फ्लैश ब्लाइंडनेस बनी जानलेवा हादसों की वजह

आफ्टरमार्केट तेज लाइट्स के खिलाफ ट्रैफिक पुलिस की इस सख्ती के पीछे एक गंभीर वैज्ञानिक और सुरक्षा कारण है। जब कोई बाइक सवार रात के समय हाई-बीम या ब्लिंकिंग वाली तेज एलईडी लाइट जलाकर चलता है, तो सामने से आ रहे वाहन चालकों की आंखों पर रोशनी का सीधा प्रभाव पड़ता है।

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इसे मेडिकल भाषा में फ्लैश ब्लाइंडनेस कहते हैं। इसके कारण सामने वाले ड्राइवर को कुछ सेकंड के लिए दिखना बिल्कुल बंद हो जाता है और गाड़ी पर से नियंत्रण छूटने से भीषण सड़क हादसे हो जाते हैं।

5,000 रुपये तक का जुर्माना और जेल का खतरा

ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर जेब ढीली होना तय है। मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 190(2) के तहत अवैध या तय सीमा से अधिक तेज रोशनी वाली लाइट के साथ पकड़े जाने पर पहली बार में 1,000 रुपये से लेकर 2,000 रुपये तक का चालान काटा जा सकता है। वहीं, बार-बार यही गलती दोहराने या अवैध मॉडिफिकेशन के दोषी पाए जाने पर यह जुर्माना बढ़कर 5,000 रुपये तक पहुंच सकता है।

मौके पर जब्त होगी लाइट

यदि आप सोचते हैं कि सिर्फ चालान की रसीद कटवाकर आप आगे निकल जाएंगे, तो आप गलत हैं। चेकिंग के दौरान ट्रैफिक पुलिस मौके पर ही आपकी बाइक से गैर-कानूनी मॉडिफाइड लाइट्स को निकलवाकर जब्त कर सकती है।

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कई राज्यों में पुलिस ऐसे वाहनों को तब तक थाने में सीज रखती है, जब तक कि बाइक मालिक उसे वापस कंपनी वाली ओरिजनल कंडीशन में नहीं ला देता। आरटीओ और कोर्ट-कचहरी के चक्कर से बचने के लिए कंपनी द्वारा दिए गए स्टैंडर्ड सेफ्टी बल्ब का ही इस्तेमाल करें।

Location :  New Delhi

Published :  3 September 2026, 2:36 PM IST

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