900 से ज्यादा तारीखें, 72 गवाह और 5 साल का इंतजार… औरैया डबल मर्डर केस में कमलेश पाठक समेत 10 दोषी

औरैया के बहुचर्चित मंजुल चौबे-सुधा चौबे डबल मर्डर केस में कोर्ट ने बुधवार को पूर्व सपा विधायक/एमएलसी कमलेश पाठक समेत 10 आरोपियों को हत्या का दोषी करार दिया है। एक आरोपी नाबालिग होने के कारण जुबेनाइल कोर्ट में है। करीब छह साल पुराने इस मामले में 900 से अधिक तारीखें पड़ीं और अभियोजन व बचाव पक्ष की ओर से कुल 72 गवाह पेश किए गए। अदालत लंच के बाद दोषियों की सजा का ऐलान करेगी।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 19 August 2026, 1:24 PM IST
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Auraiya: औरैया के बहुचर्चित डबल मर्डर केस में करीब छह साल से चल रही कानूनी लड़ाई अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। बुधवार को एमपी-एमएलए कोर्ट ने वकील मंजुल चौबे और उनकी चचेरी बहन सुधा चौबे की हत्या के मामले में पूर्व सपा नेता कमलेश पाठक समेत 10 आरोपियों को दोषी करार दिया। अदालत के फैसले के बाद कोर्ट परिसर में हलचल बढ़ गई और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। अब लंच के बाद अदालत यह तय करेगी कि दोषी पाए गए आरोपियों को कितनी सजा दी जाएगी।

इस मामले में कुल 11 आरोपी बनाए गए थे। इनमें से एक आरोपी नाबालिग होने के कारण जुबेनाइल कोर्ट में है। वहीं गनर अवनीश प्रताप सिंह को गैंगस्टर मामले में राहत मिल चुकी है, लेकिन डबल मर्डर केस में उसके खिलाफ सुनवाई जारी रही।

एक बीघा जमीन ने बदल दी कहानी

इस पूरे मामले की जड़ औरैया के पंचमुखी हनुमान मंदिर के पास स्थित करीब एक बीघा जमीन का विवाद है। इसी जमीन को लेकर वकील मंजुल चौबे और उनकी चचेरी बहन सुधा चौबे की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। कभी कमलेश पाठक और मंजुल चौबे के बीच बेहद गहरी दोस्ती थी। मंजुल को कमलेश पाठक का बेहद करीबी माना जाता था। यहां तक कहा जाता था कि मंजुल उनकी परछाई की तरह रहते थे। लेकिन समय के साथ दोनों के रिश्ते में दरार आई और यही दोस्ती आगे चलकर वर्चस्व की लड़ाई में बदल गई।

15 जनवरी 2020 को गोलियों से गूंज उठा इलाका

15 जनवरी 2020 को कमलेश पाठक कथित तौर पर इसी विवादित जमीन पर कुर्सी डालकर बैठे थे। इसी दौरान मंजुल के पिता वहां पहुंचे और दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। विवाद बढ़ा तो दोनों परिवारों के लोग मौके पर पहुंच गए। कमलेश पाठक के भाई संतोष पाठक और उनके गनर के भी वहां पहुंचने की बात सामने आई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि फायरिंग शुरू हो गई। फायरिंग में मंजुल चौबे और उनकी चचेरी बहन सुधा चौबे को गोली लगी। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।

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कभी कमलेश और मंजुल थे बेहद करीबी

इस हत्याकांड की कहानी इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि कमलेश पाठक और मंजुल चौबे कभी बेहद करीबी दोस्त हुआ करते थे। जब मंजुल चौबे तिलक महाविद्यालय से छात्र संघ अध्यक्ष चुने गए थे, तब कमलेश पाठक उनके प्रमुख समर्थकों में शामिल थे। स्थानीय लोगों के मुताबिक, उस दौर में मंजुल की राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों में कमलेश पाठक का बड़ा सहयोग था। दोनों का उठना-बैठना साथ था और मंजुल को कमलेश का करीबी माना जाता था। लेकिन 2006 के नगर पालिका चुनाव के दौरान दोनों के रिश्तों में दरार पड़ गई। मंजुल चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन उन्हें कमलेश पाठक का समर्थन नहीं मिला। इसके बाद दोनों के रास्ते अलग होते चले गए।

जिस घर को बनवाया, उसी परिवार से हो गई दुश्मनी

पंचमुखी हनुमान मंदिर के पास जिस जमीन को लेकर विवाद हुआ, वहां से कमलेश और मंजुल के घरों की दूरी भी ज्यादा नहीं थी। स्थानीय लोगों के अनुसार, मंजुल का घर कमलेश पाठक ने ही बनवाया था। बताया जाता है कि दोनों कभी इसी जमीन पर बैठकर साथ चौपाल लगाया करते थे। लेकिन रिश्तों में खटास बढ़ने के बाद यही जमीन दोनों पक्षों के बीच विवाद का बड़ा केंद्र बन गई।

900 से ज्यादा तारीखें, 72 गवाह

यह मामला सिर्फ घटना की वजह से ही चर्चित नहीं रहा, बल्कि इसकी लंबी कानूनी प्रक्रिया भी लगातार चर्चा में रही। औरैया की एमपी-एमएलए कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान अब तक 900 से ज्यादा तारीखें पड़ चुकी हैं। करीब छह साल की सुनवाई में अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से कुल 72 गवाह पेश किए गए। अभियोजन पक्ष ने 33 गवाह पेश किए, जबकि बचाव पक्ष की ओर से 39 गवाह अदालत के सामने आए।

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11 लोगों पर दर्ज हुआ था केस

डबल मर्डर के बाद पुलिस ने पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक, उनके भाई पूर्व ब्लॉक प्रमुख संतोष पाठक, रामू पाठक, कार चालक, गनर समेत कुल 11 लोगों के खिलाफ हत्या की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। बाद में पुलिस ने मामले की जांच पूरी कर चार्जशीट अदालत में दाखिल की। 11 जुलाई 2020 को मामले में 10 आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई थी। एक आरोपी के नाबालिग होने के कारण उसकी सुनवाई जुबेनाइल कोर्ट में चल रही है।

करोड़ों की संपत्ति भी हो चुकी है जब्त

डबल मर्डर के बाद प्रशासन ने आरोपियों की संपत्तियों पर भी कार्रवाई की थी। प्रशासन के मुताबिक, कमलेश पाठक की करीब 36.15 करोड़ रुपये, संतोष पाठक की करीब 9.75 करोड़ रुपये और रामू पाठक की करीब 7.51 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई। इस कार्रवाई के बाद भी मामला अदालत में चलता रहा और करीब छह साल बाद अब कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए 10 आरोपियों को हत्या का दोषी करार दिया है।

कौन-कौन दोषी करार दिए गए?

इस मामले में पूर्व मंत्री/एमएलसी कमलेश पाठक, पूर्व ब्लॉक प्रमुख संतोष पाठक, रामू पाठक, कुलदीप अवस्थी, विकल्प अवस्थी, राजेश शुक्ल, शिवम अवस्थी, आशीष दुबे, रविन्द्र चौबे उर्फ लल्ला और गनर अवनीश प्रताप सिंह आरोपी बनाए गए थे। अदालत ने बुधवार को इन 10 आरोपियों को हत्या के मामले में दोषी करार दिया। एक अन्य आरोपी नाबालिग होने के कारण जुबेनाइल कोर्ट में है।

Location :  Auraiya

Published :  19 August 2026, 1:24 PM IST

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