UP का रहस्यमयी मठ! जो अंदर गया, वो जिंदा वापस नहीं आया…मौत के बाद भी करना पड़ता है वहीं दफन

बलिया जिले का एक अनोखा मठ अपनी रहस्यमयी परंपरा और सदियों पुरानी मान्यताओं के चलते लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां ऐसा  कहा जाता है कि इस मठ का कोई भी मठाधीश अपने जीवनकाल में कभी इसकी तय सीमा के बाहर नहीं जाता। जिसने भी इस नियम को तोड़ने की कोशिश की उसका...

Updated : 28 May 2026, 2:41 PM IST
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New Delhi: यूपी के बलिया जिले में स्थित एक अनोखा मठ अपनी रहस्यमयी परंपरा और सदियों पुरानी मान्यताओं के चलते लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां ऐसा  कहा जाता है कि इस मठ का कोई भी मठाधीश अपने जीवनकाल में कभी इसकी तय सीमा के बाहर नहीं जाता। मान्यता है कि जिसने भी इस नियम को तोड़ने की कोशिश की, उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़े।

यह रहस्यमयी मठ बैरिया थाना क्षेत्र के रकबा टोला गांव में स्थित है, जिसे ‘मुन जी बाबा की मठिया’ के नाम से जाना जाता है। वर्तमान मठाधीश जयनारायण पांडेय के मुताबिक, वह इस परंपरा की आठवीं पीढ़ी के महंथ हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह स्थान कपिलमुनि पांडेय उर्फ मुन जी बाबा की तपोस्थली है।

कहानी के मुताबिक, बाबा भक्ति और तपस्या में इतने लीन हो गए थे कि उन्होंने अपने चारों ओर एक लक्ष्मण रेखा खींच दी और संकल्प लिया कि उसी सीमा के भीतर रहकर साधना करेंगे। माना जाता है कि उनकी कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें दर्शन दिए, लेकिन बाबा ने किसी भी वरदान को स्वीकार नहीं किया और उसी सीमा के भीतर अपने प्राण त्याग दिए। तभी से यह परंपरा शुरू हुई कि मठ का मठाधीश कभी भी उस लक्ष्मण रेखा को पार नहीं करेगा।

सीमा लांघने पर अनहोनी की कहानियां

मठ से जुड़ी कई ऐसी घटनाएं स्थानीय लोगों के बीच प्रचलित हैं,  बताया जाता है कि एक पूर्व मठाधीश, घरभरन बाबा, लोगों के आग्रह पर एक कन्यादान समारोह में शामिल होने के लिए पालकी से मठ की सीमा पार कर गए थे। लोककथाओं के अनुसार, लौटते समय उन्हें काले नाग ने डंस लिया, जिससे उनकी मौत हो गई। वहीं, जिस लड़की का कन्यादान उन्होंने किया था, उसके बारे में भी कहा जाता है कि वह उसी दिन विधवा हो गई।

एक अन्य कथा के अनुसार, एक मठाधीश आम तोड़ने के दौरान गलती से अपना पैर मठ की सीमा के बाहर ले गए थे। कुछ समय बाद उनका वही पैर गंभीर रूप से प्रभावित हो गया और उन्हें लंबे समय तक बिस्तर पर रहना पड़ा।

16 साल से मठ में रह रहे पुजारी, बाहर जाने की नहीं हुई हिम्मत

मौजूदा पुजारी का कहना है कि वह पिछले 16 वर्षों से इस मठ में सेवा कर रहे हैं, लेकिन आज तक उन्होंने मठ की सीमा पार करने का साहस नहीं किया। यहां आज भी पूर्व मठाधीशों की खड़ाऊं की पूजा की जाती है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस मठ में सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है। हालांकि, यह मान्यताएं और घटनाएं स्थानीय आस्था और परंपराओं पर आधारित हैं, लेकिन रहस्य, विश्वास और सदियों पुरानी परंपरा के कारण यह मठ आज भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

Location :  New Delhi

Published :  28 May 2026, 2:41 PM IST

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