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गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने पूर्व जिलाधिकारी और IAS अधिकारी राजेंद्र कुमार पटेल को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी रिश्वत और धन शोधन से जुड़े मामले में हुई है। जांच में जिलाधिकारी कार्यालय में संगठित भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के सबूत सामने आए हैं।
IAS अधिकारी पर ईडी की कार्रवाई
Gandhinagar: गुजरात में भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। सुरेंद्रनगर जिले के पूर्व जिलाधिकारी और वरिष्ठ IAS अधिकारी राजेंद्र कुमार पटेल को घूस से जुड़े धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले में ईडी ने गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई एक व्यापक जांच का हिस्सा बताई जा रही है, जिसमें सरकारी दफ्तरों में संगठित भ्रष्टाचार के संकेत मिले हैं।
इस मामले की शुरुआत तब हुई जब सुरेंद्रनगर जिलाधिकारी कार्यालय में तैनात उप राजस्व अधिकारी चंद्रसिंह मोरी को रिश्वतखोरी के आरोप में गिरफ्तार किया गया। 23 दिसंबर को मोरी के आवास पर ईडी की छापेमारी के दौरान 67.5 लाख रुपये नकद बरामद किए गए थे। जांच एजेंसी का दावा है कि पूछताछ के दौरान मोरी ने रिश्वत लेने की बात स्वीकार की, जिसके बाद मामले की कड़ियां जिलाधिकारी कार्यालय तक जुड़ती चली गईं।
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गौरतलब है कि राजेंद्र कुमार पटेल का एक सप्ताह पहले ही सुरेंद्रनगर से तबादला कर दिया गया था। हालांकि, तबादले के बावजूद ईडी की जांच जारी रही और सबूत सामने आने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। अधिकारियों के अनुसार, पटेल की भूमिका केवल प्रशासनिक लापरवाही तक सीमित नहीं थी, बल्कि कथित तौर पर वह अवैध वसूली की प्रणाली से जुड़े हुए थे।
ईडी की प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि सुरेंद्रनगर जिलाधिकारी कार्यालय में कुछ लोक सेवक मिलकर योजनाबद्ध तरीके से रिश्वत और अवैध वसूली कर रहे थे। इस प्रक्रिया के जरिए बड़ी मात्रा में आपराधिक आय अर्जित की गई, जिसे विभिन्न माध्यमों से छिपाने और इस्तेमाल करने की कोशिश की गई। इसी संदर्भ में धन शोधन अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है।
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प्रवर्तन निदेशालय ने संकेत दिए हैं कि यह मामला अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। जांच एजेंसी वित्तीय लेन-देन, संपत्तियों और बैंक खातों की गहन पड़ताल कर रही है। इस कार्रवाई को गुजरात में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। IAS अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद राज्य के प्रशासनिक तंत्र में गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।