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जहाजों पर मंडराया खतरा (सोर्स- एक्स)
New Delhi: पश्चिम एशिया में जारी तनाव थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी बीच ओमान के पास एक कच्चे तेल के टैंकर पर अज्ञात प्रक्षेपास्त्र (मिसाइल) से हमला किए जाने का ताजा मामला सामने आया है। हालांकि, इस घटना में सभी चालक दल के सदस्य सुरक्षित बताए जा रहे हैं और पर्यावरण को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। इस बीच, एक अन्य घटना में कुवैत के झंडे वाले टैंकर पर हुए हमले के बाद पांच भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचाकर किनारे पर लाया गया है।
यूनाइटेड किंगडम समुद्री व्यापार संचालन (UKMTO) ने जानकारी दी है कि ओमान के पूर्व में करीब चार समुद्री मील की दूरी पर एक कच्चे तेल के टैंकर को अज्ञात प्रक्षेपास्त्र से निशाना बनाया गया। टैंकर के कप्तान ने बताया कि यह हमला जहाज के बाईं ओर हुआ। गनीमत यह रही कि इस घातक हमले में जहाज पर सवार सभी क्रू मेंबर सुरक्षित बच गए और किसी भी तरह के पर्यावरणीय प्रभाव की पुष्टि नहीं हुई है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय अधिकारियों ने तुरंत जांच शुरू कर दी है। इसके साथ ही, इस मार्ग से गुजरने वाले अन्य जहाजों को पूरी सावधानी बरतने और किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना UKMTO को देने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
एक अलग घटनाक्रम में, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे कुवैत के झंडे वाले कच्चे तेल के टैंकर 'MT Kazimah III' पर भी प्रक्षेपास्त्र से हमला किया गया। यह जहाज टोगो के लोमे बंदरगाह की ओर जा रहा था। इस खतरनाक हमले के बाद ओमान में स्थित भारतीय दूतावास ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बचाव अभियान का प्रभावी समन्वय किया।
भारतीय दूतावास के प्रयासों से टैंकर पर सवार पांचों भारतीय नागरिकों को सुरक्षित रूप से जमीन पर स्थानांतरित कर दिया गया। भारत सरकार ने इस जटिल और जोखिम भरे बचाव अभियान के दौरान लगातार सहायता प्रदान करने के लिए ओमान के अधिकारियों के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया है।
इस पूरी स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है कि भारत सरकार फारस की खाड़ी में वाणिज्यिक जहाजों पर तैनात भारतीय नाविकों की सुरक्षा और कुशलता पर बेहद बारीकी से नजर रख रही है। उन्होंने विस्तृत आंकड़े साझा करते हुए बताया कि इस क्षेत्र में वर्तमान में भारत के झंडे वाले छह और भारत आने वाले सामानों को ढोने वाले छह विदेशी झंडे वाले जहाज सक्रिय हैं।
इन कुल 12 जहाजों पर लगभग 163 भारतीय नाविक सवार हैं। इसके अलावा, इस पूरे क्षेत्र में विभिन्न वाणिज्यिक जहाजों पर कुल मिलाकर 4,500 से अधिक भारतीय नाविक कार्यरत हैं। जहाजरानी मंत्रालय, भारतीय राजनयिक मिशन और स्थानीय हितधारक लगातार आपसी समन्वय के जरिए इनकी आवाजाही की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह विदेशों में काम करने वाले अपने समुद्री समुदाय की सुरक्षा और भलाई के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि यह ताजा घटनाक्रम फारस की खाड़ी, लाल सागर और काला सागर जैसे प्रमुख समुद्री गलियारों में लगातार बढ़ रहे सुरक्षा खतरों की ओर इशारा करते हैं, जहां वाणिज्यिक जहाजों को बार-बार हमलों का सामना करना पड़ रहा है।
हाल ही में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 81वें संयुक्त राष्ट्र महासभा के अपने संबोधन में वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों पर हो रहे इन हमलों पर गहरी चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने कहा था कि समुद्री क्षेत्र की ये नई चुनौतियां जमीन पर पहले से मौजूद विवादों को और जटिल बना रही हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि हमलों में नाविकों की जान जाना पूरी तरह से अस्वीकार्य है।
वैश्विक स्तर पर इस समस्या से निपटने के लिए भारत ने लाइबेरिया और 23 अन्य भागीदार देशों के साथ मिलकर एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन का दामन थामा है, ताकि वैश्विक जनमत जुटाकर वाणिज्यिक शिपिंग मार्गों की पुख्ता सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। साथ ही, भारत ने खाड़ी क्षेत्र में तत्काल संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील की है, जो नागरिक नाविकों की जिंदगी बचाने और निर्बाध ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद जरूरी है।
Location : New Delhi
Published : 3 October 2026, 9:13 AM IST