यूपी के लाल ने एशियन गेम्स में रचा इतिहास: कभी कैब चलाकर पाला परिवार, अब रोइंग में जीता देश के लिए मेडल

अमेठी के साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले सलमान खान ने एशियन गेम्स की रोइंग प्रतियोगिता में भारत के लिए ऐतिहासिक मेडल जीता है। पिता के निधन के बाद भुखमरी और मजबूरी में उन्होंने दिल्ली की सड़कों पर कैब चलाई, जानिये यूपी के होनहार की पूरी स्टोरी।

Updated : 24 September 2026, 12:12 PM IST
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Amethi: उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के एक छोटे से गांव पूरे धींगई से ताल्लुक रखने वाले सलमान खान ने अपनी मेहनत और जज्बे से देश का नाम रोशन कर दिया है। जापान के नागोया में हुए मेंस डबल स्कल्स रोइंग के फाइनल मुकाबले में उन्होंने ऐतिहासिक मेडल जीतकर भारत का तिरंगा बुलंद किया। यह सफलता सिर्फ एक पदक नहीं, बल्कि उस अदम्य संघर्ष की दास्तान है जो उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में तय किया।

पिता की मौत और परिवार का बोझ

बचपन से ही भारतीय सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करने का सपना देखने वाले सलमान की जिंदगी तब अचानक बदल गई जब वे मात्र 18 वर्ष के थे। उनके पिता मोहम्मद कासिम खान का डेंगू के कारण असामयिक निधन हो गया। छह भाई-बहनों में सबसे बड़े होने के नाते परिवार के पालन-पोषण और छोटे भाई-बहनों की जिम्मेदारी रातों-रात उनके कंधों पर आ गई। पेट की आग बुझाने और परिवार को संभालने के लिए उन्हें अपने फौज में जाने के सपने को पीछे छोड़कर दिल्ली आना पड़ा और मजबूरी में कैब चलानी पड़ी।

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कैब की स्टियरिंग से लेकर भारतीय सेना तक का सफर

दिल्ली की सड़कों पर दिन-रात कैब चलाते हुए भी सलमान के दिल में वर्दी पहनने की जिद जिंदा थी। एक दोस्त की सलाह पर उन्होंने एक बार फिर आर्मी भर्ती के लिए कोशिश की। केवल चार महीने की कड़ी मेहनत के दम पर 25 सितंबर 2018 को वे बॉम्बे इंजीनियर ग्रुप, पुणे में भारतीय सेना का हिस्सा बन गए। सेना में शामिल होने के बाद उनके जीवन को एक नई और सही दिशा मिली।

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रोइंग में रचा इतिहास और मिला नायब सूबेदार का पद

सेना में आने के बाद कोचों ने उनकी लंबी कद-काठी को भांपते हुए उन्हें रोइंग खेल में उतरने की सलाह दी। शुरुआती दौर में नाव संभालना उनके लिए बेहद कठिन था और कई बार उनका हौसला भी टूटा, लेकिन सीनियर कोचों के समर्थन से उन्होंने हार नहीं मानी। इसके बाद उन्होंने नेशनल गेम्स से लेकर एशियन रोइंग कप तक शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किए। उनके इसी ऐतिहासिक और प्रेरणादायक प्रदर्शन से प्रभावित होकर भारतीय सेना ने उन्हें 'नायब सूबेदार' के पद पर पदोन्नत किया है।

Location :  Amethi

Published :  24 September 2026, 12:12 PM IST

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