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पीड़िता ने SSP से लगाई गुहार (IMG: Dynamite News)
Budaun: बदायूं में एक मुकदमे की विवेचना को लेकर पुलिस महकमे में सवाल खड़े हो गए हैं। थाना अलापुर में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 172/2026 की जांच से असंतुष्ट पीड़िता ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के दरबार में पहुंचकर निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। पीड़िता का आरोप है कि मामले की विवेचना के दौरान गंभीर धाराओं को कम कर दिया गया और जिन लोगों को उसने मुख्य आरोपी बताया था, उनके नाम भी जांच से अलग कर दिए गए। इतना ही नहीं, नगर पालिका के रिकॉर्ड में कथित फर्जीवाड़े और मूल रजिस्टरों के पन्ने बदले जाने का भी आरोप लगाया गया है।
पूरा मामला बदायूं जिले के थाना अलापुर में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 172/2026 से जुड़ा है। इस मामले में पीड़िता मिस्वा मलिक पत्नी स्वर्गीय मलिक मेराज खान, निवासी वार्ड नंबर 6, मोहल्ला बरादरी, ककराला ने SSP बदायूं को शिकायती प्रार्थना पत्र दिया है। अपने शिकायती पत्र में पीड़िता ने आरोप लगाया है कि मुकदमे की विवेचना कर रहे विवेचक और अलापुर के एसओ शनि चौधरी मामले की गंभीरता और उपलब्ध तथ्यों के अनुरूप कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। पीड़िता का कहना है कि जांच के दौरान जिस तरह से मुकदमे की धाराओं और आरोपियों के नाम में बदलाव हुआ है, उससे निष्पक्ष जांच को लेकर संदेह पैदा हो रहा है।
पीड़िता ने अपने शिकायती प्रार्थना पत्र में विवेचना के दौरान भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 338, 336 और 340(1) को कम किए जाने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया है।उसका आरोप है कि मुकदमे में लगाई गई इन महत्वपूर्ण धाराओं को विवेचना के दौरान कम कर दिया गया। पीड़िता ने सवाल उठाया है कि आखिर किन तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर धाराओं में बदलाव किया गया? उसने SSP से मांग की है कि धाराओं को कम किए जाने के कारणों की अभिलेखों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर समीक्षा कराई जाए।
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इस मामले में पीड़िता ने हसरत अली पुत्र रियासत अली और इंतखाब अहमद सकलैनी पुत्र मुमताज अहमद के नाम विवेचना से पृथक किए जाने पर भी आपत्ति जताई है। शिकायती प्रार्थना पत्र के मुताबिक, पीड़िता ने इन दोनों लोगों को मामले में मुख्य आरोपी बताया है। उसका आरोप है कि विवेचना के दौरान दोनों के नाम जांच से अलग कर दिए गए, जबकि उनकी भूमिका की निष्पक्ष तरीके से जांच होनी चाहिए थी।
शिकायत का एक अहम पहलू नगर पालिका के दस्तावेजों से जुड़ा है। पीड़िता ने अपने प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि नगर पालिका के रिकॉर्ड में गड़बड़ी की गई है। उसके मुताबिक, मूल रजिस्टरों के पन्ने बदले गए और उनमें कथित तौर पर फर्जी प्रविष्टियां की गई हैं। पीड़िता का कहना है कि दस्तावेजों में हुई इस कथित छेड़छाड़ की सच्चाई सामने लाने के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) से फॉरेंसिक जांच कराना जरूरी है।
पीड़िता ने SSP बदायूं को दिए गए शिकायती प्रार्थना पत्र में पांच प्रमुख मांगें रखी हैं। उसने सबसे पहले मुकदमा अपराध संख्या 172/2026 की वर्तमान विवेचना की निष्पक्षता की जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी से कराने की मांग की है। इसके अलावा मुकदमे की मुख्य धाराओं को कम किए जाने के कारणों की साक्ष्यों और अभिलेखों के आधार पर समीक्षा कराने की अपील की है। पीड़िता ने हसरत अली और इंतखाब अहमद सकलैनी के नाम विवेचना से हटाए जाने के आधार की भी जांच कराने की मांग की है।
पीड़िता ने अपने शिकायती प्रार्थना पत्र की प्रतिलिपि केवल SSP बदायूं तक ही सीमित नहीं रखी है। उसने इसकी प्रतिलिपि पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश, लखनऊ, अपर पुलिस महानिदेशक बरेली परिक्षेत्र, जिलाधिकारी बदायूं, क्षेत्राधिकारी बदायूं और अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था, उत्तर प्रदेश को भी भेजी है। पीड़िता का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और सरकारी अभिलेखों का निष्पक्ष परीक्षण होना चाहिए। उसकी मांग है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, जिससे सच्चाई सामने आ सके और किसी भी दोषी को अनुचित लाभ न मिले।
Location : Budaun
Published : 30 October 2026, 1:06 PM IST