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सहारनपुर में दंपतियों की बढ़ी परेशानी (IMG: AI Generated)
Saharanpur: सहारनपुर में एक अजीब स्थिति सामने आई है। जिन दंपतियों ने सालों पहले परिवार और रिश्तेदारों की मौजूदगी में शादी की थी, अब वही पति-पत्नी अपने पंडित, मौलवी या फादर को तलाशते फिर रहे हैं। वजह कोई पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि मैरिज सर्टिफिकेट है। किसी की शादी को 12 साल हो चुके हैं तो किसी के 15 साल। शादी के समय प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं पड़ी, लेकिन अब सरकारी योजना, नौकरी या दूसरे काम के लिए मैरिज सर्टिफिकेट जरूरी हुआ तो पुरानी शादी का रिकॉर्ड बनवाना चुनौती बन गया है। किसी पंडित का निधन हो चुका है तो किसी मौलवी का पता ही नहीं मिल रहा।
दरअसल, जून 2025 में स्टांप एवं पंजीयन विभाग ने विवाह पंजीकरण के नियमों में बदलाव किया। नए नियमों के तहत शादी की रस्म कराने वाले पंडित, मौलवी या फादर की गवाही को विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया में अहम बना दिया गया। हाल में शादी करने वाले दंपतियों के लिए तो यह प्रक्रिया ज्यादा मुश्किल नहीं है, क्योंकि शादी कराने वाले धर्मगुरु या पंडित से संपर्क आसानी से हो सकता है।
पंत विहार निवासी मोहित शर्मा की शादी को करीब 12 साल हो चुके हैं। शादी के वक्त उन्होंने मैरिज सर्टिफिकेट नहीं बनवाया था, क्योंकि उस समय इसकी जरूरत महसूस नहीं हुई। अब जब प्रमाणपत्र की जरूरत पड़ी तो उन्हें पता चला कि शादी कराने वाले पंडित जी का निधन हो चुका है। मोहित के लिए यह जानकारी किसी परेशानी से कम नहीं थी। शादी के वक्त जिस व्यक्ति ने वैदिक मंत्रों के साथ उनके सात फेरे कराए थे, आज वही इस दुनिया में नहीं हैं।
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ताहरपुर निवासी आफताब की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उनकी शादी को करीब 15 साल हो चुके हैं। इतने वर्षों तक उन्हें मैरिज सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं पड़ी। अब एक योजना में आवेदन के दौरान प्रमाणपत्र मांगा गया तो उन्होंने विवाह पंजीकरण कराने की कोशिश शुरू की। समस्या यह है कि 15 साल पहले उनका निकाह पढ़ाने वाले मौलवी को अब तलाशना आसान नहीं है। समय के साथ संपर्क टूट गया और अब उनका पता लगाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में आफताब को भी वैकल्पिक प्रक्रिया का सहारा लेना पड़ रहा है।
हलालपुर निवासी नीरज सैनी का मामला थोड़ा अलग है। उनकी शादी के बाद उन्होंने भी मैरिज सर्टिफिकेट नहीं बनवाया था। अब जब प्रमाणपत्र की जरूरत पड़ी तो विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू की। नीरज ने शादी कराने वाले पंडित जी से संपर्क कर लिया है, जिससे उनके लिए प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान हो गई है। वहीं बेहट रोड निवासी अनुभव कुमार को शादी कराने वाले पंडित नहीं मिले। शादी कराने वाले पंडित दूसरे स्थान पर चले गए हैं।
सबसे ज्यादा परेशानी उन दंपतियों को हो रही है, जिनकी शादी कई साल पहले हुई थी। शादी के समय परिवार के लिए पंडित या मौलवी की मौजूदगी एक धार्मिक रस्म का हिस्सा थी। उस समय शायद ही किसी ने सोचा होगा कि एक दशक या उससे ज्यादा समय बाद उसी व्यक्ति की गवाही मैरिज सर्टिफिकेट के लिए जरूरी पड़ सकती है।
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हालांकि, ऐसे मामलों में दंपतियों के लिए राहत की गुंजाइश भी है। नियमों में ऐसी परिस्थितियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था दी गई है। अगर शादी की रस्म कराने वाले पंडित, मौलवी या फादर की गवाही संभव नहीं है तो अभिभावक या सगे-संबंधियों की गवाही के साथ शादी से जुड़े दूसरे साक्ष्य भी प्रस्तुत किए जा सकते हैं।
सहारनपुर में जून 2025 में नियमों में बदलाव के बाद से अगस्त 2026 तक 1237 लोगों ने विवाह का पंजीकरण कराया है। आंकड़े बताते हैं कि मैरिज सर्टिफिकेट की जरूरत को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ रही है। सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, विभिन्न दस्तावेजों में वैवाहिक स्थिति साबित करने और दूसरे कानूनी या प्रशासनिक कामों में मैरिज सर्टिफिकेट की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में जिन लोगों ने शादी के समय पंजीकरण नहीं कराया था, वे अब विवाह का रिकॉर्ड तैयार कराने के लिए सामने आ रहे हैं।
Location : Saharanpur
Published : 28 August 2026, 12:41 PM IST
Topics : Marriage Certificate marriage registration Saharanpur News UP Registration Department Uttar Pradesh News