पहले चेतावनी, अब तारीफ, नेतन्याहू पर ट्रंप के बयान बदलते ही बढ़ी सियासी हलचल

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप के बदले सुरों ने नई बहस छेड़ दी है। पहले लेबनान में हमलों को रोकने की बात कहने वाले ट्रंप अब इस्राइल को महान सहयोगी बता रहे हैं। इस यू-टर्न को कूटनीतिक दबाव, क्षेत्रीय संकट और अमेरिका-इस्राइल रिश्तों में बदलते समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।

Post Published By: Bobby Raj
Updated : 19 April 2026, 1:45 PM IST
google-preferred

New Delhi: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी राजनीति और कूटनीति में हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने इस पूरे विवाद की शुरुआत की। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर पोस्ट करते हुए इस्राइल से लेबनान में एयरस्ट्राइक रोकने की बात कही थी। उन्होंने साफ शब्दों में लिखा कि "अब बहुत हो गया", जिससे यह संकेत गया कि अमेरिका इस्राइल की सैन्य कार्रवाई से असहज है।

इस बयान के बाद इस्राइल में राजनीतिक हलचल बढ़ गई। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनके सलाहकारों ने इस टिप्पणी को गंभीरता से लिया और व्हाइट हाउस से स्पष्टीकरण मांगा। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया जब इस्राइल और लेबनान के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है और पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बनी हुई है।

ट्रंप ने बदला रुख, इस्राइल को बताया मजबूत सहयोगी

विवाद गहराने के बाद ट्रंप ने अपने रुख में अचानक बदलाव करते हुए इस्राइल की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि इस्राइल अमेरिका का "महान सहयोगी" है और इसे साहसी, मजबूत, वफादार और समझदार देश बताया। ट्रंप के इस बदले बयान को उनके पहले दिए गए सख्त संदेश के बिल्कुल उलट माना जा रहा है।

Middle East Crisis: होर्मुज स्ट्रेट में भारतीय टैंकरों पर किसने चलाई गोलियां, ईरान ने कहा- हमें नहीं है जानकारी

ऐसा माना जा रहा है कि यह बदलाव कूटनीतिक दबाव या रणनीतिक संतुलन साधने की कोशिश हो सकती है। पश्चिम एशिया में ईरान संकट, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और युद्धविराम प्रोटोकॉल जैसे मुद्दों के बीच अमेरिका को संतुलन बनाना पड़ रहा है। ऐसे में ट्रंप का यह यू-टर्न अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस को जन्म दे रहा है।

व्हाइट हाउस की सफाई और बढ़ती अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

इस पूरे विवाद के बीच व्हाइट हाउस ने स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि किसी भी समझौते का उद्देश्य आक्रामक सैन्य कार्रवाई को सीमित करना है, लेकिन आत्मरक्षा का अधिकार हर देश के पास बना रहता है। इस बयान के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई कि इस्राइल अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठा सकता है।

इसी बीच पूर्व उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका एक ऐसे संघर्ष में शामिल हो गया है, जिसे उसकी जनता नहीं चाहती थी। उनके इस बयान ने अमेरिकी राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

Italy: वैसाखी समारोह के दौरान दो भारतीयों की गोली मारकर हत्या, हड़कंप

वहीं दूसरी ओर, हिजबुल्लाह के नेता नईम कासिम ने शांति बनाए रखने के लिए सख्त शर्तें रखी हैं। उन्होंने कहा कि स्थायी शांति तभी संभव है जब सभी प्रकार की सैन्य कार्रवाई पूरी तरह बंद हो और इस्राइल लेबनान की जमीन से हटे। साथ ही कैदियों की रिहाई, विस्थापित लोगों की वापसी और युद्ध प्रभावित इलाकों के पुनर्निर्माण की भी मांग की गई है।

Location :  New Delhi

Published :  19 April 2026, 1:45 PM IST

Advertisement