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यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपना बड़ा फैसला सुना दिया है। आखिर कोर्ट ने गिरफ्तारी को लेकर क्या आदेश दिया और दोनों पक्षों पर कौन सी नई पाबंदी लगाई है? इस मामले से जुड़ी पूरी कानूनी जानकारी यहाँ पढ़ें।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को मिली राहत
Prayagraj: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी को बड़ी राहत दी है। अदालत ने दोनों की अग्रिम जमानत याचिका को मंजूर कर लिया है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की सिंगल बेंच ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया।
इस मामले में सुनवाई काफी समय से चल रही थी और हाईकोर्ट ने 27 फरवरी को ही अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। जमानत देने के साथ ही कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्देश भी दिया है। अदालत ने आदेश दिया है कि इस मामले से जुड़े दोनों पक्ष, यानी शिकायतकर्ता और आरोपी, फिलहाल मीडिया में कोई इंटरव्यू नहीं देंगे। इस फैसले को शंकराचार्य के लिए एक बड़ी कानूनी जीत के रूप में देखा जा रहा है।
यह पूरा मामला आश्रम से जुड़े नाबालिग बच्चों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने अदालत में शिकायत दर्ज कराई थी कि आश्रम में रहने वाले कुछ नाबालिगों के साथ गलत व्यवहार हुआ है। प्रयागराज की विशेष पॉक्सो (POCSO) कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी। आरोपों के मुताबिक, पिछले एक साल के दौरान दो लोगों के साथ यौन उत्पीड़न की घटनाएं हुई थीं।
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गिरफ्तारी के डर से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि कोर्ट ने उन्हें अग्रिम जमानत दे दी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि केस खत्म हो गया है। मामले की जांच एजेंसियां अपनी कार्रवाई जारी रखेंगी और कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की सुनवाई होती रहेगी। पुलिस फिलहाल साक्ष्यों और बयानों के आधार पर अपनी तफ्तीश को आगे बढ़ा रही है।