हिंदी
उत्तराखंड में आसमानी आफत (Img- Pinterest)
Rudraprayag: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश अब आम जनजीवन और श्रद्धालुओं के लिए बड़ी आफत बन चुकी है। रुद्रप्रयाग जिले में स्थित भगवान शिव और माता पार्वती के पावन विवाह स्थल के रूप में विश्व प्रसिद्ध त्रियुगीनारायण मंदिर को जोड़ने वाला सोनप्रयाग-त्रियुगीनारायण मोटर मार्ग भूस्खलन की चपेट में है।
इस मार्ग पर जगह-जगह विशालकाय बोल्डर और भारी मात्रा में मलबा आने से यातायात बार-बार ठप हो रहा है। इसका सीधा असर न केवल स्थानीय लोगों पर, बल्कि देश-विदेश से त्रियुगीनारायण पहुंचने वाले श्रद्धालुओं और वहां तय विवाह समारोहों में शामिल होने वाले लोगों पर भी पड़ रहा है।
रविवार देर रात हुई भीषण बारिश के बाद बड़ा सांगू क्षेत्र में पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर भरभराकर मुख्य सड़क पर आ गिरे, जिससे यह महत्वपूर्ण मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया। सड़क अचानक बंद होने के कारण राहगीरों और यात्रियों को मीलों तक का सफर जान जोखिम में डालकर पैदल ही तय करना पड़ा।
इस प्राकृतिक आपदा के कारण सबसे ज्यादा परेशानी गुजरात और महाराष्ट्र से आए उन श्रद्धालुओं को उठानी पड़ रही है, जिनका त्रियुगीनारायण मंदिर में पवित्र विवाह समारोह पहले से निर्धारित था। रास्ते में मलबा आने के कारण दूल्हा-दुल्हन समेत पूरा प्रशासनिक और पारिवारिक अमला बीच रास्ते में ही फंस कर रह गया।
हरियाणा से उत्तराखंड ले जाई जा रही अवैध शराब के साथ तस्कर गिरफ्तार
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता महेंद्र के अनुसार, बरसात के इस मौसम में इस मार्ग पर लगातार भूस्खलन हो रहा है, जिसका मुख्य कारण संबंधित विभाग की घोर लापरवाही है। विभाग द्वारा पहाड़ी रास्तों पर जल निकासी (ड्रेनेज सिस्टम) की कोई समुचित व्यवस्था नहीं की गई है, जिसके चलते बरसाती गधेरों (पहाड़ी नालों) का उफनता हुआ पानी और कीचड़ सीधे मुख्य सड़क पर बह रहा है।
पानी के इस तेज बहाव के कारण कमजोर हो चुकी चट्टानें लगातार खिसक रही हैं और विशालकाय बोल्डर सड़क पर फैल रहे हैं, जो कभी भी किसी बड़ी दुर्घटना का सबब बन सकते हैं।
दूसरी तरफ, चमोली जिले की पिंडरघाटी में भी मूसलाधार बारिश ने भयंकर तबाही मचाई है। नारायणबगड़, थराली और देवाल ब्लॉकों में कई प्रमुख मोटर मार्ग मलबा आने से पूरी तरह पैक हो गए हैं। देवाल ब्लॉक में देवाल-खेता मानमती समेत कई संपर्क मार्ग बंद होने से 50 से अधिक गाड़ियां और उसमें सवार मुसाफिर बीच रास्ते में भूखे-प्यासे फंसे हुए हैं।
वहीं थराली-डुंग्री मोटर मार्ग को करीब 12 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद जैसे-तैसे खोला जा सका। इस मार्ग के बंद रहने से सोल घाटी के 16 गांवों की करीब 10 हजार की आबादी पूरी दुनिया से कट गई है। कई जगहों पर लाचार चालकों और स्थानीय लोगों ने खुद ही फावड़े उठाकर सड़कों से मलबा हटाने का प्रयास किया।
उत्तराखंड में कुदरत का कहर: पिथौरागढ़ में भारी बारिश से चीन सीमा का संपर्क टूटा, कई पर्यटक फंसे
सड़कों पर मलबे के इस साम्राज्य को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड पर है। पीएमजीएसवाई (PMGSY) के अधिशासी अभियंता पवन कुमार ने बताया कि इस महत्वपूर्ण मार्ग को सुचारू रखने के लिए भारी मशीनें और जेसीबी (JCB) मौके के पास ही तैनात की गई हैं।
उन्होंने आश्वासन दिया कि जैसे ही पहाड़ी से पत्थरों का गिरना बंद होता है, कर्मचारी जान जोखिम में डालकर तुरंत मलबा हटाने का कार्य शुरू कर देते हैं। प्रशासन का दावा है कि सभी बंद पड़े मुख्य मार्गों को यातायात के लिए शीघ्र बहाल कर दिया जाएगा, ताकि फंसे हुए लोगों और शादियों के लिए जा रहे जोड़ों को सुरक्षित निकाला जा सके।
Location : Rudraprayag
Published : 7 July 2026, 3:38 PM IST