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ड़ी हुई ईंटों और घटिया रेत से नालियों व फर्श का निर्माण (सोर्स- डाइनामाइट न्यूज़)
Mirzapur: उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार भले ही भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति का दावा करती हो, लेकिन धरातल पर सरकारी अधिकारी और ठेकेदार मिलकर सरकार की साख को बट्टा लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। ऐसा ही एक ताजा मामला मिर्जापुर जिले के करेरुआ ग्राम सभा से सामने आया है, जहाँ नलकूप (ट्यूबवेल) सुंदरीकरण कार्य में बड़े पैमाने पर घोटाले और भ्रष्टाचार का खेल खेला जा रहा है। यहाँ मानक को ताक पर रखकर सड़ी हुई ईंटों और घटिया रेत से नालियों व फर्श का निर्माण धड़ल्ले से किया जा रहा है।
सरकार द्वारा प्रत्येक ट्यूबवेल के सुंदरीकरण के तहत एक लाख रुपए से कुछ अधिक का बजट आवंटित किया गया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह है कि ट्यूबवेल के सामने एक अच्छी और मजबूत फर्श बनाई जा सके, पानी की टंकी को सुधारा जा सके और नालियों इत्यादि की उचित मरम्मत हो, ताकि किसान वहां आकर आराम से बैठ सकें और पानी की सुविधा का लाभ ले सकें। इस पूरे काम का ठेका लाखों रुपये में होता है। लेकिन करेरुआ ग्राम सभा में इस बजट का दुरुपयोग साफ देखा जा सकता है, जहाँ किसानों की सुविधा के नाम पर सिर्फ औपचारिकता पूरी की जा रही है। छोटे पैमाने के इस काम में भी भ्रष्टाचार का जादू सिर चढ़कर बोल रहा है।
नियमों और मानकों के मुताबिक, इस निर्माण कार्य में एक नंबर की उत्तम लाल ईंट का प्रयोग करने का कड़ा प्रावधान है। इसके विपरीत, करेरुआ में सड़ी हुई और बेहद घटिया दर्जे की ईंटों का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है। जब स्थानीय ग्रामीणों ने इस धांधली की शिकायत की, तो नलकूप विभाग के जूनियर इंजीनियर (जेई) धर्मेंद्र कुमार मौके पर पहुंचे। उम्मीद थी कि वह काम रुकवाएंगे या सामग्री बदलवाएंगे, लेकिन उन्होंने सामग्री को बदलने के बजाय अजीबोगरीब तर्क देते हुए कहा कि इसकी जांच करवाई जाएगी।
अब बड़ा सवाल यह उठता है कि जांच कब होगी? क्या जांच तब होगी जब घटिया निर्माण पूरी तरह संपन्न हो चुका होगा? इतना ही नहीं, आरोप है कि जेई धर्मेंद्र कुमार खुद पुरानी और खराब ईंटें लगाने की सलाह दे रहे हैं, जो विभाग की मिलीभगत को साफ उजागर करता है।
इस मामले को लेकर जब खुद जेई से बात की गई, तो उनका बेखौफ अंदाज देखने को मिला। उनके बयान से साफ जाहिर होता है कि उन्हें किसी कार्रवाई का डर नहीं है। बातचीत के दौरान जेई धर्मेंद्र ने कथित तौर पर कहा कि "हमारा तो कुछ नहीं होगा, बस OSR (ओरिजनल साइट रिकॉर्ड) में बदलाव करना रहा होगा।" अधिकारियों के इस रवैये से साफ है कि नीचे से लेकर ऊपर तक एक बड़ा 'सिस्टम' काम कर रहा है। भ्रष्टाचार के खेल में जो भी पैसा बचता है, उसका बंटवारा नीचे से लेकर ऊपर बैठे आला अफसरों तक होता है, इसीलिए कोई भी अधिकारी जमीनी स्तर पर कार्रवाई करने से कतराता है।
नाम न छापने की शर्त पर एक स्थानीय निवासी ने कहा कि- भ्रष्टाचार का आलम यह है कि आप किसी भी विभाग में, किसी भी अधिकारी को लिखित एप्लीकेशन (शिकायत) दे दीजिए, लेकिन कोई जांच या कार्रवाई नहीं होनी है।
करेरुआ के स्थानीय निवासियों में इस निरंकुश प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान सरकार में अधिकारी पूरी तरह बेलगाम हो चुके हैं। वे अपनी मनमर्जी कर रहे हैं, जिससे आम जनता लगातार पिसती जा रही है और अधिकारी अपनी जेबें भरकर मस्त हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अधिकारियों के इसी रवैये के कारण कहीं ऐसा ना हो कि आगामी 2027 के चुनाव में जनता इस सरकार को उखाड़ फेंकने का काम करे।
फिलहाल, करेरुआ ग्राम सभा में नलकूप सुंदरीकरण के नाम पर जो तमाशा चल रहा है, उसे देखकर स्थानीय स्तर पर एक ही कहावत पूरी तरह सटीक बैठती है- 'अंधेर नगरी, चौपट राजा; टके सेर भाजी, टके सेर खाजा।' अब देखना यह होगा कि क्या उच्च अधिकारी इस खुले भ्रष्टाचार का संज्ञान लेते हैं या फिर यह घोटाला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा।
Location : Mirzapur
Published : 4 July 2026, 8:25 AM IST