शिवरात्रि के दिन मां के साथ मंदिर से लौट रहा सात साल का मासूम घर के सामने ही हादसे का शिकार हुआ। गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज से पहले ही बड़ा फैसला लिया गया। 50 किमी दूर जाते समय जो हुआ, उसने सबको झकझोर दिया।

हादसे के बाद लोगों में आक्रोश (Img- Internet)
Chamoli: पहाड़ों में आए दिन सड़क हादसे हो रहे हैं, ऊपर से हालत यह है कि अस्पतालों में घायलों के इलाज की व्यवस्था नहीं है। राज्य के सीमांत चमोली जिले के अंतर्गत शिवरात्रि (रविवार) 15 फरवरी को एक ऐसी घटना हुई जिससे लोग बेहद दुखी हैं।
जब फरसों गांव का 7 वर्षीय बच्चा अपनी मां और छोटी बहन के साथ धुनारघाट शिवालय से दर्शन कर लौट रहा था, तो घर के ठीक सामने सड़क पार करते वक्त मेहलचोरी से आ रही एक वैगनआर कार ने बच्चे को जोरदार टक्कर मारी। बच्चा कुछ दूरी तक टायर के साथ घसीटता चला गया, जिससे उसके सिर में गंभीर फ्रैक्चर हो गया।
संवेदनहीनता की स्थिति यह है कि जिस अस्पताल में बच्चे को भर्ती किया गया उसने गंभीर रूप से घायल बच्चे को बिना किसी मेडिकल स्टाफ के सिर्फ एंबुलेंस चालक के भरोसे 50 किमी दूर रेफर कर दिया, जिससे रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया।
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स्थानीय लोगों के मुताबिक अस्पताल प्रबंधन ने बच्चे की नाजुक स्थिति जानते हुए भी एंबुलेंस में किसी डॉक्टर या फार्मासिस्ट को साथ नहीं भेजा। कर्णप्रयाग तक के 50 किमी लंबे सफर में बच्चे ने एंबुलेंस में ही दम तोड़ दिया। रास्ते में पड़ने वाले मालसी स्वास्थ्य केंद्र पर भी कोई मदद नहीं मिल सकी।
सीएचसी गैरसैंण के चिकित्सा अधिकारी डॉ. अर्जुन रावत के मुताबिक 108 नहीं थी, इसलिए विभागीय एंबुलेंस से भेजा। हमारे पास फार्मासिस्ट जैसी अतिरिक्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। चमोली के सीएमओ अभिषेक गुप्ता के मुताबिक गंभीर मामलों में स्टाफ का साथ जाना अनिवार्य है। उस दिन एक फार्मासिस्ट अवकाश पर था और दूसरा अस्पताल में डिलीवरी केस में व्यस्त था, इसलिए कोई साथ नहीं जा सका।
पुलिस ने पहले अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया था, जिससे ग्रामीण और भड़क गए। अब परिजनों की शिकायत पर महिला कार चालक के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने बीएनएस की धारा 106 (लापरवाही से मौत) और 125 के तहत जांच शुरू कर दी है।