गरीबी, तंगहाली और बारिश का तिहरा वार, प्रतापगढ़ में छह जिंदगियां मलबे में दफन

प्रतापगढ़ के महुली वार्ड में लगातार बारिश के बीच जर्जर मकान ढहने से एक ही परिवार के छह लोगों की मौत हो गई। आर्थिक तंगी के कारण परिवार मकान की मरम्मत नहीं करा सका। पिता सब्जी बेचकर और बेटा ई-रिक्शा चलाकर घर चलाता था। हादसे ने पूरे इलाके को गम में डुबो दिया।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 6 August 2026, 1:35 PM IST
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Pratapgarh: रातभर बरसती बारिश ने गुरुवार को प्रतापगढ़ में ऐसा कहर बरपाया कि एक गरीब परिवार की पूरी दुनिया ही उजड़ गई। आर्थिक तंगी से जूझ रहा परिवार जिस जर्जर मकान को मजबूरी में अपना आशियाना बनाए हुए था, वही मकान कुछ ही सेकेंड में मौत का मलबा बन गया। चीख-पुकार के बीच लोग जब तक मदद के लिए दौड़ते, तब तक एक ही परिवार के छह सदस्य मलबे में दब चुके थे। यह हादसा सिर्फ बारिश का नहीं, बल्कि गरीबी, लाचारी और बदहाल व्यवस्था की दर्दनाक कहानी भी बयां कर गया।

महुली वार्ड में देर रात ढहा जर्जर मकान

यह दर्दनाक हादसा नगरपालिका परिषद प्रतापगढ़ के महुली वार्ड में हुआ। लगातार हो रही बारिश के कारण करीब एक दशक पुराना मकान अचानक भरभराकर गिर पड़ा। मकान के अंदर सो रहे परिवार को संभलने का मौका तक नहीं मिला। तेज धमाके की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक सब कुछ खत्म हो चुका था।

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गरीबी ने नहीं करने दी मकान की मरम्मत

मृतक प्रमोद श्रीवास्तव का परिवार बेहद साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर था। प्रमोद अपने घर के पास सब्जी बेचकर परिवार का पालन-पोषण करता था। वहीं उसका बड़ा बेटा अमन श्रीवास्तव ई-रिक्शा चलाकर घर के खर्च में हाथ बंटाता था। परिवार की आमदनी इतनी नहीं थी कि पुराने और जर्जर हो चुके मकान की मरम्मत करवा सके। मजबूरी में पूरा परिवार उसी खस्ताहाल मकान में रह रहा था। आखिरकार वही मकान उनके लिए काल साबित हुआ।

अधूरा रह गया सपनों का घर

बताया जा रहा है कि प्रमोद श्रीवास्तव का मकान करीब 1300 वर्ग फीट में बना हुआ था। इसमें दो कमरे, रसोई और शौचालय था। करीब तीन साल पहले परिवार ने दूसरी मंजिल बनाने का सपना देखा था और कुछ दीवारें भी खड़ी करवाई थीं, लेकिन आर्थिक तंगी के चलते निर्माण कार्य बीच में ही रुक गया।

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डेढ़ महीने पहले घर लौटा बेटा भी हादसे का शिकार

प्रमोद श्रीवास्तव के दो बेटे थे- अमन और नितिन। नितिन रोजगार के सिलसिले में बाहर नौकरी करता था। बताया जा रहा है कि करीब डेढ़ महीने पहले उसकी तबीयत खराब हो गई थी, जिसके चलते वह घर लौट आया था।

तीन साल पहले बसी थी अमन की दुनिया

परिवार के बड़े बेटे अमन श्रीवास्तव की शादी करीब तीन साल पहले माधुरी से हुई थी। शादी के बाद परिवार में खुशियां आई थीं। अमन और माधुरी के दो छोटे बेटे थे। बड़ा बेटा माधव करीब दो साल का था, जबकि छोटा बेटा अद्विक अभी महज आठ महीने का था। लेकिन बारिश की एक रात ने अमन की पूरी दुनिया उजाड़ दी। जिस परिवार के लिए वह दिन-रात ई-रिक्शा चलाकर मेहनत करता था, वही परिवार कुछ पलों में उससे हमेशा के लिए बिछड़ गया।

पूरे इलाके में मातम

हादसे की खबर फैलते ही इलाके में लोगों की भीड़ जुट गई। हर किसी की जुबान पर एक ही सवाल था कि अगर समय रहते मकान की मरम्मत हो जाती या परिवार को सुरक्षित आवास मिल जाता तो शायद छह लोगों की जान बच सकती थी।

 

Location :  Pratapgarh

Published :  6 August 2026, 1:35 PM IST

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