सहारा समूह को झटका! लखनऊ हाईकोर्ट से नगर निगम की कार्रवाई को मिली मंजूरी

सहारा शहर मामले में लखनऊ हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने नगर निगम को बड़ी राहत दी है। अदालत ने सहारा कमर्शियल की रिट याचिका खारिज करते हुए निगम की कार्रवाई को वैध माना। गोमतीनगर स्थित 170 एकड़ जमीन पर लीज शर्तों के उल्लंघन के बाद की गई सीलिंग और कब्जे को न्यायसंगत बताया गया है।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 29 April 2026, 7:25 PM IST
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Lucknow: सहारा शहर मामले में लंबे समय से चल रहा विवाद आखिरकार नगर निगम के पक्ष में जाकर खत्म होता नजर आ रहा है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने सहारा कमर्शियल की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए नगर निगम की कार्रवाई को पूरी तरह से सही ठहराया है। इस फैसले के बाद न सिर्फ कानूनी मोर्चे पर बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी नगर निगम को बड़ी राहत मिली है। गोमतीनगर स्थित इस बहुचर्चित 170 एकड़ जमीन विवाद में अदालत का यह निर्णय अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे नगर निगम की पूरी कार्रवाई को वैधता मिल गई है।

क्या है पूरा मामला

यह पूरा विवाद गोमतीनगर स्थित सहारा शहर की 170 एकड़ जमीन से जुड़ा हुआ है। जानकारी के अनुसार यह जमीन वर्ष 1994 में लीज पर दी गई थी, जिसमें कई शर्तें तय की गई थीं। इन शर्तों के तहत जमीन का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के लिए ही किया जाना था और विकास कार्य भी तय मानकों के अनुसार पूरे किए जाने थे। नगर निगम का आरोप था कि सहारा समूह ने लीज की शर्तों का पालन सही तरीके से नहीं किया। समय-समय पर किए गए निरीक्षणों और जांच में कई निर्माण और उपयोग संबंधी नियमों के उल्लंघन पाए गए। इसके बाद नगर निगम ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई शुरू की।

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नगर निगम की कार्रवाई

जांच रिपोर्ट के आधार पर नगर निगम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूरे सहारा शहर परिसर के छहों गेटों को सील कर दिया और प्रशासनिक नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। निगम का कहना था कि कई बार चेतावनी और नोटिस देने के बावजूद नियमों का पालन नहीं किया गया, जिसके कारण यह कदम उठाना जरूरी हो गया। नगर निगम ने यह भी दावा किया कि वर्ष 2020 और 2025 में सहारा समूह को कई बार नोटिस भेजे गए थे ताकि वे लीज की शर्तों का पालन कर सकें और स्थिति को सुधार सकें। लेकिन जब सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो अंतिम कार्रवाई करनी पड़ी।

सहारा समूह की दलील और अदालत में चुनौती

नगर निगम की इस कार्रवाई को सहारा कमर्शियल ने चुनौती दी और इसे मनमाना तथा प्रक्रिया के विपरीत बताया। याचिका में कहा गया कि निगम ने बिना पर्याप्त आधार और उचित प्रक्रिया का पालन किए जमीन पर कब्जा कर लिया और गेट सील कर दिए।

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हाईकोर्ट में सुनवाई और अहम टिप्पणी

मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें अदालत के सामने रखीं। नगर निगम की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि पूरी कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है और सभी नियमों का पालन किया गया है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और दस्तावेजों का अध्ययन करने के बाद पाया कि नगर निगम की कार्रवाई नियमों के अनुसार थी। अदालत ने माना कि सार्वजनिक भूमि के उपयोग और लीज शर्तों के पालन को लेकर निगम का हस्तक्षेप उचित था।

लीज उल्लंघन और 30 साल का मुद्दा

इस पूरे मामले में एक अहम बात यह भी सामने आई कि लीज की अवधि और शर्तों का पालन लंबे समय से ठीक तरीके से नहीं किया गया था। बताया गया कि करीब 30 वर्ष की लीज अवधि समाप्त होने के बाद भी निर्धारित विकास कार्य पूरे नहीं किए गए थे।

Location :  Lucknow

Published :  29 April 2026, 7:25 PM IST

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