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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मेला स्थल छोड़कर काशी की ओर यात्रा शुरू कर दी है। उन्होंने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सुविधाएं देकर उन्हें शांत करने की कोशिश की गई। मौनी अमावस्या की घटना से उनकी आत्मा आहत हुई और लोभ-लालच देकर उनकी “टेक” खत्म करने का प्रयास हुआ।
Prayagraj: धार्मिक और आध्यात्मिक हलकों में चर्चा का विषय बने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मेला स्थल को छोड़ते हुए काशी की ओर अपनी यात्रा शुरू कर दी है। इस दौरान उन्होंने प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाए, जिससे पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। स्वामी के इस फैसले के बाद मेला क्षेत्र और संत समाज में हलचल तेज हो गई है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि मौनी अमावस्या के दिन घटी घटना ने उनकी आत्मा को गहरी चोट पहुंचाई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि आस्था और संत समाज की भावनाओं से जुड़ा गंभीर विषय है। स्वामी का कहना है कि इस घटना के बाद उनका मन मेला स्थल पर टिकने का नहीं रहा।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने सुविधाएं उपलब्ध कराकर उन्हें शांत करने की कोशिश की। स्वामी के अनुसार, लोभ और लालच के जरिए उनकी “टेक” यानी उनके सिद्धांतों को कमजोर करने का प्रयास किया गया, जिसे उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि संत समाज किसी भी प्रकार के समझौते या दबाव में आकर अपने मूल्यों से पीछे नहीं हट सकता।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने यह भी कहा कि उनका यह कदम किसी के खिलाफ व्यक्तिगत नहीं है, बल्कि आत्मसम्मान और आस्था की रक्षा के लिए है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे काशी जाकर अपने अगले कदम पर विचार करेंगे और जरूरत पड़ी तो इस मुद्दे को और व्यापक स्तर पर उठाएंगे।