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ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में पाकिस्तान जा रहे कंटेनर जहाज को रोककर वापस भेज दिया, जिससे मिडिल ईस्ट की राजनीति में हलचल मच गई है। जानिए क्यों यह घटना पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है और इसके पीछे की पूरी कूटनीतिक कहानी।
होर्मुज में रोका गया जहाज (Img: Internet)
New Delhi: मिडिल ईस्ट की उथल-पुथल भरी सियासत के बीच एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है जिसने पाकिस्तान की कूटनीतिक रणनीति पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। खाड़ी से कराची जा रहा एक कंटेनर जहाज अचानक होर्मुज जलडमरूमध्य में रोक दिया जाता है, चेतावनी मिलती है और फिर उसे वापस लौटना पड़ता है।
यह कोई साधारण घटना नहीं, बल्कि उस बड़े भू-राजनीतिक खेल का हिस्सा मानी जा रही है जिसमें अमेरिका, ईरान और पाकिस्तान आमने-सामने नजर आ रहे हैं। जहाज को रोकने की इस कार्रवाई ने साफ संकेत दे दिया है कि ईरान अब हर कदम सोच-समझकर उठा रहा है और पाकिस्तान के लिए रास्ते आसान नहीं रहने वाले।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कंटेनर जहाज संयुक्त अरब अमीरात से पाकिस्तान के कराची की ओर जा रहा था। जैसे ही यह जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के करीब पहुंचा, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नेवी ने इसे रोक लिया। अधिकारियों का साफ कहना था कि इस जहाज को होर्मुज से गुजरने की कोई आधिकारिक अनुमति नहीं दी गई थी, इसलिए इसे आगे बढ़ने नहीं दिया जा सकता।
जानकारी के मुताबिक यह एक छोटा फीडर कंटेनर जहाज था, जिसे साल 2000 में बनाया गया था। इसकी क्षमता लगभग 6850 टन सामान ढोने की है। जहाज में शारजाह के पास माल लोड किया गया था और यह ओमान के रास्ते होर्मुज से गुजरकर कराची पहुंचने वाला था।
हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस जहाज में क्या सामान था? अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। यही वजह है कि इस पूरे मामले को लेकर सस्पेंस और भी गहरा गया है।
इस घटना को पाकिस्तान के लिए एक बड़ा कूटनीतिक झटका माना जा रहा है। अब तक ईरान ने पाकिस्तान के कई जहाजों को होर्मुज से गुजरने दिया है, लेकिन इस बार अचानक इस जहाज को रोक देना कई सवाल खड़े करता है। पहला कारण यह है कि यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर चर्चा प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि पाकिस्तान इस समझौते में एक अहम मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है।
दूसरा बड़ा कारण यह है कि पिछले 24 घंटों में पाकिस्तान के शीर्ष नेताओं ने ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों से कई बार बातचीत की थी। खुद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से संपर्क किया था। इसके बावजूद जहाज को रोका जाना इस बात का संकेत है कि ईरान पाकिस्तान की कूटनीतिक कोशिशों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान इस कदम के जरिए एक सख्त संदेश देना चाहता है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और व्यापारिक सामान गुजरता है। ऐसे में किसी जहाज को रोकना सिर्फ एक तकनीकी कार्रवाई नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संकेत होता है।