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यूपी के सोनभद्र में चीकूटोला गांव में बीते छह महीनों से आरओ प्लांट खराब पड़ा है, जिससे पेयजल संकट लोगों के बीच बड़ी समस्या बन गई है। पढे़ं डाइनामाइट न्यूज़ की पूरी खबर
चीकूटोला गांव में आरओ प्लांट से परेशान ग्रामीणों का प्रदर्शन
सोनभद्र: विकास खंड बभनी के ग्राम पंचायत बभनी अंतर्गत चीकूटोला गांव में बीते छह महीनों से आरओ प्लांट खराब पड़ा है, जिससे गांव के करीब 50 घरों को शुद्ध पेयजल नहीं मिल पा रहा है। इस गंभीर समस्या को लेकर मंगलवार को आक्रोशित ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया और जिलाधिकारी से आरओ प्लांट की मरम्मत कराने की मांग की।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार, प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों में मनोहर कुशवाहा, राजदेव गोड़, राम सहाय, रमेश गोड़, हरि किशुन, बसन्त खरवार, आदित्य प्रसाद, भागीरथी, संतोष कुमार, रामलाल, अशर्फी, जीत सिंह, राजकेश्वर सहित दर्जनों लोग शामिल थे। इन लोगों ने आरोप लगाया कि वे बीते छह महीनों से ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी से कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
ग्रामीणों ने बताया कि चीकूटोला में देवरुप गोड़ के घर के पास लगा आरओ प्लांट खराब होने के बाद से उन्हें शुद्ध जल के लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। इससे महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। गर्मी के इस मौसम में पानी की समस्या और भी गंभीर हो गई है, लेकिन प्रशासन और पंचायत स्तर पर इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
चीकूटोला गांव में छह महीनों से खराब पड़ा आरओ प्लांट
ग्रामीणों का कहना है कि जिस उद्देश्य से यह आरओ प्लांट लगाया गया था, वह पूरी तरह विफल हो चुका है। शुद्ध पेयजल की उपलब्धता न होने के कारण लोगों की सेहत पर भी खतरा मंडरा रहा है। गंदा और असुरक्षित पानी पीने से कई लोग बीमार भी हो रहे हैं।
इस संबंध में ग्राम पंचायत अधिकारी राम दर्शन यादव ने बताया कि आरओ प्लांट की मरम्मत में देरी कुछ आवश्यक पार्ट्स उपलब्ध न होने के कारण हो रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि बहुत जल्द आरओ प्लांट को ठीक करा दिया जाएगा और शुद्ध पेयजल की आपूर्ति पुनः शुरू होगी।
हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि वे अब आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहते हैं। यदि जल्द ही मरम्मत कार्य शुरू नहीं हुआ, तो वे मजबूर होकर उग्र आंदोलन करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यह केवल शुरुआत है, यदि पानी की समस्या का समाधान शीघ्र नहीं हुआ, तो वे जिला मुख्यालय पर भी धरना देंगे।
अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक जागता है और ग्रामीणों को उनकी सबसे जरूरी सुविधा, शुद्ध पेयजल कब तक उपलब्ध हो पाता है।