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मैनपुरी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान योग गुरु स्वामी रामदेव ने अंतरराष्ट्रीय मुद्दों और चर्चित एपस्टीन फाइल को लेकर ऐसा बयान दिया, जिसने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इस बयान के बाद राजनीतिक हलको में बहस तेज हो गई है।
एपस्टीन मामले में स्वामी रामदेव का बड़ा बयान
Mainpuri: उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान योग गुरु बाबा रामदेव ने अंतरराष्ट्रीय मुद्दों और चर्चित एपस्टीन फाइल को लेकर बड़ा बयान दिया। ‘भारतीय शिक्षा बोर्ड’ (भारतीय संस्कृति आधारित) विद्यालय के भव्य शुभारंभ समारोह में पहुंचे स्वामी रामदेव ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि इस विवादित फाइल के सामने आने से दुनिया के कई प्रभावशाली लोगों की सच्चाई उजागर हो रही है।
कार्यक्रम के दौरान स्वामी रामदेव ने कहा कि एपस्टीन फाइल को लेकर वैश्विक स्तर पर जो चर्चाएं हो रही हैं, वह बेहद गंभीर विषय है। उनके अनुसार इस फाइल के सार्वजनिक होने के बाद दुनिया के कई बड़े और प्रभावशाली नामों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जिन लोगों को दुनिया में ताकत, संपत्ति और प्रभाव का प्रतीक माना जाता है, उनके नाम इस तरह के विवादों में सामने आना समाज के लिए चिंताजनक है। स्वामी रामदेव ने इसे केवल किसी एक देश का मामला नहीं बल्कि पूरी दुनिया की नैतिक व्यवस्था से जुड़ा विषय बताया।
स्वामी रामदेव ने अपने बयान में कहा कि इस विवादित मामले में दुनिया की कई बड़ी हस्तियों के नाम चर्चा में हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए डोनाल्ड ट्रंप, एलन मस्क और बिल गेट्स जैसे प्रमुख व्यक्तियों का जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि जब इतने बड़े और प्रभावशाली लोग विवादों में घिरते हैं तो इसका असर समाज और वैश्विक व्यवस्था पर पड़ता है। ऐसे मामलों से दुनिया में नैतिकता और मूल्यों को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं।
योग गुरु ने इस दौरान वर्तमान अंतरराष्ट्रीय हालातों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव और संभावित युद्ध की स्थितियां पूरी मानवता के लिए खतरा बन सकती हैं।
उन्होंने कहा कि एक ओर दुनिया तकनीक, व्यापार और विकास में आगे बढ़ रही है, लेकिन दूसरी ओर नैतिक मूल्यों में गिरावट भी तेजी से दिखाई दे रही है।
कार्यक्रम के दौरान स्वामी रामदेव ने भारतीय संस्कृति और संस्कारों पर आधारित शिक्षा व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पाश्चात्य संस्कृति के बढ़ते प्रभाव के कारण समाज में नैतिक गिरावट देखने को मिल रही है।
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उनका कहना था कि बच्चों और युवाओं को सही दिशा देने के लिए भारतीय संस्कृति और मूल्यों पर आधारित शिक्षा बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से ‘भारतीय शिक्षा बोर्ड’ के माध्यम से नई पीढ़ी को संस्कारयुक्त और जिम्मेदार नागरिक बनाने की पहल की जा रही है।