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मुजफ्फरनगर के ऑल्ड टायर रिसाइक्लिंग प्लांट में वायरल वीडियो के बाद बंद होने का रहस्य सामने आया। मालिक जतिन पाल ने खुलासा किया कि प्लांट में काम करने वाले कुछ कर्मचारियों ने उसे बदनाम करने के लिए साजिश रची थी।
ऑल्ड टायर प्लांट
Muzaffarnagar: भंडूरा गांव में जौली रोड पर स्थित 'श्री बालाजी एंटरप्राइजेज' (ऑल्ड टायर रिसाइक्लिंग प्लांट) तीन महीने पहले एक वायरल वीडियो के बाद अचानक बंद हो गया था। वीडियो में प्लांट से काले धुएं का भारी स्राव दिखा, जिसने मीडिया, स्थानीय लोगों और प्रदूषण नियंत्रण विभाग में हड़कंप मचा दिया। पूरे इलाके में खबर फैलते ही अधिकारियों ने तत्काल प्लांट का संचालन रोक दिया, लेकिन अब प्लांट मालिक जतिन पाल ने सनसनीखेज खुलासा किया है कि यह सब अंदरूनी साजिश का हिस्सा था।
जतिन पाल ने बताया कि प्लांट में काम करने वाले कुछ कर्मचारियों ने बंद रिएक्टर के नीचे ईंधन की जगह पुराने टायर डाल दिए। जब आग लगी और धुआं बाहर निकला तो उसी समय उन्होंने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। जतिन का कहना है कि यह सब मुझे ब्लैकमेल करने और ठेकेदार-मजदूरों के बीच चल रही तनातनी को बढ़ावा देने के लिए किया गया। फैक्ट्री मालिक ने साफ किया कि यह किसी तकनीकी खराबी की वजह से नहीं हुआ।
वीडियो वायरल होने के बाद जतिन ने प्लांट की पूरी तकनीकी जांच करवाई। जांच में कोई बड़ी खराबी सामने नहीं आई। प्लांट में नाइट्रोजन सिस्टम, ईटीपी, बैलून सिस्टम और पानी के छरने वाले हौज लगाए गए हैं। रिएक्टर से निकलने वाली गैस पानी के झरने के बाद ही बैलून तक पहुंचती है। जिससे प्रदूषण नियंत्रित रहता है। जांच रिपोर्ट में साफ लिखा गया कि प्लांट सभी मानकों के अनुसार काम कर रहा था।
साजिश का पर्दाफाश होते ही आरोपित कर्मचारियों को हटा दिया गया। प्लांट के तकनीशियन मोहम्मद इमरान ने भी पुष्टि की कि धुआं इतनी मात्रा में बाहर निकलना संभव नहीं था और यह साजिश ही थी। अब मालिक कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं।
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जतिन पाल और कर्मचारी इमरान ने बताया कि प्लांट में यदि कोई छोटी कमी मिली तो उसे तुरंत दुरुस्त किया गया। रिएक्टर को टीनशेड से कवर किया जा रहा है और पानी के झरने वाले टैंकों की क्षमता बढ़ा दी गई है। मालिक का कहना है कि प्लांट पूरी तरह पर्यावरण मानकों के अनुसार काम कर रहा है।