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बांग्लादेश के झेनैदाह जिले में हिंदू विधवा के साथ सामूहिक दुष्कर्म और अमानवीय व्यवहार का मामला सामने आया है। घटना के बाद इलाके में दहशत है और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
बांग्लादेश में विधवा के साथ सामूहिक दुष्कर्म (img source: google)
Dhaka: बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा और उत्पीड़न के मामलों ने एक बार फिर गंभीर चिंता खड़ी कर दी है। हाल के दिनों में चार हिंदुओं की हत्या की खबरों के बीच अब एक हिंदू विधवा महिला के साथ दरिंदगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यह घटना झेनैदाह जिले के कालिगंज थाना क्षेत्र के नादिपारा इलाके की बताई जा रही है, जिसने स्थानीय समुदाय के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी आक्रोश पैदा कर दिया है।
पीड़िता की उम्र करीब 40 वर्ष बताई जा रही है। आरोप है कि इलाके के दो स्थानीय बदमाशों ने महिला के साथ पहले सामूहिक दुष्कर्म किया, फिर उसे पेड़ से बांधकर उसके बाल काट दिए। यही नहीं, आरोपियों ने इस पूरी घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियो के सामने आते ही इलाके में दहशत फैल गई और लोगों में गुस्सा भड़क उठा।
घटना के बाद महिला बेहोश हो गई। स्थानीय लोगों ने उसे गंभीर हालत में सदर अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज जारी है। होश में आने के बाद पीड़िता ने आरोपियों शाहीन और उसके साथी हसन के खिलाफ थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
पीड़िता के बयान के मुताबिक, उसने करीब ढाई साल पहले आरोपी शाहीन और उसके भाई से 20 लाख टका में 3 डेसिमल जमीन और एक दो मंजिला मकान खरीदा था। इसी सौदे के बाद से शाहीन की नीयत उस पर खराब हो गई। महिला का आरोप है कि शाहीन ने पहले भी कई बार उसके साथ अश्लील हरकतें करने की कोशिश की थी। जब महिला ने उसके प्रस्तावों को ठुकरा दिया, तो शाहीन ने उसे अलग-अलग तरीकों से परेशान करना शुरू कर दिया। धमकियां, दबाव और डराने-धमकाने का सिलसिला लंबे समय से चल रहा था।
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शनिवार शाम को जब पीड़िता के घर दो रिश्तेदार मौजूद थे, उसी दौरान शाहीन और उसका साथी जबरन घर में घुस आए। आरोप है कि दोनों ने महिला के रिश्तेदारों को डरा-धमकाकर बाहर कर दिया और फिर महिला के साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद उसे पेड़ से बांधकर बाल काटे गए और वीडियो रिकॉर्ड किया गया।
शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों की तलाश की जा रही है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ अपराधों में अक्सर कार्रवाई धीमी रहती है।
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यह घटना ऐसे समय पर सामने आई है जब बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा को लेकर पहले से ही सवाल उठ रहे हैं। बीते कुछ दिनों में हिंदुओं की हत्याओं और मंदिरों पर हमलों की खबरें आ चुकी हैं। जानकारों का मानना है कि अगर ऐसे मामलों में सख्त और त्वरित कार्रवाई नहीं हुई, तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस मामले की निष्पक्ष जांच और पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग की है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी बांग्लादेश सरकार पर दबाव बनाने की अपील की जा रही है, ताकि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।