हरिद्वार में संत के बयान से मचा विवाद, चार धाम की मर्यादा को लेकर छिड़ी बहस, जानें पूरा मामला

हरिद्वार में एक कार्यक्रम के दौरान संत हरि चेतनानंद द्वारा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को "पांचवां धाम" कहे जाने के बाद संत समाज में विवाद खड़ा हो गया है। कई संतों ने इसे सनातन परंपरा और चार धाम की मर्यादा से जोड़ते हुए बयान पर आपत्ति जताई और स्पष्टीकरण की मांग की है।

Updated : 14 March 2026, 12:19 PM IST
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Haridwar: देवभूमि हरिद्वार से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने संत समाज में बहस और विवाद को जन्म दे दिया है। एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान संत हरि चेतनानंद द्वारा उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को "पांचवां धाम" बताए जाने के बाद कई संत-महात्माओं ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। संत समाज का एक वर्ग इस बयान को सनातन परंपरा और चार धाम की मर्यादा के खिलाफ बता रहा है, जबकि कुछ लोग इसे मंचीय उत्साह में दिया गया बयान मान रहे हैं।

इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा का विषय बन गया है और संत समाज के बीच मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं।

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ग्राम चौपाल कार्यक्रम में दिया गया बयान

जानकारी के अनुसार, यह बयान हाल ही में आयोजित एक ग्राम चौपाल कार्यक्रम के दौरान दिया गया। यह कार्यक्रम पूर्व विधायक स्वामी यतीश्वरानंद द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमें उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद थे। कार्यक्रम के दौरान संत हरि चेतनानंद मंच से संबोधन दे रहे थे। इसी बीच उन्होंने मुख्यमंत्री की प्रशंसा करते हुए उन्हें "पांचवां धाम" कह दिया।

कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इस बयान को उस समय सामान्य तौर पर लिया, लेकिन जब इसका वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया तो इस पर विवाद शुरू हो गया।

चार धाम की मर्यादा से जोड़कर उठे सवाल

बयान सामने आने के बाद कई संत-महात्माओं ने इसे सनातन धर्म की परंपरा से जोड़कर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि हिंदू धर्म में चार धाम- बद्रीनाथ धाम, केदारनाथ धाम, गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम- आस्था के सबसे बड़े केंद्र माने जाते हैं।

संतों का कहना है कि इन पवित्र धामों की अपनी धार्मिक और आध्यात्मिक महत्ता है, इसलिए किसी भी व्यक्ति या राजनेता की तुलना उनसे करना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, इस तरह के बयान से धार्मिक आस्था को ठेस पहुंच सकती है और लोगों में भ्रम की स्थिति भी पैदा हो सकती है।

संत समाज ने मांगा स्पष्टीकरण

विवाद बढ़ने के बाद संत समाज के कई महात्माओं ने इस बयान पर नाराजगी जताई है। कुछ संतों ने बाबा हरि चेतनानंद से इस मामले में सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण देने की मांग भी की है।

संतों का कहना है कि धार्मिक मंचों से दिए जाने वाले बयानों में मर्यादा और परंपरा का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। उनका मानना है कि ऐसे बयान संत समाज की गरिमा को भी प्रभावित करते हैं और समाज में अनावश्यक विवाद को जन्म देते हैं।

बाबा हठयोगी ने जताई नाराजगी

इस पूरे मामले पर संत बाबा हठयोगी ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि पहले भी “पांचवें धाम” को लेकर चर्चा सामने आ चुकी है। उस समय दिल्ली में हुई चर्चा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद बैठक कर स्पष्ट किया था कि चारों धाम का कोई विकल्प नहीं हो सकता।

बाबा हठयोगी ने कहा कि सनातन धर्म में चार धाम की अपनी अलग पहचान और महत्ता है। ऐसे में किसी भी संत द्वारा चाटुकारिता में इस तरह के शब्दों का प्रयोग करना उचित नहीं है। उनके अनुसार, यह सनातन आस्था और धार्मिक परंपराओं का अपमान माना जा सकता है।

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फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर संत समाज में बहस तेज हो गई है। कुछ लोग इसे केवल एक मंचीय बयान मान रहे हैं, जबकि कई संत इसे धार्मिक परंपरा से जुड़ा गंभीर विषय बता रहे हैं।

Location :  Haridwar

Published :  14 March 2026, 12:19 PM IST

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