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ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में टाटा यूरेका पार्क सोसाइटी निवासी युवराज की जिस गड्ढे में कार सहित डूबने से मौत हुई, वहां चौथे दिन भी मीडिया और स्थानीय लोगों का तांता लगा रहा। आज एनडीआरएफ की कई टीमें नाव की मदद से गाड़ी की तलाश में जुटी हुई हैं। देखिये कौन है इंजीनियर की मौत का असली जिम्मेदार।
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में टाटा यूरेका पार्क सोसाइटी निवासी युवराज की जिस गड्ढे में कार सहित डूबने से मौत हुई, वहां चौथे दिन भी मीडिया और स्थानीय लोगों का तांता लगा रहा। आज एनडीआरएफ की कई टीमें नाव की मदद से गाड़ी की तलाश में जुटी हुई हैं। स्थानीय लोगों से पहुंचकर ग्राउंड जीरो पर डाइनामाइट न्यूज़ से बात, सभी के दिल में गुस्सा और जुबान पर आक्रोश हैं।
प्रशासन की लापरवाही का आलम खुद तस्वीरें बता रही हैं, हादसे के चार दिन बीत जाने के बाद भी अभी तक गाड़ी भी बरामद नहीं की जा सकी हैं। हादसे के बाद सीएम योगी ने नोएडा के सीईओ एम लोकेश को हटाकर एसआईटी गठित की गई है, जिससे पांच दिन में रिपोर्ट मांगी गई हैं।
हादसे पर जब हमारी टीम मौजूद थी तभी कुछ मजदूर मशीनों के साथ नजर आए हमारे पूछने पर उन्होने बताया वो स्पीड ब्रेकर को पेंट करने के लिए पहुंचे है, ताकि आने जाने वाले हादसे वाली जगह से ठीक पहले बना स्पीड ब्रेकर दिख सके, ऐसे में बड़ा सवाल यह है, क्यों मौत के गड्डे से पहले बने स्पीड ब्रेकर को पहले से ही पेंट करके आस पास बेरिगेड लगाकर लाईटों को क्यों पहले से ही दुरुस्त नहीं किया गया, क्यों प्रशासन किसी मासूम की मौत के बाद ही जागता हैं।
वहीं उस रात युवराज को बचाने वाले डिलीवरी बॉय को पुलिस ने लंबी पुछताछ के लिए थाने में बिठाए रखा जिसके बाद उसने भी अपने पहले वाले बयान को पलटते हुए पुलिस की उस रात की कार्ऱवाई को सही बताया।
सबकी जुबां एक ही सवाल था आखिर युवराज को किसने मारा? नोएडा प्राधिकरण की लापरवाही या कुछ और? युवराज की मौत के दोषियों को सजा मिले।