प्रेम, शादी या नौकरी… आखिर किस बहाने गायब हो रही हैं बिहार की बेटियां? सामने आया चौंकाने वाला सच

बिहार के ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में सक्रिय तीन-स्तरीय मानव तस्करी नेटवर्क गरीब और दलित परिवारों की किशोरियों को निशाना बना रहा है। नौकरी, प्रेम और शादी का झांसा देकर लड़कियों को हैदराबाद, सिकंदराबाद और कोलकाता जैसे शहरों में ले जाकर जबरन शादी, बंधुआ मजदूरी और शोषण का शिकार बनाया जा रहा है। हालिया आंकड़े बिहार को देश के प्रमुख मानव तस्करी स्रोत राज्यों में शामिल होने की गंभीर तस्वीर पेश करते हैं।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 11 June 2026, 12:06 PM IST
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Patna: बिहार के ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में गरीब एवं दलित परिवारों की किशोरियां एक सुनियोजित मानव तस्करी नेटवर्क के निशाने पर हैं। यह नेटवर्क गांवों से लड़कियों को प्रेम, शादी और नौकरी का झांसा देकर बड़े शहरों तक पहुंचाता है, जहां उन्हें बंधुआ मजदूरी, जबरन विवाह और शोषण जैसी अमानवीय परिस्थितियों में धकेल दिया जाता है। हालिया आंकड़े बताते हैं कि बिहार देश के प्रमुख "सोर्स स्टेट" के रूप में उभर रहा है।

लापता बच्चों के आंकड़े बढ़ा रहे चिंता

राज्य में हर साल औसतन 12 हजार से 14 हजार बच्चे लापता हो रहे हैं। वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 14,699 तक पहुंच गई। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि गायब होने वाले बच्चों में लगभग 60 प्रतिशत 18 वर्ष से कम उम्र की लड़कियां हैं। वर्ष 2023 में 12,299 लापता बच्चों में करीब 75 प्रतिशत लड़कियां थीं।

पुलिस और सामाजिक संगठनों की संयुक्त कार्रवाई में 2024-25 के दौरान 1,970 तथा 2025-26 में 1,492 लड़कियों को सुरक्षित बचाया गया।

कैसे काम करता है 3-लेवल तस्करी नेटवर्क

मानव तस्करी का यह सिंडिकेट तीन स्तरों पर संचालित होता है। पहले स्तर पर स्थानीय एजेंट गांवों में दोस्ती, प्रेम, शादी या नौकरी का लालच देकर लड़कियों को परिवार से दूर ले जाते हैं। दूसरे स्तर पर ट्रांजिट एजेंट रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड के जरिए उन्हें दूसरे राज्यों में पहुंचाते हैं। कई मामलों में नशा देकर या धमकी देकर लड़कियों को नियंत्रित किया जाता है। तीसरे और सबसे खतरनाक स्तर पर महानगरों में सक्रिय गिरोह लड़कियों को कैद रखकर उनकी खरीद-फरोख्त करते हैं।

हालिया मामलों ने खोली नेटवर्क की परतें

हाल के महीनों में साहेबगंज, कोचस, मोतिहारी, गोपालगंज और सीवान की कई युवतियों को हैदराबाद, सिकंदराबाद और कोलकाता जैसे शहरों से मुक्त कराया गया। अधिकांश मामलों में उन्हें नौकरी या शादी का झांसा देकर ले जाया गया था। बाद में उनसे लंबे समय तक काम कराया गया और जबरन विवाह की तैयारी की जा रही थी।

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पुलिस की सख्ती और निगरानी

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कमजोर वर्ग अपराध अनुसंधान विभाग की एडीजी सुहिता अनुपम ने बताया कि मानव तस्करी के हॉटस्पॉट क्षेत्रों की पहचान कर विशेष निगरानी की जा रही है। संदिग्ध गांवों को चिह्नित किया जा रहा है तथा मुख्यालय स्तर पर ऑनलाइन मॉनिटरिंग व्यवस्था लागू की गई है। पुलिस इस अभियान में सामाजिक संगठनों और एनजीओ की भी मदद ले रही है।

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समाज की जागरूकता भी जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल पुलिस कार्रवाई से इस अपराध पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जा सकती। परिवारों और समाज को भी सतर्क रहने की आवश्यकता है। नौकरी, शादी और बेहतर जीवन के नाम पर मिलने वाले संदिग्ध प्रस्तावों की जांच करना और समय पर पुलिस को सूचना देना मानव तस्करी रोकने में अहम भूमिका निभा सकता है।

Location :  Patna

Published :  11 June 2026, 12:04 PM IST

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