847 स्कूलों की हालत जर्जर, बच्चों के सिर पर मंडरा रहा खतरा; फिर भी नए भवनों के आवंटन पर उठे सवाल

प्रतापगढ़ में 847 परिषदीय स्कूल भवनों के जर्जर पाए जाने के बाद 475 नए विद्यालय भवनों के निर्माण को मंजूरी मिली है। लेकिन नई इमारतों की सूची को लेकर शिक्षकों और विभागीय सूत्रों ने सवाल उठाए हैं। आरोप है कि कुछ अपेक्षाकृत नए भवनों को सूची में जगह मिली, जबकि कुछ बेहद जर्जर स्कूल बाहर रह गए। विभाग का कहना है कि तकनीकी टीम की जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 25 September 2026, 4:40 PM IST
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Pratapgarh: बेल्हा में परिषदीय विद्यालयों की जर्जर इमारतें अब बच्चों और शिक्षकों के लिए चिंता का कारण बनती जा रही हैं। महुली वार्ड में हुए मकान हादसे के बाद जिलेभर में कराए गए सर्वे में 847 परिषदीय स्कूल भवन जर्जर पाए गए हैं। इसके बाद शासन स्तर से जिले में 440 प्राथमिक विद्यालय भवन, 35 उच्च प्राथमिक विद्यालय भवन और 15 अतिरिक्त कक्षा-कक्षों के निर्माण को मंजूरी दी गई है।

जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर बच्चे

प्रतापगढ़ के ग्रामीण इलाकों में कई परिषदीय विद्यालय ऐसे हैं, जहां भवन की हालत लंबे समय से खराब बताई जा रही है। कहीं दीवारों में दरारें हैं तो कहीं छत से बारिश का पानी टपकने की शिकायत है। ऐसे में बरसात के मौसम में बच्चों की सुरक्षा को लेकर शिक्षकों और अभिभावकों की चिंता बढ़ जाती है। महुली हादसे के बाद जब जिले में स्कूल भवनों की स्थिति का सर्वे कराया गया तो बड़ी संख्या में इमारतों के जर्जर होने की बात सामने आई।

सरसीखाम स्कूल को लेकर उठाए जा रहे सवाल

मंगरौरा विकास खंड के प्राथमिक विद्यालय सरसीखाम का उदाहरण देते हुए शिक्षकों और विभागीय सूत्रों की ओर से दावा किया जा रहा है कि स्कूल भवन की हालत बेहद खराब है। आरोप है कि भवन की दीवारों में चौड़ी दरारें हैं और बारिश के दौरान छत से पानी टपकता है। शिक्षकों का कहना है कि ऐसी स्थिति में बच्चों को कक्षाओं में बैठाना जोखिम भरा महसूस होता है। उनका दावा है कि स्कूल भवन की खराब स्थिति को लेकर कई बार शिकायत भी की गई, लेकिन इसके बावजूद इसे नए भवन की सूची में शामिल नहीं किया गया।

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चार-पांच साल पुराने भवनों को लेकर भी सवाल

नए भवनों की सूची को लेकर सवाल सिर्फ एक स्कूल तक सीमित नहीं हैं। आरोप है कि मंगरौरा विकास खंड के नराहरपुर, सराय सागर, कोहंडौर और कंसापट्टी जैसे विद्यालयों को भी नवीन भवन निर्माण की सूची में शामिल किया गया है। शिक्षकों और विभागीय सूत्रों का दावा है कि इन स्कूलों की इमारतें करीब चार-पांच साल पहले ही बनी हैं और फिलहाल सुरक्षित स्थिति में हैं। ऐसे में उनका सवाल है कि जब जिले में सैकड़ों विद्यालयों की इमारतें जर्जर हैं, तो नई इमारतों के चयन में प्राथमिकता किस आधार पर तय की गई।

बारिश में छुट्टी कराने का मौखिक निर्देश?

जर्जर स्कूल भवनों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर शिक्षकों की चिंता बारिश के दौरान और बढ़ गई है। शिक्षकों का दावा है कि उन्होंने विभागीय अधिकारियों से सुरक्षा को लेकर शिकायत की तो उन्हें मौखिक तौर पर बारिश होने पर बच्चों की छुट्टी करने की बात कही गई। शिक्षकों का कहना है कि इस संबंध में उन्हें कोई लिखित आदेश नहीं दिया गया। ऐसे में यदि किसी जर्जर भवन में हादसा होता है तो जिम्मेदारी को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

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475 नए भवनों और अतिरिक्त कक्षों को मिली मंजूरी

सर्वे के बाद जिले में नए निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 440 प्राथमिक और 35 उच्च प्राथमिक विद्यालय भवनों, यानी कुल 475 नए विद्यालय भवनों, के निर्माण को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा 15 अतिरिक्त कक्षा-कक्षों के निर्माण को भी स्वीकृति मिली है।

जांच रिपोर्ट के आधार पर होगा फैसला

जिले के जिम्मेदार अधिकारी के मुताबिक जर्जर स्कूल भवनों का सर्वे कराया गया है और इसकी सूची टेक्निकल टीम को सौंप दी गई है। अधिकारी ने बताया कि टेक्निकल टीम की जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित विद्यालय भवन की मरम्मत कराई जाएगी या वहां नया भवन उपलब्ध कराया जाएगा।

Location :  Pratapgarh

Published :  25 September 2026, 4:40 PM IST

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