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समाजवादी पार्टी ने बरेली में बड़ी कार्रवाई करते हुए पूरी जिला कार्यकारिणी को भंग कर दिया है। कथित अश्लील वीडियो और गुटबाजी के चलते हाईकमान ने कई दिग्गज नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाया।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Img: Google)
Bareilly: समाजवादी पार्टी में अनुशासनहीनता अब बर्दाश्त नहीं होगी, इसका बड़ा संदेश बरेली से दिया गया है। संगठन की साख पर सवाल खड़े कर रहे विवादों के बीच सपा के शीर्ष नेतृत्व ने एक झटके में पूरी जिला कार्यकारिणी को भंग कर दिया। कथित अश्लील वीडियो वायरल होने और अंदरूनी गुटबाजी से पार्टी की छवि को हो रहे नुकसान के बाद हाईकमान ने सख्त कदम उठाते हुए पूरी टीम को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। इस फैसले से सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
क्यों हुई इतनी बड़ी कार्रवाई?
यह कार्रवाई समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने पार्टी मुखिया अखिलेश यादव के निर्देश पर की है। बताया जा रहा है कि बीते कुछ समय से बरेली इकाई को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। जिलाध्यक्ष पर अश्लील वीडियो वायरल होने के आरोप लगे थे, वहीं संगठन के अंदर आपसी खींचतान और गुटबाजी खुलकर सामने आ चुकी थी। पार्टी नेतृत्व को यह भी लग रहा था कि इन विवादों की वजह से आगामी चुनावों से पहले संगठन कमजोर पड़ सकता है।
किन नेताओं पर गिरी गाज
इस कार्रवाई की जद में सबसे बड़ा नाम जिलाध्यक्ष शिव चरन कश्यप और महानगर अध्यक्ष शमीम खा सुल्तानी का है। दोनों को पद से हटाकर साफ संदेश दे दिया गया है कि पद बड़ा नहीं, अनुशासन जरूरी है। इनके साथ जिला उपाध्यक्ष रविंद्र सिंह यादव, इंजीनियर अनीस अहमद, सुरेंद्र सोनकर, अरविंद यादव और हरिशंकर यादव को भी पदमुक्त कर दिया गया है।
पूरी टीम को किया गया बाहर
इसके अलावा सूरज यादव, आदेश यादव, दीपक शर्मा, नरेश सोलंकी, भारती चौहान, स्मिता यादव, सरताज ग़ज़ल अंसारी और ओमेंद्र यादव पर भी कार्रवाई की गई है। पार्टी ने कासिफ, जितेंद्र मुंडे, राम सेवक प्रजापति, मुकेश मिश्रा, संजीव कश्यप, मोहित कश्यप, गंगा सिंह यादव, राजवीर यादव, प्रदीप यादव, हैपी यादव, चंद्र सैन सागर, मंगल बाबू सोनकर, अनिल गंगवार, बलराम यादव, सुरेश गंगवार, डॉ. इंद्रपाल यादव, रमेश यादव, राकेश यादव, हरिओम ऋषि यादव, रणवीर जाटव, बृजेश आजाद, अमरीश यादव शिवम, पुरुषोत्तम गंगवार, छेदलाल दिवाकर और जिला कोषाध्यक्ष अशोक यादव को भी पद से हटा दिया है।
आगे क्या है पार्टी की रणनीति?
सपा सूत्रों के मुताबिक अब बरेली में संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की तैयारी है। पार्टी साफ-सुथरी छवि वाले, ऊर्जावान और जमीनी नेताओं को जिम्मेदारी सौंपने के मूड में है। यह कार्रवाई कार्यकर्ताओं के लिए एक कड़ा संदेश मानी जा रही है कि अनुशासन और संगठन सर्वोपरि है।