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31 मिनट का लंच किया तो शाम को जबरन रोकेगी कंपनी! (फोटो सोर्स- Pinterest)
New Delhi: इन दिनों सोशल मीडिया पर एक कथित ऑफिस का अजीबोगरीब और हैरान कर देने वाला नोटिस खूब वायरल हो रहा है। इसे देखकर नौकरीपेशा लोग न सिर्फ हैरत में हैं, बल्कि उनका गुस्सा भी सातवें आसमान पर पहुंच गया है।
वायरल हो रहे इस कथित नोटिस में साफ शब्दों में लिखा है कि अगर किसी एम्प्लॉई (कर्मचारी) ने अपने लंच ब्रेक में सिर्फ 1 मिनट की भी देरी की, तो उसे सजा के तौर पर दफ्तर में 1 घंटे अतिरिक्त ड्यूटी करनी होगी। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि इस जबरन कराए जाने वाले ओवर टाइम का कर्मचारी को कोई अतिरिक्त पैसा भी नहीं दिया जाएगा।
कथित तौर पर इस ऑफिस के अजीबोगरीब नियम के मुताबिक, कर्मचारियों के लिए दोपहर के भोजन (लंच) के लिए सिर्फ 30 मिनट का समय निर्धारित (30 Minute Lunch Limit) किया गया है। अगर कोई भी कर्मचारी इस निर्धारित समय से एक मिनट भी ऊपर लेता है, यानी उसने 31 मिनट का समय ले लिया, तो उसे शाम 6 बजे अपने तय समय पर घर जाने की अनुमति नहीं होगी।
उसे शाम 6 बजे के बाद कंपनी को 60 मिनट का 'फोकस टाइम' देना होगा, जिसके लिए कोई अतिरिक्त भुगतान (60 Minutes Unpaid Focus Time) नहीं किया जाएगा। इस तानाशाही भरे नोटिस के आखिर में बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा है ‘जल्दी खाओ’ (Eat Faster)।
इस अजीब नियम को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर एक बड़ी बहस छिड़ गई है। 22 जून को शेयर की गई इस पोस्ट को अब तक लाखों बार देखा जा चुका है और इस पर नेटिजन्स दो स्पष्ट गुटों में बंट गए हैं।
If your management writes policies like this, don't be surprised when your best employees write resignation emails. pic.twitter.com/3v5jZGA3XS
— Nalini Unagar (@NalinisKitchen) June 22, 2026
नौकरीपेशा और आम यूजर्स का एक बड़ा धड़ा इसे कॉरपोरेट जगत में 'माइक्रोमैनेजमेंट' का सबसे घटिया और क्रूर उदाहरण बता रहा है। लोगों का साफ कहना है कि 1 मिनट की मानवीय देरी के बदले 1 घंटे का बिना पैसों का काम कराना पूरी तरह से गलत, अनैतिक और श्रम कानूनों के खिलाफ है।
इस पोस्ट पर कमेंट करते हुए एक यूजर ने तीखा तंज कसा और लिखा, "अगर कंपनी का ऐसा नियम है तो फिर कर्मचारियों को भी हर एक एक्स्ट्रा मिनट का हिसाब रखना चाहिए। अगर किसी ने अपने तय समय से एक मिनट भी देर तक काम किया, तो कंपनी को उसे पूरे 1 घंटे का ओवरटाइम भुगतान करना चाहिए।"
वहीं, एक अन्य यूजर ने कंपनी को चेतावनी देते हुए लिखा कि कर्मचारियों के साथ किया जाने वाला ऐसा मानसिक और अमानवीय बर्ताव अंततः कंपनी के काम के माहौल और उसकी उत्पादकता (Productivity) को ही भारी नुकसान पहुंचाएगा।
दूसरी तरफ, कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इस सख्त नियम के पीछे कंपनी और नियोक्ताओं (Employers) की मजबूरी को सही ठहरा रहे हैं। उनका तर्क है कि जब कंपनी पूरी तनख्वाह समय पर देती है, तो काम भी तय समय और अनुशासन के हिसाब से होना चाहिए। आज के इस कठिन कॉम्पिटिशन के दौर में नौकरी जाने से तो यह नियम बेहतर ही है।
इसी क्रम में एक बिजनेसमैन ने अपनी भड़ास निकालते हुए लिखा, "जब आप खुद का बिजनेस चलाते हैं और देखते हैं कि कर्मचारी लंच और ब्रेक के नाम पर घंटों समय बर्बाद कर रहे हैं, तो बहुत दुख होता है। भारत में बिजनेस चलाना उतना आसान नहीं है, जितना ट्विटर पर बैठकर मुफ्त का ज्ञान देना।"
Location : New Delhi
Published : 23 June 2026, 3:03 PM IST