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हरिद्वार शांतिकुंज में अखिल विश्व गायत्री परिवार के शताब्दी वर्ष का भव्य आयोजन 21-23 जनवरी तक। 100 साल की त्रिवेणी, 3200 पुस्तकों का मेला, साधना और सामाजिक जागरण मुख्य आकर्षण।
शांतिकुंज में गायत्री परिवार का शताब्दी उत्सव (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
Haridwar: हरिद्वार स्थित शांतिकुंज में 14 से 24 जनवरी तक अखिल विश्व गायत्री परिवार के शताब्दी वर्ष के अंतर्गत भव्य आयोजन होने जा रहे हैं। मुख्य कार्यक्रम 21 से 23 जनवरी तक आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन का उद्देश्य गायत्री परिवार की 100 वर्षों की कल्याण और सौभाग्य की त्रिवेणी को मनाना है।
गायत्री परिवार के शताब्दी वर्ष के इस उपलक्ष्य में तीन प्रमुख घटनाओं के 100 वर्ष पूरे हो रहे हैं। पहला, गायत्री तीर्थ में प्रज्वलित अखंड दीपक को 100 वर्ष पूरे हो रहे हैं। यह दीपक सदैव ज्योति के प्रतीक के रूप में स्थायी रूप से जलता आ रहा है। दूसरा, परिवार की संस्थापिका और संचालिका माता भगवती देवी शर्मा का यह जन्म शताब्दी वर्ष है। तीसरा, गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य की तप साधना की शुरुआत के 100 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं।
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इस अवसर पर देश-विदेश से हजारों कार्यकर्ता, साधक और आमजन शांतिकुंज में एकत्रित होंगे। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युग-निर्माण, मानवीय मूल्यों का जागरण और आध्यात्मिक चेतना का विस्तार है।
अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रभारी और देव संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ चिन्मय पंड्या ने बताया कि 21 जनवरी को प्रातःकालीन सत्र के साथ कार्यक्रमों की शुरुआत होगी। पहले दिन विचार-प्रेरक सत्र, मार्गदर्शन उद्बोधन और संगठनात्मक बैठकें आयोजित की जाएंगी। वरिष्ठ मार्गदर्शक युग-निर्माण की अवधारणा, सामाजिक पुनर्निर्माण और व्यक्ति निर्माण पर विस्तार से चर्चा करेंगे। इसके साथ ही साधना, जप और सामूहिक उपासना के कार्यक्रम भी होंगे।
22 जनवरी को कार्यक्रम का दूसरा दिन विशेष रूप से प्रशिक्षण और सहभागिता को समर्पित रहेगा। इस दिन विभिन्न विषयों पर कार्यशालाएं, संवाद सत्र और अनुभव साझा करने के कार्यक्रम होंगे। यह दिन प्रतिभागियों को संगठनात्मक ज्ञान, जीवन मूल्यों और आध्यात्मिक साधना के तरीकों से जोड़ने का अवसर देगा।
शांतिकुंज की खास बात (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
तीसरे दिन, 23 जनवरी को सामूहिक संकल्प, भविष्य की कार्ययोजना और शताब्दी वर्ष के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया जाएगा। मार्गदर्शक प्रेरक उद्बोधन देंगे और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए व्यक्तिगत जिम्मेदारी पर जोर देंगे। इस दिन का समापन सामूहिक यज्ञ और प्रार्थना के साथ होगा, जिससे आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार पूरे वातावरण में होगा।
कार्यक्रम के दौरान पुस्तक मेला भी आयोजित किया जाएगा, जो मुख्य आकर्षणों में से एक होगा। इसमें पहली बार शताब्दी पुरुष की 3200 पुस्तकें एक साथ प्रदर्शित की जाएंगी। इसके अलावा विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक झांकियां और प्रदर्शन भी आयोजन का हिस्सा होंगी, जिससे समृद्ध भारतीय संस्कृति और परंपराओं का परिचय मिलेगा।
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गायत्री परिवार के आयोजकों का मानना है कि यह शताब्दी वर्ष केवल एक उत्सव नहीं है, बल्कि समाज में आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और नैतिक चेतना के विस्तार का अवसर भी है। कार्यक्रम के माध्यम से युवा और आमजन अपने जीवन में मूल्य आधारित बदलाव और सामाजिक जिम्मेदारी को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।
इस प्रकार, हरिद्वार में 14 से 24 जनवरी तक चलने वाले इस भव्य आयोजन में 21 से 23 जनवरी तक का मुख्य सत्र लाखों लोगों के लिए संदेश, प्रेरणा और आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम बनेगा। यह आयोजन गायत्री परिवार के सौभाग्य, कल्याण और आध्यात्मिक जागरूकता की 100 साल की यात्रा को यादगार बनाएगा।