हिंदी
प्रतीकात्मक छवि (फोटो सोर्स- Pinterest)
New Delhi: राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा स्नातक (NEET UG) का परिणाम घोषित होने के बाद मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश की प्रक्रिया का अगला महत्वपूर्ण चरण शुरू होता है। मेडिकल कॉलेज में दाखिला केवल अच्छे अंक या बेहतर रैंक लाने तक सीमित नहीं रहता। इसके बाद काउंसलिंग, चॉइस फिलिंग और सीट अलॉटमेंट जैसे कई जटिल और संवेदनशील चरण आते हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, परीक्षा में सफल होने वाले सभी छात्र-छात्राओं को अपने जरूरी दस्तावेज पहले से ही तैयार रखने चाहिए ताकि अंतिम समय में प्रवेश प्रक्रिया पूरी करने में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक या तकनीकी परेशानी का सामना न करना पड़े।
काउंसलिंग प्रक्रिया की शुरुआत से पहले अभ्यर्थियों को कुछ अनिवार्य दस्तावेजों की फाइल तैयार कर लेनी चाहिए। इनमें कक्षा दसवीं और बारहवीं की मूल मार्कशीट व पासिंग सर्टिफिकेट, एक वैध पहचान पत्र (जैसे आधार कार्ड), जाति प्रमाणपत्र, ओबीसी-एनसीएल या ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र (यदि आरक्षण का लाभ लेना हो), मूल निवास प्रमाणपत्र (डोमिसाइल) और अन्य आवश्यक शैक्षणिक दस्तावेज शामिल हैं। विशेषज्ञों ने विशेष रूप से सचेत किया है कि छात्र यह सुनिश्चित कर लें कि उनके सभी प्रमाणपत्रों में उनका नाम, माता-पिता का नाम और जन्मतिथि बिल्कुल एक समान हो, क्योंकि स्पेलिंग में मामूली अंतर भी उम्मीदवारी को संकट में डाल सकता है।
देश के प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों में प्रवेश के लिए काउंसलिंग की प्रक्रिया को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है:
15 प्रतिशत ऑल इंडिया कोटा (AIQ): इस कोटे की काउंसलिंग का आयोजन मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) द्वारा किया जाता है। इसके तहत देश भर के सभी सरकारी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों की 15 प्रतिशत सीटों पर मेधावी छात्रों को प्रवेश दिया जाता है।
85 प्रतिशत स्टेट कोटा: शेष 85 प्रतिशत सीटों के लिए संबंधित राज्यों की सरकारें और उनकी नोडल एजेंसियां अपने स्तर पर काउंसलिंग आयोजित करती हैं। इस कोटे के अंतर्गत राज्य के मूल निवासी प्रमाणपत्र (डोमिसाइल) धारक अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन काउंसलिंग पोर्टल पर कॉलेजों की पसंद (चॉइस फिलिंग) दर्ज करते समय अभ्यर्थियों को बिल्कुल भी जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। छात्र-छात्राओं को अपनी ऑल इंडिया रैंक, पिछले कुछ वर्षों के ओपनिंग और क्लोजिंग कटऑफ तथा अपने पसंदीदा कॉलेजों की सूची को ध्यान में रखकर ही विकल्पों को वरीयता क्रम में भरना चाहिए। चॉइस फिलिंग के समय की गई एक छोटी सी लापरवाही भी आपके हाथ से मनचाहा या बेहतर कॉलेज मिलने की संभावना को हमेशा के लिए छीन सकती है।
काउंसलिंग प्रक्रिया के दौरान अलग-अलग चरणों (राउंड) का आयोजन किया जाता है। प्रथम चरण (फर्स्ट राउंड) में सीट आवंटित होने के बाद, निर्धारित समय सीमा के भीतर छात्रों को संबंधित कॉलेज में भौतिक रूप से उपस्थित होकर रिपोर्ट करना होता है। इसके बाद, जो छात्र अपनी सीट बदलना चाहते हैं, वे सीट अपग्रेडेशन का विकल्प चुन सकते हैं।
RE-NEET (UG)-2026 परीक्षा को लेकर आज बदला शहर का रूट, घर से निकलने से पहले देखें डायवर्जन प्लान
अंत में बची हुई खाली सीटों को भरने के लिए स्ट्रे वैकेंसी राउंड आयोजित किया जाता है। इसके अतिरिक्त, एमसीसी की काउंसलिंग में भाग लेने वाले अभ्यर्थियों को एक निश्चित सिक्योरिटी फीस (सुरक्षा राशि) जमा करनी अनिवार्य होती है, जो नियमों और कुछ विशिष्ट परिस्थितियों के अधीन काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद वापस (रिफंड) कर दी जाती है।
इस वर्ष नीट यूजी काउंसलिंग के माध्यम से देश भर के कुल 824 मेडिकल कॉलेजों की लगभग 1.29 लाख से अधिक एमबीबीएस (MBBS) सीटों पर दाखिला दिया जाएगा। चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र की इन कुल सीटों में देश के प्रतिष्ठित सरकारी मेडिकल कॉलेज और शीर्ष निजी (प्राइवेट) डीम्ड विश्वविद्यालयों की सीटें भी शामिल हैं।
Location : New Delhi
Published : 23 June 2026, 1:39 PM IST